पिछला दस साल से भोजपुरी के वेबसाइट चलावत अपना अनुभव से इहे सिखले बानी कि भोजपुरी में वेबसाइट चलावल बहुते मुश्किल काम होला. सबसे पहिले भोजपुरी में वेबसाइट शुरू भइल रहे अँजोरिया. एकरा बाद बहुते वेबसाइट अइलीं स. कुछेक त बहुते मजगर तरीका से निकलली सँ बाकिर गँवे गँवे सभकर उत्साह मधिम होत चल गइल. जब कवनो वेबसाइट शुरु होला त बहुते उछाह रहेला शुरू करेवालन का मन में. सोचेला लोग कि बहुते सफल हो जाई लोग. बाकिर जब पता चलेला कि एकर कवनो व्यावसायिक पक्ष नइखे त फेर धीरे धीरे अलस्त पड़त जाला लोग.

अब ई अँजोरिया के सौभाग्य कहीं भा दुर्भाग्य बाकिर बिना कवनो संसाधन, बिना कवनो ढाँचा एकरा के अबले चलावत आइल बानी. अब जब जवानी ढलान पर बिया आ रिटायर होखे के उमिर सोझा लउके लागल बा त चिंता होत बा कि कइसे एकरा के सम्हारल जाव. बहुत सोच समुझ के आजु महाशिवरात्रि पर कल्याणकारी शिव से आशीष माँगत एगो दुस्साहस करत बानी. सोचत बानी कि कुछ प्रशिक्षु लोगन के अपना साथे जोड़ीं. आ कुछ अइसन करीं कि भोजपुरी कुछ लोग के जीविका बने लागे. कैच देम यंग का सिद्धांत के पालन करत कालेजिया विद्यार्थियन के एह “जिए भोजपुरी आन्दोलन” से जोड़े के योजना बनावत बानी. नवहियन के कुछ सिखावल आसान होखी, नवहियन के इंटरनेट से यारी दोस्ती होला, आ आवे वाला जमाना नवहियने के बा. दोसरे कालेजिया विद्यार्थियन के कम खरचा पर राखल जा सकेला.

पहिला चरण में अँजोरिया उत्तरप्रदेश आ बिहार के बाइस गो भोजपुरी भाषी जिला जनपद से शुरूआत करत बिया. एह जिलन के नाम ह “पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, बलिया, देवरिया, मऊ, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, ,गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, सोनभद्र, आ इलाहाबाद”. हर जगहा से एगो प्रशिक्षु प्रतिनिधि चुनल जाई.

प्रशिक्षु प्रतिनिधि बने वाला स्नातक कक्षा के मौजूदा विद्यार्थी होखे के चाहीं जे इंटरनेट पर रोजाना एक घंटा दे सके आ अंजोरिया शैली में भोजपुरी लिख सके.

एह प्रशिक्षु प्रतिनिधियन के सालभर के प्रशिक्षण के दौरान हर महीना डेढ़ हजार रुपिया के मानदेय का अलावे बढ़िया कमीशन दिहल जाई. अगर कुछ कमाए जोग ना कर पइहें तबहियों उनुका के डेढ़ हजार रुपिया के मानदेय साल भर ले दिहल जाई बशर्ते एह बीच उनकर काम संतोषजनक रहे. जिनकर काम संतोषजनक ना रही उनुका के बीचो में हटावल जा सकेला जवन ओही दिन लागू हो जाई जहिया उनुका के खबर भेजल जाई. सालभर प्रशिक्षण लिहला का बाद सफल प्रशिक्षुअन के नियमित वेतन पर नियुक्त कर लिहल जाई.

सफलता के मापदंड रही प्रशिक्षण का दौरान ओह प्रशिक्षु के अर्जित कमीशन. अगर प्रशिक्षु साल भर में कुल मिला के कम से कम साठ हजार रुपिया कमीशन अर्जित कर ली त ओकरा के नियमित वेतन पर राख लिहल जाई. आ वेतन खुद ओकरे काम से तय होई. प्रशिक्षण का दौरान मिलल औसत महीनवारी आमदनी ओकर नियमित वेतन हो जाई आ कमीशन ओकरा उपर से मिलल करी.

अब सवाल उठत बा कि प्रशिक्षु के काम का करे के बा?

१. प्रशिक्षु रोजाना अपना इलाका के कम से कम पाँच गो खबर भोजपुरी में भेजल करी.
२. इलाका के भोजपुरी साहित्यकारन से मेल जोल राखत ओह लोग के रचना अँजोरिया पर प्रकाशित करे ला भेजत भेजवावत रही.
३. हर महीना इलाका के भोजपुरी साहित्यकारन के गोष्ठी आयोजित करी जवना में दस से अधिका साहित्यकारन के शामिल भइला पर हर बइठकी के चाय नाश्ता ला एक हजार रुपिया के भुगतान दिहल जाई.
४. इलाका के स्कूल, कॉलेज, नर्सिंग होम, बिजनेस प्रतिष्ठान, संगठन वगैरह से संपर्क कर के ओह लोग के आपन वेबसाइट बनवावे ला प्रोत्साहित करी आ हर वेबसाइट के आदेश पर भुगतान मिलला क बाद प्रशिक्षु के एक हजार रुपिया के कमीशन दिहल जाई.
५. अँजोरिया समूह के वेबसाइटन पर विज्ञापन बिटोरे पर बीस फीसदी के कमीशन मिलल करी.

कोशिश रही कि हर प्रशिक्षु महीना में दस पन्दरह हजार रुपिया कमा लेव. बाकिर एकरा ला ओकरा पूरा मेहनत करे के पड़ी. देखल जाव कि एह प्रयास से कतना फायदा होखत बा. अगर रउरा खुद भा अपना कवनो जान पहिचान के एह काम में लगवावल चाहत बानी त आजुए से देवनागरी लिपि में इलाका के खबर भिजवावल शुरू कर दीं. सात दिन का भितरे बता दिहल जाई कि रउरा एह काम लायक बानी कि ना. एह सात दिन ला कवनो भुगतान ना दिहल जाई, ई काम आवेदन आ चयन प्रक्रिला कइल जाई. अगर सात दिन का भीतर राउर बतौर प्रशिक्षु चयन नइखे होत त आगे खबर भेजल बन्द कर दीं.

बाकिर ई सब करे से पहिले आपन नाम पता, कालेज के नाम, आपन परिचय पत्र के स्कैन कापी, आ आपन फोन नंबर जरूर भेज दीं. ई आवेदन भोजपुरी में आ देवनागरी लिपि में होखे के चाहीं.

मेल anjoria@outlook.com पर जतना जल्दी हो सके भेजीं.

एह मुद्दा पर आपन राय सलाहो जरूर दीं.

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