पत्रकारिता के चोला भा बुरका

बिहार विधानसभा के चुनाव अबहीं टटका मुद्दा बा बाकिर घूमा फिरा के ई मुद्दा हमेशा बनल रहेला कि पत्रकार के राय कवना गोल के बा. कहे खातिर त सगरी पत्रकार हमेशा तटस्थता आ ईमानदारी के चोला भा बुरका पहिरले रहेलें बाकिर तनिका धियान दे दीं त ओह चोला भा बुरका का पाछा झलकत उनकर असली चेहरो लउक जाई. ईमानदारी के हाल त ई बा कि अधिकतर स्थानीय पत्रकारन के लोग ब्लैकमेलर जइसन बुझेला. हमेशा ओकरा से डेराइल सहमल रहेला कि पता ना कब कवन बात ऊ अपना मीडिया में केकरा खिलाफ लिख पड़ दी. एहसे ऊपर उठीं त देखब कि करीब करीब सगरी बड़का चैनल के एंकर मोदी भंजक लउकेलें. ओह लोग के हमेशा कोशिश रहेला कि कवनो बात, कवनो खबर के घुमा फिरा के मोदी का खिलाफ इस्तेमाल क लीहल जाव.

अब आगे बढ़े से पहिले हम रउरा सभ के बता दीहल जरूरी समुझत बानी कि हम बचपन से संघी हईं आ भाजपा से सहानुभूति राखीले. संघ के शाखा में गइला युग से अधिका हो गइल बाकिर संघ के विचार से निष्ठा जवन एक बेर बन गइल तवन आजु ले बनल बा. बाकिर का ई सगरी पत्रकारन ला जरूरी ना होखे के चाहीं कि ऊ खुलेआम बतावसु कि ऊ कवना राजनीतिक गोल के तरफदारी करेलें भा कवना गोल के सदस्य हउवें.

ढेर दिन ना भइल जब एगो मीडिया एंकर खुलेआम अपना प्रोग्राम में आआपा के समर्कथन कइल करसु आ बाद में बाकायदा ओकरा में शामिल हो गइलन. बाकिर जब ले उनुका के चैनल से निकाल बाहर ना कइल गइल तबले ऊ अपना के निष्पक्ष पत्रकारिता के झंडाबरदार बतावे से बाज ना आवत रहसु. नाम बतावल जरुरी नइखे बाकिर हम आशुतोष के बात करत बानी. अइसने एगो बहुते क्रांतिकारी पत्रकार आ चैनल एंकर हउवन पुण्य प्रसुन बाजपेयी जे लाख बेइज्जति भइला का बादो आजु ले आपन राजनीतिक विचारधारा के खुलासा नइखन कइले. अब अइसन पत्रकारन के एंकर कइल प्रोग्राम कतना ईमानदार होखी से सभे जानत बा.

केकर केकर लीहिं नाम, कमरी ओढ़ले सगरी गाँव. पिछला सरकार का बेरा ले मीडिया के लोग के हरामखोरी के भरपूर मौका मिलत रहुवे. सरकारी खरचा पर देश विदेश घूमे के मौको मिल जात रहुवे आ ऊ लोग आजु ले अपना मलकिनी के चरण वंदना करत चारण बनल बाड़ें. एह पत्रकारन के बेंवत नइखे जे ई राहुल गाँधी भा सोनिया गाँधी से सवाल कर सकसु. एक तरह से देखीं त लाख दुर्गुण होखला का बावजूद एह लोगन में स्वामिनभक्ति के गुण अतना बा कि कुकुरो लजा जइहें.

बिहार विधानसभा चुनाव का मौका पर फेरू एह बिकाऊ आ भाँड़ मीडिया के नौटंकी खुलेआम चालू बा बाकिर कवनो पत्रकार में अतना ईमानदारी नइखे जे ऊ पहिले बता देव कि ओकर सहानुभूति कवना गोल भा गठबन्हन से बा. हमरा समुझ से हर पत्रकार आ चैनल एंकर खातिर जरूरी होखे के चाहीं कि हर प्रोग्राम से पहिले ओकर राजनीतिक विचारधारा खुलेआम बता देसु. साथ ही इहो जरूरी होखे के चाहीं कि चैनल भा अखबार छोड़ला का बाद तीन बरीस ले एह लोग के कवनो सरकारी पद सकारे भा चुनाव लड़े के मौका मत दीहल जाव. जइसे न्यायपालिका के शुचिता बनावल राखे खातिर व्यवस्था कइल जाला वइसहीं पत्रकारिता के शुचिता बनवले राखे खातिर पत्रकारो लोग पर समुचित लगाम लगावे के व्यवस्था होखे के चाहीं.

– ओम प्रकाश सिंह

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