भउजी हो!

का बबुआ ?

ओह पट्टी के लोग बहुते परेशानी में पड़ गइल बा.

काहे बबुआ?

एक त अपना जीजा से परेशान रहबे कइल लोग तबले ममहरो से बवाल चहुँप गइल. केहू का मुँह से बकार नइखे फूटत.

काहे फूटी ? ओह लोग के त खुश होखे के चाहीं कि सगरी गाँव एक तरफ आ ओह लोग के जीजा आ ममहर के लोग एक तरफ. केहू का बिगाड़ ली एह लोगन के? जतना मन करे गलत काम कर सकेला लोग. आखिर मलकिनी के दामाद भा नइहर के लोग के अतना आजादी त मिलही के चाहीं.

बाकिर भउजी, सगरी खुदाई पर भारी होला जोरू के भाई, से त सुनले रहीं बाकिर ममहरो के लोग अतना पावरफुल होला से ना जनले रहीं.

अरे बबुआ, जबले घर में पतोह नइखे आवत तबले ससुईए के नइहर के चली, हँसऽ भा रोवऽ.

का भउजी! फगुआ का मौका पर अतना गोबर माटी होखे लागी से ना मालूम रहे.

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