– जयंती पांडेय

हमरा देश में तरह – तरह के दंगल होला. कहीं लईकन के त कहीं साढ़न के आ कहीं पहलवानन के. लेकिन अबले केहु अनशन के दंगल ना सुनले होखी. लेकिन अपना देश में ई होला. एकर जे पैदाइश के पता लगावे केहु चली तऽ चलत – चलत पाई कि एकर ई देश में आविष्कार परम पूज्य बापू जी कईले. बापू जी माने महात्मा गांधी. आ जे कहल जाला टी वी के टी आर पी तऽ एकर टी आर पी बढ़वले बाबा अण्णा. माने गांधी बाबा के कल्की अवतार. ई टी आर पी के लालच तऽ जइसे उपवास- अनशन के दुनिया में बंड़ेरा ले अइलस. वइसे तऽ रामचेला हर दशहरा में नौ दिन के उपवास करेले. हमार संहतिया ठंडी मियां रोजा के दिनन में महीना भर उपवास राखेले आ ऊपर वाला के नाम पर ढेर अच्छा कामो करेले. अतने ना कई जैन भाई लोग लमहर लमहर उपवास करेला लेकिन कबो ऊ उपवासन के लेके दंगल ना होला जे बाबा के उपवास के ले के दंगल हो रहल बा आ जवन टी वी पर लउनऽता. फेर बाबा अण्णा अनशन कईले. एकरा पहिलहुं कइले रहले. ओकरा बाद देस भर में उपवास के दंगल शुरू हो गइल. बाबा हजारे उठले तऽ गांधी नगर में अपना देश के राजनीति के पहलवान नरेंद्र भाई बईठ गइले. मार टी वी पर उनही के चेहरा आ चर्चा. ई देख के हमरो मन में भइल कि अइसने कवनो दंगल में कोना में ढुकि के टी वी के सामने आपन चेहरा झलका दीतीं. आउर केहु चीन्ह पाइत कि ना लेकिन भगजोगनी के माई ईहो उमिर में चीन्ह लीत. बाबा हजारे फेर अनशन पर बइठ गइले. दिल्ली में फेर दंगल चालू हो गइल. कहीं दिग्गी भइया मेहनत बनावऽ तारे तऽ कहीं केजरीवाल भाई ताल ठोकऽ तारे तऽ कहीं किरण दीदी लोगन के शांति बनावे राखे खातिर कहऽ तारी. मैदान मदान में सब पार्टी के नेता लोग एकट्ठा भईल हऽ. एह में आपस में खूब बतकुच्चन भइल लेकिन मसाला बेसी ना भेंटाइल, काहे कि बुझाऽ ता कि अबकी दिल्ली में लोग उनका साथ थोड़े कम बा. नेताजी भ्रष्टाचार के ले के अतना तमाशा कऽ दिहले बाड़े कि लोग उबिया गइल. ओने सरकार के इयोर से बराबर रगरउल हो ता आ तरह तरह के बयान निकलऽ ता. कबहो किरण दीदी खिसिया जा तारी तऽ कबहु केजरीवाल पयजामा से बाहर हो जा तारे तऽ कबहुं बाबा अण्णा गरमा जा तारे. ई सब के जे असर वातावरण पर परऽ ता ओकरा से लाख चाहि के भी कवनो बेसी असर नईखे परऽ पावत. दंगल में पहिले जइसन रुपिया नईखे बिगात आ ना पहिले अइसन पूड़ी तरकारी बंटाता. चंदा के नाम पर जे सरकार अण्णा के हाथ दाग दिहलस आ अब जरला के जब इयाद परऽता तऽ ऊ चंदा लेहला से इंकार करऽ तारे. अब चंदा नइखे मिलत तऽ पूड़ी तरकारी कहां से चली. आ जब पूड़ी तरकारी नइखे चलत तऽ भीड़ कहंवा से आई. अबकी दंगल में ओतना मजा नईखे. लेकिन राम चेला गइल बाइ़े दंगल के मजा लेवे. अब लवट के अइहें तऽ बाकी बताएब.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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