भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गायक भरत शर्मा “व्यास” खातिर पद्मश्री अलंकरण के हम शुरुएसे आग्रही हईं। श्री शर्मा के व्यापक पैमाना पर ख्याति मिलेके आरंभिक वर्ष हटे 1989 के आरंभ। आर सीरीज, मऊ का बाद टी सीरीज के सङही रामा आ मैक्सो के कैसेट बाजार में धूम मचावे लगलन स। तब श्री शर्मा के लोकप्रियता के ध्यान में राखिके हम ओह घरी  ‘धर्मयुग’ से बात कइले रहीं आ संपादक का अनुमति आउर आग्रह पर उहाँके एक लंबा इंटरव्यू लेले रहीं, बाकिर दुर्भाग्यवश ‘धर्मयुग’ बंद हो गइल। तब हम 1993 में अपने पत्रिका ‘संसृति’ के अंक-4 (एह अंक के ओह घरी बोकारो थर्मल के हिंदी साहित्य परिषद के स्मारिका बने के सौभाग्य मिलल बा।) में उहाँके संगीत साधना का सङही गायनो सामग्री पर आपन एगो लेख प्रकाशित कइलीं। एहमें हम सरकार से भरत शर्मा “व्यास” के पद्मश्री से अलंकृत करेके माङ कइले रहीं।
– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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