कल्पना व्यस्त बाड़ी भिखारी ठाकुर पर बनत अलबम में

भोजपुरी के मशहूर गायिका कल्पना आजु काल्हु भोजपुरी के शेक्सपियर कहाये वाला पद्मश्री भिखारी ठाकुर पर बनत वर्ल्ड म्यूजिक का अलबम खातिर व्यस्त बाड़ी.

कल्पना आ विवाद के साथ हमेशा ननद भउजाई जइसन रहल बा. प्रेम आ ईर्ष्या दुनु के प्रतीक बाड़ी कल्पना. शुरुआते में फिल्म “गवनवा ले जा राजा जी” के गीत “एगो चुम्मा ले लऽ राजाजी” लोकप्रियता के शिखर छु लिहलसि आ साथही शुरु हो गइल कल्पना के भर्त्सना के खेल. कहल गइल कि हमनी के बहू बेटी कबो अइसना तरीका से आपन भाव सामने ना ले आ सके जबकि ओह गीत के आनन्द पूरा हिन्दुस्तान लेत रहुवे. संगीत के दुनिया के कुछ लोग के लागल कि दोसरा भाषा, दोसरा प्रान्त से आ के एगो गायिका भोजपुरी के कोकिला कइसे बन जाई ? हमनी का बने देब जा, तब नू. कल्पना के पुतला जरावल गइल. हर तरह से ओकर आलोचना कइल गइल. बाकिर सब कुछ तथ्य का आधार पर ना हो के अपना अपना विचार का मुताबिक.

बाकिर कल्पना के राह थामे के ताकत कवनो विरोध में ना रहे. बहुते कम कलाकार में ई जोश रहेला जे समय के धार बदल देव. एकरा खातिर अपना पर भरोसा होखल चाहीं. परम्परा के ज्ञान का साथे कुछ नया करे के ललक होखे के चाहीं. आजु भोजपुरी कल्पना के अतना दे चुकल बिया कि ऊ एकरा से अलग होखे के सोचियो ना सकस. जब लोग के मालूम होला कि कल्पना बिहार भा यूपी के ना हो के आसाम के हई त बेसाख्ता मुँह से निकल जाले ओह डा॰ भूपेन हजारिका ! “गंगा बहती हो क्यों” वाला. आ ई सुन के कल्पना के मन अउरी उछाह मारे लागेला. काहे कि ऊ अपना बचपने से भूपेन हजारिका के आपन आदर्श मनले आवत बाड़ी. आ अब उनका नाम का साथे आपन नाम सुन के कल्पना के आपन जिम्मेदारी बहुते बड़हन लागे लागेला.

कल्पना के कहना बा कि आजु देश के बहुते गायक गायिका उनके तरह गावल चाहेलें, उनके तरीका से गावल करेलें, देवी गीत, छठ गीत, फगुआ, आ इहाँ तक कि गरमागरम फिल्मी गीतो. आ एह सब से कल्पना के आपन जिम्मेदारी बुझाला कि असली भोजपुरी संगीत के दुनिया का सोझा ले आवसु, भोजपुरी संगीत के जड़ ले चहुँपस, आ संगीत का दुनिया में भोजपुरी संगीत के पहिचान अउरी मजगर बना सकस.

उनकर कहना बा कि आजु जब हमनी का भोजपुरी संगीत के बात करेनी जा त पहिले त ई जानल जरुरी बा कि कवना भोजपुरी के ? आरा, छपरा, आ बलिया. एह तीन जिलन के भोजपुरिए मानक भोजपुरी हऽ. अलग बाति बा कि आजु अवधी, काशिका (बनारस वाली भोजपुरी), मगही, अंगिका, इहाँ तक कि मैथिलिओ के भोजपुरी संगीत में समेटे के कोशिश हो रहल बा.
दोसरे, भोजपुरी संगीत के ओकरा ठेठ गँवई रुप में जानल पहिचानल जरुरी बा जवना से कि ओकरा के दुनिया का सोझा परोसल जा सके.

