हमनी के सबसे बड़ आदत ह चापलूसी

jayanti-pandey

– जयंती पांडेय

जाड़ के दिन रामचेला आ बाबा लस्टमानंद बइठल कौड़ा तापत रहले. बात चलल देश के हाल पर आ चलत-चलत चलि आइल हमनी भारत के लोग का शौक पर.

बाबा पूछले कि ‘जानऽ तारऽ, अपना देश के लोग के सबसे बड़हन शौख का ह ? केहु कुछ बतावल, केहु कुछ. बाबा कहले, “ई भारत देश में तहरा लोगन के ना रहे के चाहीं. अपना देश के लोग के सबसे प्रिय शौख ह चापलूसी चाहे चमचागीरी. जवन काम तहरा ना आवत होखो त ई चापलूसी के बदौलत ओहू काम के बड़का जानकार हो जइबऽ. हम अइसन ढेरे आदमी के जानेनी जे दुनिया के कवनो भाषा में दस लाइन सही ना लिख सके आ ऊ बड़का अखबार के सम्पादक हो के कवन ना कवन ईनाम पा लेहलस. चापलूसी ई देश के धर्मनिरपेक्षता ह. अगर केहू ना करवाये त पक्का जान ल कि करत होई. चापलूसी के पहिलका अक्षर होला ‘चा’, अब तूं कहबऽ ‘तऽ ?’ भाई चाशनीओ के पहिलका अक्षर होला ‘चा’. दूनो एके नाहिन लसलस. दू तार के चाशनी. चापलूसो दू तरह के होले सन. हां एगो ऊ जे खुदे लसलस बा. सबसे ज्यादा लसलसा लोग बाजार में रहेला. बाजार में एगो चाशनी के बड़का कड़ाह हमेशा चढ़ल रहेला. लेकिन बजार केहु के भाव ना देला ऊ बस भाव तय करेला. बजार ओही के सम्मान करेला जेकर भाव तय हो जाला. हँ त कहत रहनी कि चापलूस दू तरह के होले सन. पहिलका बजारू जेकर भाव बजार से तय होला. आ एगो होला देखा देखी के. रामबड़ाई करऽतारे त जोखन तिवारिओ करिहें. बजार में कुछ लोग जेकर चापलूसी करत लउकेला ओकरे चापलूसी में टूट परेला लोग. अब चाहे अम्बानी के होत होखो चाहे मोदी के. अइसन लोग आपन दिमाग ना लगावे, आपन मन ना टोए. आ बे दिमाग के काम करे वाला लोग के बुड़बक कहल जाला. अब ई बुड़बक शब्द कहां से आइल एकरा खातिर कबो टाईम मिली त आपन संघतिया डा. ओ. पी सिंह से एकरा बारे में बतियाएब. फिलहाल त चापलूसने से हरान बानी. हं त ई बुड़बक शब्दो बिना सोचले काम करे वाला खातिर छोट बा. एकरो से बड़हन शब्द के दरकार बा. लेकिन ऊ शब्द एहिजा लिखल ना जा सके.

बाजार के रणनीति एकदम पारदर्शी होला. ओकरा जेकरा में नाफा लउकेला ओकरा के पहिले लोकप्रिय बनावेला आ तब धीरे से ओकरा के महान बना देला. ई सब चापलूसी के माया ह लेकिन चापलूसी व्यापक रूप में तब कामयाब होई जब बजार से आवे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

Advertisements