कह देब हो राजा रात वाली बतिया

भोला बाबू ओह दिन एगो बारात में शामिल रहलन. महफिल जमल त केहू नाचे वाली के इशारा कर दिहल आ ऊ नाचे वाली आके भोला बाबू के सामने बइठ गइल आ आपन गाना चालू रखलसि. गाना के बोल रहे, “कह देब हो राजा रात वाली बतिया”. भोला बाबू सकपका गइलें. पाकिट में हाथ में डललें आ एगो दस के नोट ओकरा के थमा दिहलें. नाचे वाली के लागल कि इनका गाना बहुते पसन्द आइल बा त ऊ बेर बेर उहे लाइल दोहरावत आ के भोला बाबू के लगे बइठ जाव. भोला बाबू धीरे से ओकरा के नोट थमा देसु. बाकिर एह अन्तहीन क्रम से उहो उजबुजा गइलें आ आखिर में खिसिया के कह दिहलन, “जो ससुरी कह दे. इहे नू कहबे कि पाखाना पर गिरल अमरूद उठा के खइलें रहीं.”

असल बाति रहे कि पिछला रात के जब भोला बाबू बगइचा का तरफ दिशा मैदान खातिर गइल रहलें त बगइचा में देखलें कि एगो अमरूद गिरल बा. देख के मन ललचा गइल रहे आ ऊ ओह अमरूद के उठा के धो धा के खा लिहलें. उनका लागत रहे कि कवनो तरह एह नाचवाली के ऊ बतिया मालूम हो गइल बा.

भोला बाबू ई कहानी सुनावत कहलें कि मुलायम आ अमर सिंह का मामिला में इहे हो रहल बुझात बा. अमर सिंह धमकावत बाड़े कि मुलायम आपन कवनो गलती याद कर के चुप्पी लगवले रहीहें आ अमर सिंह गरजत रहीहें. बाकिर सुने में आ रहल बा कि सपा खुला चुनौती दे दिहले बिया कि, जा जवन भेद खोले के बा खोलि दऽ.

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