कल्पना के एह दुनु सवाल के जवाब भिखारी ठाकुर में मिलेला. बाकिर भिखारी ठाकुर के हऽ ? आ आजु ऊ कहवाँ बाड़न ?
बिहार के जनता का बीच आ भोजपुरी प्रेमियन का बीच भिखारी ठाकुर कवनो परिचय के मोहताज नइखन. बाकिर संस्कृति के मुख्य धारा कहाये वाला लोग हमेशा भिखारी ठाकुर का नाम पर चुप्पी साध लेला. उनका योगदान के चरचा करे से बाचल चाहेला. बस उनका के भोजपुरी के शेक्सपियर कहि के अपना कर्तव्य के इतिश्री मान लेबेला. कुछ लोग आ संगठन जरुर भिखारी ठाकुर के कृति के सही जगहा देबे में लागल बा बाकिर भिखारी ठाकुर के कृतियन के कवनो अधिकृत दस्तावेज खोजल मुश्किल होला. एह माहौल में कल्पना के लागल कि एह महान कलाकार खातिर कुछ कइला के जरुरत बा.

पिछला तीन साल से ऊ भिखारी ठाकुर का बारे में शोध करत बाड़ी. एह खातिर ऊ बिहार के भितरी दुर्गम गाँवन में जा जा के सामग्री बिटोरली. एक बेर संजोग से आरा के बखौरापुर में एगो कार्यक्रम का दौरान उनकर भेंट एगो बहुते बूढ़ कलाकार से भइल. ओह कलाकार का आवाज में जवन ठेठ भोजपुरी अन्दाज मिलल ओकरा के सुन के कल्पना ठकुआ गइली. पता लगवली त मालूम भइल कि ऊ भिखारी ठाकुर का मण्डली में शामिल रहलें.

कल्पना के कहना बा कि भोजपुरी संगीत आ गीत गवनई खातिर बिहार में पर्याप्त शोध नइखे भइल. हर जगहा यूपी वाले हावी हो गइलें. इहाँ तक कि फिल्म जगतो में यूपी के बोलबाला बा. कल्पना बहुते कलाकारन से बिदेसिया सुन चुकल बाड़ी बाकिर उनका हमेशा ई चमकावल लागल, ठेठ ना. ओह बूढ़ गायक में बिदेसिया के ठेठ रुप मिलल उनका. से ऊ एक बेर फेर बखोरापुर गइली आ ओह गायक के अपना खातिर एक फेर से गववली आ सबकुछ रिकार्ड करवली.

कल्पना बतावत बाड़ी कि भिखारी ठाकुर का बारे में शोध करे में उनका बिहार राष्ट्रभाषा परिषद से प्रकाशित ” भिखारी रचनावलि” से बहुते सहारा मिलल. बाकिर भिखारी ठाकुर के ठेठ ठेका, लय ताल, ओह गायक का गायकी में मिलल कल्पना के. भिखारी ठाकुर के गीत गवनई आजु कल्पना के पैशन बनि गइल बा. आ एह दिशाईं काम कर के ऊ अभिभूत बाड़ी.


(स्रोत कल्पना के ब्लॉग)

8 Comments

  1. A personal fight on a personal mail ko samajik banane ki koshish mat kijiye.aaplog media se jure hai.thoda responsible baniye.bhai yeh public hai bhai public..sab jaanti hai aur samajhti hai.

  2. Taali ek haath se nahi baj sakti.pratikriya dekha kalpnaji ka.lekin kriya kya tha.bollywood me bhi dekhaya jata hai salman khan ne gali dia,maarpit ki.lekin ye kabhi nahi dikhaya gaya ki unko gussa dilaya kisne.ye log pagal to nahi ho sakta hum ye nahi maan sakte ki kalpna ab jis unchai pe hai, jo ab akshay kumar, katrina kaif aur aur shahrukh khan ke filmo me saath deti hai, unko publicity chahiye.

  3. पंकज जी के टिप्पणी आ गुस्सा जायज बा | हम कल्पना जी के ब्लॉग नइखी पढ़ले आ नू उहाँके लेटेस्ट अल्बनन के जानकारी राखींले , जवन सुना गइल , सुन लिहल आदमी | हम अँजोरिया में छपल आलेख के एगो अंश मात्र पर टिप्पणी देले बानी आ एह बात के पूरा गुंजाइश भी छोड़ले बानी कि भोजपुरी संगीत आ संस्कृति के प्रहरी सजग रहसु | “हमरा एह बक्तव्य के माने बिलकुल ई मत लीहल जाउ कि कल्पना जी के कार्य पर भोजपुरी संगीत आ संस्कृति के प्रहरी अब मौन हो जासु , नजर त कवनो कीमत पर बनले रहेके चाहीं | अपना हित आ अहित के ध्यान राखल बहुत जरूरी हो गइल बा एह दौर में |”

