भोजपुरिया दर्शकन के लोकप्रिय रियलिटी शो सुर संग्राम २ में आजु के शनिचर के थीम अपना लोगन के समर्पित रही. एह बाति पर सभकर ध्यान दिआवल जाई कि कइसे आजु का भागमभाग जिनिगी में अपने लोग पाछा छूटल जात बा आ ओह लोग खातिर समय नइखे बाचत. शो के शुरुआत एंकर मनोज तिवारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्म दिन पर उनका के श्रद्धांजलि से शुरु करीहें.

आजु के एपिसोड के खास मेहमान रहीहें मशहूर गायक रूप कुमार राठौर जे महुआ के दर्शक श्रोता लोगन खातिर “ए जाते हुये लमहो जरा ठहरो जरा ठहरो” गा के सभका के विभोर कर दीहें. ओकरा बाद यूपी आ बिहार के सुर-वीर अपना अपना परिवार के याद करत गाना गइहें जा. बिहार के ममता कुमारी के “पालपोस के हमके सयान कइलू हे माई” का माध्यम से अपना महतारी आ बड़ बहिन के याद करीहें त रुप कुमार राठौर अपना जिनिगी के अनछुआ पहलूअन के दर्शकन संगे बटीहें.

जज मालिनी अवस्थी तब एगो मनमोहक प्रस्तुति दीहें आ कहीहें कि सुरसंग्राम २ एह मिथक के तूड़ दीहि कि लड़की रियलिटी शो ना जीत सकऽ सँ. यूपी के शुभा मिश्रा अपना गुरुजनन के याद में “ॐ गुरुवे नमः” गाना सुनइहें त बिहार के जाहिद आजु का स्वार्थी समाज पर गाना सुनइहें कि “हित परित हिताई ना साथ छोड़ देला, जब समय होला कमजोर त सब कोई साथ छोड़ देला”. एह प्रस्तुति का बाद नेपाल से आइल कुछ पर्यटक बतइहें कि नेपालो में सुर संग्राम २ कतना लोकप्रिय हो गइल बा आ पूरा भोजपुरिया समाज के नेपाल का ओर से बधाई दीहें. यूपी के मनोज तब “माई मक्का, माई मदीना, माई मथुरा, माई काशी” के धमाकेदार प्रस्तुति दीहें. एह गाना का बाद मनोज तिवारी पूरा दुनिया का सोझा सकरीहें कि कइसे ऊ सभका के खुश राखे का फेर में अपना महतारी के भुला दिहलन जवना के सजा उनका मिल चुकल बा. कल्पना से जब उनका अपना का बारे में पुछीहें त कल्पना बतइहें कि प्लीज, मैं इस बात पर खुद को रोक नहीं पाउगीं.

यूपी के रघुवीर अपना माई के दुलार याद करत एगो बहुते भावुक प्रस्तुति दीहें त बिहार के जीतेन्द्र अपना दादा दादी का याद में. बिहार के खुशबू “बेटा बेटा कह के दुलार कइलू” गीत सुना के सभका के गमगीन करा दीहें. आखिर में रूप कुमार राठौर कहीहें कि “अब नींद बच्चों को सुहानी नहीं आती, क्योंकि माँ को भी परियों की कहानी नहीं आती.”

शो से एलिमिनेट भइल उमेश कुमार के दिहल वचन पूरा करत मनोज तिवारी उनका के एक लाख के चेक दीहें. शो के समापन रूप कुमार राठौर के गावल गीत “संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं” सुना के करीहें.


(स्रोत : प्रशान्त निशान्त)

Advertisements