– आलोक पुराणिक

हाय हाय का चर्चा निकल पड़ल बा कि दिल्ली से आटो वाला हटावल जइहें.

दिल्ली के अगर आटो वालन से अलगा कर के देखीं, त दिल्ली बहुतही चिरकुट टाइप के शहर ह. ई शहर कतना चंट आ बदमाश ह, एकर पता दिल्ली आवते लाग जाला, आटो वालन से डील करके. एगो मेहमान आटो वालन क हाथें कटइला का बाद कमेंट करत रहलें, एह शहर के आटो वालन के जब ई हाल बा त नेता जाने का होंखीहें. जब रात हो इतनी मतवाली, तो सुबह का आलम क्या होगा टाइप कमेंट के पीछे आटो वालन के तारीफ रहुवे कि कुछ अउर, से ऊ साफ ना कहलें.

आटो वालन क बगैर दिल्ली कुछ यूं होखी जइसे बिना पंख के मोर, बे कूड़ा जे नाली, भा बिना तम्बाकू के सिगरेट. जइसे बिना तोंद के इंसपेक्टर, बिना कविता के कवि वगैरह. नंगई कइला बिना राखी सावंत होखस भा माला पहिरला बिना मायावतीजी. मुशर्रफ आ बुश एकदम साँच बोलत होखस आ क्लिंटन अपना के एकदमे चरित्रवान बतावत होखस.

दिल्ली आटो वालना का बगैर कुछ अइसने लागी जइसे नादिरशाह बगैर लूटपाट कइले चुपैचाप सरकत होखे. बलुक एह खाकसार के त ई मानल बा कि ई आटो वाला अगर पहिले दिल्ली में होखतें, त दिल्ली कई बेर बरबाद होखे से बाँच गइल रहित. नादिरशाह आके दिल्ली वालन से लूटपाट करीत, त लोग से जवाब मिलित कि आटो वाला त पहिलहीं लूट ले गइल बाड़न सँ, अब बाँचल का बा लूटे खातिर? सॉरी. पानीपत के तीसरका लड़ाई में पानीपत में आटो वालन के भेज दिहल जाइत त नादिरशाह के सैनिक आटो में चले के रेटे सुनके बेहोश हो जइतें. नादिरशाह के तमाम सैनिक नादिरशाह से कहतें कि, महाराज चलऽ वापिस लवटि ल, कवनो फायदा नइखे. दिल्ली में लाल किले से नेहरु प्लेस जाए के ऊ आटो वाला एक हजार अशर्फी मांग रहल बा. अतना रकम त अफगानिस्तान से दिल्ली आवहू में खर्च ना भइल जतना लाल किले से नेहरु प्लेस जाए में खर्च हो जाई. का करेम सँ अतना लूटपाट मचा के? हमनी का लगे त ओतनो रकम ना बाँची जतना में दरियागंज से कुतुबमीनार आटो से जाए के इंतजाम हो जाव.

आटोवाला भारत का भूगोल में पहिले भइल रहतें त भारत के इतिहास कुछ दोससरे होखित.

एहसे हम दिल्ली से आटोवालन के हटवल का सख्त खिलाफ बानी. आटो वाला का साथ डील कइके चरित्र में कई गुणन के विकास होला. पेशेंस का होला, धीरज का होला, ई सब समुझ में आ जाला आटोवालन से बतिया के.

मान लीं, रउरा आईटीओ से कनाट प्लेस जाए खातिर आटो वाला से बतियावत बानी, त बातचीत कुछ अइसन हो सकेला –

ऐ भईया, कनाट प्लेस चलबऽ का?

ना. हमरा त नेहरु प्लेस जाए के बा.

जहां रउरा जाये के होला औहिजा आटो वाला के ना जाये के होला. रउरे ओह जगहा चल जाईं जहवाँ आटो वाला जा रहल बा. ई गुण जेकरा में विकसित होखेला ओकरा में धीरज के भाव अपने आप पनपे लागेला.

रउरा जब नेहरु प्लेस जाए के तइयार हो जाएब त आटो वाला बताई कि एहिजा से नेहरु प्लेस के आठ सौ रुपया लागी.

भईया ई मीटर काहे खातिर बा?

एकरा जवाब में आटो वाला हंसे लागी कि, चिरकुट अतनो तक नइखे जानत कि ई आधुनिक कला के एगो नमूना भर ह. एकर बस अतने इस्तेमाल होखेला कि एकरा के देखल जाव, ई का ह, आ काहे खातिर बा से ना पुछल जाव.आटो वालन से लगातार डील करके हर बंदा अपना भीतर एगो सौंदर्य दृष्टि, कला दृष्टि विकसित कर सकेला.

जी रउरा से आईटीओ से नेहरु प्लेस जाए के आठ सौ लिहलसि, रउरा त सस्ते में निबट गइनीं. हमरा से त डेढ़ हजार रुपिया ले लिहले रहुवे.

रउरा जेब से सिर्फ आठ सौ कटल बा, दोसरा लोगन के एहसे बहुते बेसी ई जानके कतना तसल्ली मिलेला आ मनई अपना के बहुते स्मार्ट टाइप माने लागेला. अब बताईं, जेकरा चलते रउरा स्मार्ट फील करे लागीं, सौंदर्य दृष्टि विकसित करे लागीं ओकरे के शहर से निकाल दिहल जाव? ना भईया ना. आटो वाला भाई लोग संघर्ष करऽ, हम तोहनी लोगन का साथ बानी.


आलोक पुराणिक जी के पुरनका अगड़म बगड़म


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

संपर्क 09810018799
email : puranika@gmail.com


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