    हमरा बहुत खुशी भइल कि पंकज जी के अइसन तल्ख टिप्पणी आइल | जे भी भोजपुरी के आपन माई मानी ओकर आवाज अइसने हो जाई आ ना होई त नीक भी ना होई | “ए राजा कहऽ त हम चढ़ी जाई” – ई जब अल्बम के टाइटिल बा त भगवाने जनिहें कि भीतर कइसन गाना होई | हमरा बहुत खुशी बा कि वर्तमान पीढ़ी बहुत सजग आ जागरूक भी बिया | अब अइसन लागता कि भोजपुरी के लूगा लूटेवाला लोगन के दिन ढलान प बा , हालाकि बाजार में गइला का बाद अइसन लागत नइखे | तबो मन बिश्वास करे के कहऽता | अश्लीलता के खिलाफ जंग छिड़ल रहे के चाहीं,एही में हमनी के हित बा | पंकज जी आ इहाँका साथे जे भी समुदाय होखे , हम सभके एह नेक काम खातिर बधाई देतानी |
    मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
    हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए | (दुष्यंत कुमार)

    जहाँ तक भरत जी के अपमान के बात बा , ओह घरी नेट का क्षेत्र में हमार नया-नया परिचय अँजोरिया से भइल रहे | हम तत्काल फोन पर ओ पी सिंह जी से बात कइके आपन मन शांत कइले रहीं | हम जानतानी हमी का , हमरा नियन ढ़ेर लोग होई जे भरत जी खातिर बहुत सम्मान आ प्रेम राखत होई , आ ओह सभके ओतने पीड़ा भइल होई | पीड़ा के इजहार करेके तरीका अलग-अलग हो सकऽता | केहू बोलके,केहू लिखिके,केहू…………|

    संक्षेप में , हम अतने कहल चाहबि कि खाली दिले से ना दिमागो से सोचल जरूरी बा , ताकि भोजपुरी के उत्थान में कवनो चूक मत रहि जाउ | जे भोजपुरी के हित पहुँचावे ओकर प्रशंसा आ अनहित करेवाला के निंदा जरूर कइल जाएके चाहीं |
    रामरक्षा मिश्र विमल

  4. आपके प्रणाम ,रऊवा कमेँट मे लिखल बा की रऊवाँ एगो गायक और गितकार हई ,राऊर उज्जवल भविष्य खातिर हम भगवान से दुआ करब

    एगो बात बताईँ का भोजपुरी गाना मे अश्लिलता होखे के चाहीँ ,ई बात हम संपादक महोदय आऊर अन्य टिप्पणीकारन से भी पुछल चाहत बानी ,का भोजपुरी के अपना मतलब खातिर इस्तेमाल करे के चाहीँ ,जवन की कल्पना कर रहल बाङी ।

    हमार टिप्पणी पहिलका कमेँट (डा॰रामरक्षा मिश्र विमल के) के रिप्लाई मे बा ।

    • भाई मुकेश जी
      प्रणाम आ धन्यवाद |
      अभी अभी आपन टिप्पणी दिहलीं हा | ओकरा बाद राउर टिप्पणी पढ़ेके मिलल हा | हमरा विश्वास बा कि ओकरा में रउँवा हमार जबाब जरूर पा लेब | भाई जी,”अश्लीलता” केकर पसंदीदा विषय हो सकऽता ? शत-प्रतिशत आदमी एकर बिरोध करी | भोजपुरी गाना में आ रहल अश्लीलता के पुरजोर बिरोध होखे के चाहीं | इस्तेमाल ? बिलकुल ना | भोजपुरी संस्कृति के गलत इस्तेमाल के बिलकुल इजाजत नइखे दिहल जा सकत , चाहे ऊ कतनो बऽड़ आदमी होखो | संवाद करे खातिर हम आभार प्रकट कइल चाहबि | धन्यवाद |
      राउर आपने
      रामरक्षा मिश्र विमल

  5. सिर्फ एक सवाल ” आज ले इहा के भोजपुरी बहुत कुछ देहलस लेकिन इहा के भोजपुरी खातिर का कइले बानी”? जे लिखात बा की “संगीत के दुनिया के कुछ लोग के लागल कि दोसरा भाषा, दोसरा प्रान्त से आ के एगो गायिका भोजपुरी के कोकिला कइसे बन जाई ? हमनी का बने देब जा, तब नू. कल्पना के पुतला जरावल गइल. हर तरह से ओकर आलोचना कइल गइल. बाकिर सब कुछ तथ्य का आधार पर ना हो के अपना अपना विचार का मुताबिक”

