महुआ टीवी पर सोमार से बियफे रोज रात साढ़े सात बजे से देखावल जा रहल धारावाहिक भाग्य ना बाँचे कोई के नायिका अनुसुईया का जिनिगी में भूईंकम्प आ गइल बा. एगो अइसन भूईंकम्प जवन रुके के नाम नइखे लेत.

अबहीं पिछलके मंगल का दिने त ऊ शादी के बंधन में बन्हाइल रहे. सुसरारी चहुँपल त पति का सोझा आवते ओकर जिनिगी थरथरा उठत बा. सुहागरात का सेज पर ओकरा के देखते ओकर पति बाँके के ठकुआ मार देत बा. ओकरा पता चल जात बा कि ओकरा साथे धोखा भइल बा आ ओकर शादी वैशाली से ना हो के अनुसुईया से करा दिहल बा. एह धोखा से तमताइल ऊ अपना बाप के ओहिजे ले आवत बा आ सभका सोझा एह धोखा के खुलासा कर देत बा.

बाँके के बाबूजी हरिहर बाबू अनुसईया के घर से निकाल देबे के फैसला सुनावत बाड़न तबले बीच में बेनी बाबू आ जात बाड़े आ बहुते कहा सुनी का बाद ओकरा के निकाले के फैसला रद्द कर दिहल जात बा. बाँके कहत बा कि घर में त राख लेब सभे बाकिर हमरा दिल में एकरा कहियो पत्नी के दर्जा ना मिल पाई.

एह सब का बाद अनुसुईया के घर के एगो कालकोठरी जइसन भण्डार घर में रहे के कहल जात बा. ओकरा के बता दिहल जात बा कि भर जिनिगी अब एहीजे गुजारे के पड़ी. देखल जाव कि का ई भूईंकम्प कहियो थमत बा कि ना !


(स्रोत : प्रशान्त निशान्त)

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