अकाल राहत के स्वागत में अफसर

by | Aug 26, 2012 | 1 comment

– जयंती पांडेय

बाबा लस्टमानंद जिला मुख्यालय गइले. उहां अजब माहौल रहे. चारू ओर खुसी से अफसरान अमला मातल रहे. पते ना चले कि का भइल बा. एगो परिचित से पूछले त पता चलल कि ई समय पर बरखा ना भइला के खुसी ह. अब सब बात उनका समझ में आ गइल. ऊ बूझि गइले कि इहवां काम ना होई आज. गांवे गइले त रामचेला पूछले कि का हो बाबा जवना काम खातिर कलक्टरी में गइल रहलऽ ऊ भईल ?

बाबा कहले, ना हो.

काहे, रामचेला सवचले.

बाबा कहले, का बताईं? पूरा कलक्टरी बरखा ना होला आ अकाल क्षेत्र घोषित होखे के उमेद में मस्त बा. सब लोग खुसी से सराबोर बा.

अइसन काहे, रामचेला पूछले.

बात ई ह कि तूं त ठहरलऽ एक दम देहाती भुच्च. अरे अकाल आवेला त अकाल राहत के करोड़ो रुपिया सम्बद्ध विभागन के मन में केतना ठंडा पहुंचावेला, ई तूं का जनबऽ. ई रहस्य ऊ विभाग के अफसरन आ उनकर चमचन से पूछऽ. अकाल सरकारी विभागन खातिर एगो दीया ह जे अपने त जरेला लेकिन दोसरा लोगन के जिनगी में अंजोर ले आ देला. राहत के भारी रकम कतना राहत देला ई तूं अकाल पीड़ित गिरहथन से जनि पूछ, ई बात तूं नेता लोगन, अफसर लोगन आ उनकर चमचन से सवाचऽ.

भाई रामचेला, जानि जा जे कि ई त सब उनका टीपन के फल ह. एह में हम चाहे तूं का कर सकेनी सन. अब बरखा ना भइल, धरती फाटि गइल आ फसल मरि गइल त एह में ऊ लोग के का दोस बा. ऊ त भाग कहऽ कि उनका सर्विस काल में एगो दूगो अकाल परि गइल आ बाढ़ि आ गइल ना त ऊ बेचारा लोग के जीवन त बे पइसे के, बिना कवनों बजट के कटत रहे. काल्हु ले जे लोग मंत्री से संतरी तक के घोटाला में मगज मारत रहे आज बुझाता कि उनका जीवन में बहार आ गइल. मंत्री लोग के घोटाला से ऊ लोग के जीवन में हीन भावना भर गइल रहे कि हम पूरा सर्विस कुछ ना कर पवनी आज अकाल के घोषणा भइला से संभावित घोटाला के कल्पना से उनकर मन हरिअर हो गइल बा. लोग कल्पना में डूबि गइल. कतना लोग के घर बन जाई आ बेटी के बियाह हो जाई. चुनाव पर घटत विस्वास आ भ्रष्टाचार के चिंता में अब ऊ अफसर लोग के परे के ना परी. उहो लोग के मौका मिल जाई. काल्हु ले जे एक किलो आलू कीने के हिम्मत ना करत रहे आज पूरा बजार कीने खातिर ताल ठोकऽता. अब राहत राजा के स्वागत में सब अफसर लोग लागल बा.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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1 Comment

  1. प्रभाकर पाण्डेय

    काल्हु ले जे एक किलो आलू कीने के हिम्मत ना करत रहे आज पूरा बजार कीने खातिर ताल ठोकऽता.

    बहुते सुन्नर व्यंग्य।। सादर।।

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