    एह बात से त सिर्फ एक ही चीज साबित होत बा की “भोजपुरी में अश्लीलता और असंस्कारी चीजन के बिरोध करे वाला लोग भोजपुरिया लोग बेवकूफ बा और और सिर्फ इहा के ही महान बानी..इहा के आगे भरत शर्मा ,मालिनी अवस्थी जैसन लोगन के औकात कहा बा जे इहा जैसन हस्ती के कौनो गलत शब्द पर बिरोध जाता सके .अब भोजपुरी के रानी से भला पंगा लेबे के साहस केकरा बा.. अपना सच्चाई के एतने साहस रहे त ओह समय मुह कहे बंद रहे ? आ ओही समय सुर संग्राम से बहर के रास्ता काहे देखावल गइल ?

    जहा तक बात भिखारी ठाकुर के बा त इ सब सिर्फ “सात मुस खाई के बिलार भइली भक्तिन वाला बात बा” जे भोजपुरी में इहा के गिरत लोकप्रियता के सुधारे खातिर पब्लिक सिटी खातिर समाचार बा काहे की एकरा से पाहिले भी गंगा जी पर कुछ अभियान चलल रहे जेकरा आज ले कुछ अता पता नइखे..इहा के जौन लेटेस्ट एल्बम भोजपुरी के बा ओकर नाम बा “ए राजा कहs त हम चढ़ी जाई”

    हम स्पष्ट कइल चाहब की हमार बिरोध कल्पना से व्यक्तिगत नइखे लेकिन इहा के पास भगवान के दिहल सबसे ख़ूबसूरत आवाज के भोजपुरी में गलत इस्तेमाल के बा..

    हम निहोरा कैल चाहब अंजोरिया के सम्पादक जी से की लोग भोजपुरी वेबसाइट पर भोजपुरी खातिर दिल से आवेला दिमाग से ना एह से भोजपुरी में कुछ भी प्रकाशित करे से पाहिले एक बार बिचार कर ली आ एह जगह के फ्री में कोई के प्रसनल प्रोमोशन के अड्डा मति बने दी.. ना त काल जब भोजपुरियन के नवका पीढ़ी हिसाब मांगी त रउवा जबाब का देहब

    -पंकज प्रवीण

  6. कल्पना जी के भिखारी ठाकुर जी से संबंधित काम/शोध के प्रशंसा कइल जाए के चाहीं | उहाँके अब कवनो क्षेत्र से जोड़ के देखल ठीक ना होई | उहाँ में भोजपुरी लोकधुन के सुरक्षा के भरोसामंद काबिलियत बा , हम ई मानतानी | ओइसे भी ई पुनीत कार्य केतना भोजपुरिया कलाकार कर रहल बाड़े ? कुछ लोग शुरू में आइल आ हिट हो गइल काहेंकि रास्ता साफ रहे जवने गावल ऊ मील के पत्थर हो गइल | ओहू घरी एक से बढ़िके एक कलाकार रहन बाकिर ओह लो’ के मोका ना मिल पावल , गाँवे में रहि गइलन लोग | ऊ हिट कलाकार आजु ट्रैक से आउट बाड़न आ आजु के श्रोता जेकरा के सुनल चाहतारन , ओकरा भोजपुरी लोकधुन के रक्षा से कवनो लेना-देना नइखे , कवनो प्रकार से युवा भोजपुरिहा मन के सहलाके मार्केट में बनल रहल ओह लोगन के लक्ष्य बा | अइसे में कल्पना जी के स्वागत होखेके चाहीं आ सहयोग कइल जाए के चाहीं ,एहीमें भोजपुरी संगीत के कल्याण बा |

    हमरा एह बक्तव्य के माने बिलकुल ई मत लीहल जाउ कि कल्पना जी के कार्य पर भोजपुरी संगीत आ संस्कृति के प्रहरी अब मौन हो जासु , नजर त कवनो कीमत पर बनले रहेके चाहीं | अपना हित आ अहित के ध्यान राखल बहुत जरूरी हो गइल बा एह दौर में | जय भोजपुरी | कल्पना जी के एह ऐतिहासिक काम खातिर हम बधाई दिहल चाहतानी |

    रामरक्षा मिश्र विमल
    (भोजपुरी गायक आ गीतकार)

Comments are closed.