– ओमप्रकाश अमृतांशु

omprakash amritanshu
omprakash amritanshu

लह-लह लहसेला नीमिया के गछिया,
शीतल बहेला बेयार, ताहि तर मईया करेली सिंगार.

सोनरा के बिटिया झूमका ले आइल,
ले अइली गरवा के हार,
अद्भूत रूपवा चमकेला चम-चम,
टिका शोभेला लिलार, ताहि तर मईया करेली सिंगार.

मालिनी बिटिया गजरा ले अइली,
करेली वीनती गोहार,
ओढ़उल फूलवा से डलिया सजवली,
ये माई करीं स्वीकार, ताहि तर मईया करेली सिंगार.

लली चूनरिया बाजाजवा ले आइल,
जेकर सोनहुला किनार,
लाले चुड़ी लाले-लाले लहठिया,
चुड़िहारवा लेके भइले खाढ़, ताहि तर मईया करेली सिंगार .

भैरव के दिदिया सुनेली अरजिया,
भरेली सबके भंडार,
चमके तिरशुल जब-जब तरूअरिया,
दुष्टन के होला संहार, ताहि तर मईया करेली सिंगार

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