– जयंती पांडेय

चौदह फरवरी सामने आ गइल बा. टेलीविजन पर ए घरी अभिये से “वेलेंटाइण डे” के ढेर परचार होखे लागल बा. केहू अपना वेलेंटाइन के हीरा के अँगूठी देबे के राय देता, त केहू सोना के हार, जेवर त केहू स्टाइलिस्ट घड़ी. केहू केहू त सुखले कागज पर लिखल चार गो लाइन भेजला के राय देता. कहे के माने ई कि जवनो चैनल रउआ खोलीं त थोड़ देर बाद रउआ अइसन कवनो ना कवनो परचार देखे के जरुरे मिल जाई. ओहिजे समाचार चैनल रउआ चालू करीं त दिल्ली, उत्तरप्रदेश अउर बिहार में लइकियन के संगे बलात्कार के अउर महाघोटालन के खबरन के बाद अगर कवनो खबर पर पत्रकार लोग जोर मरले बा त ऊ इहे वेलेंटाइन डे पर. एगो लस्टमाइने नाहीं, तमाम घर के मलिकाइन लोग ई चिन्ता में पड़ गइल बा कि आखिर ई बेलनटाइट डे ह का ? मुआ सब समाचार वाला इहे फेरा में पड़ल बाड़े सँ कि देश के नवका पीढ़ी आजादी से बेलनटाइट डे मना पाई कि नाहीं.

अब देखे वाला बात कि देश में दहेज खातिर मेहरारुवन के जलावे के पूरा आजादी बा. कमजोर लोग के लइकियन के संगे कब कहाँ का घट जाई, एके रोके वाला केहू नइखे. थाना, पुलिस, कोरट, कचहरी, अस्पताल, स्कूल, बाजार, संसद सब जगह लुटेरन के राज कायम बा. केहू ना कह सके कि ऊ लुटात नइखे. ए घरी देश में लूटे वाला हवा बेच के अरबो खरबो लूट लेता लोग. एगो राजा का, देश में अइसन सैकड़ौ राजा बाड़न, जिनकरा पाकेट के तलाशी लिहल जाई त ओहिमें हवा, रेल, हवाई जहाज, स्टेडियम, पुल का का ना दफन मिली. गान्ही बाबा सोचले रहलन कि देश के आजादी के असली माने इहे होई कि आजादी के लाभ सबसे निचला तबका के लोगन तक पहुँच जाये. बाकिर हाल ई बा कि ए घरी दलित के बेटी कहाये वाली के घर में भले साढ़े सात सौ हीरा अउर सोना के मुकुट होखे, करोड़न के बैंक बैलेन्स होखे, बाकिर उनुका राज में रोजे कहीं ना कहीं कवनो कमजोर के बेटी लुटा तारी.

असल में देश में ए घरी केहू के आजादी मिलल बा त ऊ मिलल बा कानून तूड़े वालन के. जे कानून के पालन करऽता, ओकरे पर तमाम बंदिश बा. जे तूड़ऽता, ऊ मजे से अपना मन के करऽता. अब इहे वेलेंटांइन डे के लीं. नवका पीढ़ी एकरा के प्रेम से मनावे के चाहऽता. ऊ त एकरा के रोजे मनावेला बाकिर एह दिन खासतौर पर ऊ लोग आपन बात कही, लेकिन धर्म के कुछ ठेकेदार लोग के ई बात तनिको नइखे भावत. ऊ लोग बरिसन से धमकी देला, कई बेर दुकान तूड़वा देला लोग. पार्क में बइठल लइका लइकियन के मुँह पर करिखा पोत देला लोग. काहें ना ! ई सब कइल त बहुते आसान बा न. अरे, करिखा पोते के बा त घोटालेबाजन के मुँह पर पोतऽ, बलात्कारियन के मुँह पर पोतऽ. बाकिर ऊ कइसे, ओहिजा तहरे त घाघ बड़ भाई बइठल बा लोग. धरम के ठेकेदार लोग धरम के रक्षा करे खातिर बड़ा बेचैन रहे ला लोग. कई बेर पोंछ लगा के बानर सेना के रुप धारण कइके, ऊ लोग अपराध के लंका जरा आ ढाह देला के कोशिश करे ला लोग. बाकिर एह मच्छरन के मरला से देश में रामराज कभियो ना आई. सही में रामराज ले आवे के बा त भ्रष्टाचार के गंगोतरी सुखावे के पड़ी. लेकिन एह काम में के आपन हाथ जारी ? बा केहू माई के लाल ?


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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