– ओमप्रकाश अमृतांशु

BharatSharma-NaliniJhaकला कवनो जाति भा सम्प्रदाय के ना होखे. कला समाज के आईना होखेला. विद्वान लोग संगीत कला के सबसे उपर स्थान देले बा. संगीत साधना जेतने कठिन होखेला साधक के आत्मा ओतने कोमल. प्रकृति के कण-कण में संगीत समाहित बा. संगीत के बिना जीवन के कवनो परिकल्पना नइखे कइल जा सकत
.
पिछला दिने मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली के ओर से संगीत उत्सव भइल. बाजे लागल डंका दुनो भाषा-भाषी लोगन के. उमडे लागल अपार भीड़. पहिलका दिन भोजपुरी के डोर गायक गजाधर ठाकुर के आ मैथिली के देवानंद झा के दियाइल रहे. दुनो कलाकार बारी-बारी से आपन-आपन गायकी से दर्शक लोगन के मंत्र मुग्ध कइलन. देखवईया आ सुनवईया लोगन के झूमे पे मजबूर. अवाज के जादू आ संगीत के झनकार से गूंज उठल दिल्ली. सैकड़ो मिल दूर जब आपन संस्कृति के गंध उड़ेला त मन केतना रोमंचित हो उठेला कहे के नइखे, सभे के पता बा.

दूसरा दिन सबसे पहिले नलिनी झा के कथक नृत्य से समारोह के श्रीगणेश भइल. अरे वाह! अद्भूत प्रस्तुति. एतना सुन्दर कथक के भाव फ्री में देखे के मिलल. आउर का चाहीं. सभेके मन गदगदा गइल. फेर भोजपुरी लोक गायकी के बादशाह भरत शर्मा व्यास के बोलावल गइल. अइसन लागल जइसे सभे एही ताक में बइठल रहे. ताली के गड़गड़ाहट से जोरदार स्वागत भइल. माई के वंदना से कार्यक्रम के शुरूआत भइल –
‘नीमिया के डाढ़ मईया डालेली आसनवा,
कि झूली-झूली ना.
मईया झूलेली झूलनवा,
कि झूली-झूली ना ..’

‘दिल्ली बम्बे कलकता, चाहे रहीह मंसुरी में .
पढ़ीह लिखीह कवनो भाषा, बतिअइह भोजपुरी में ..
एक से बढ़ के एक भोजपुरी के मीठ रसदार भाव में लोग गोता लगावे लागल. सभे के मन में बहार के फुहार झमझमाए लागल. ओह घड़ी त सभे अपना आप के भुला देलस जवन गाना के लोग बार-बार सुनल चाहेला –
‘गोरिया चान के अंजोरिया, नियन गोर बाडू हो.
तेहार जोड़ केहू नइखे, बेजोड़ बाडू हो..’

नलिनी झा दुबारा मंच पे अइली अपना आवाज के जादू बिखेरे खातिर. नृत्यांगना के साथे बहुत नीमन गायिको हईं. विद्यापति के रचना इनका रोम-रोम में बसल बा. बिरह आ नचारी गा के समारोह में मैथिली के सुगंध बिखेर दिहलीं.
‘गउरा तोर अंगना,
बर अजगुत दिखल तोर अंगना.
संगीत के नदी में डूबत-उतरात लोगन के थपरी कबहीं ना रूकल.

पहिलका दिन के उद्घाटन दिल्ली सरकार के भाषा, समाज-कल्याण एवं महिला बाल विकास मंत्री डा॰ किरण वालिया दीया जरा के कइलीं मुख्य अतिथि रहनी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डा॰ ए॰ के॰ वालिया. दोसरका दिन के उद्घाटन डा॰ ए॰ के॰ वालिया का हाथे दीया जरा के भइल. अकादमी के उपाध्यक्ष अजित दूबे स्वागत भाषण दिहनी – ‘भोजपुरी लगभग एक हजार साल पुरान भाषा हउए. लगभग बीस करोड लोग सोलह देश में भोजपुरी बोलेला. दिल्ली देश के दुसरकी राज्य ह जहंवा मैथिली-भोजपुरी अकादमी के गठन भइल बा.

अकादमी के सचिव राजेश सचदेवा आ वीर बहादुर के मंच संचालन बहुते नीमन रहल. अंत में स्वास्थ्य मंत्री सभे के ध्न्यवाद दिहलन आ आभार व्यक्त कइलन. कुल मिलाके समारोह बहुते सफल रहल.

Advertisements