चौराहा पर ठाढ़ भोजपुरी

– संजीला रामदौर

पिछला दिने मारीशस विश्वविद्यालय तीन दिन के एगो कार्यशाला आयोजित कइले रहुवे जवना में भोजपुरी आ अंगरेजी में पूरा शोध आ प्रमाण का साथे कई गो मनन करे लायक शोधपत्र पेश कइल गइल. कार्यशाला भोजपुरी आ एकरा धरोहर पर केन्द्रित रहुवे जवना में श्रोता आ शोध कर्ता लोग का बीचे जम के विचार मंथन भइल.

एह कार्यशाला से भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के संरक्षण आ विकास खातिर आ शोधकर्म प्रोत्साहित करे खातिर कई गो मूल्यवान निष्कर्ष निकलल जवना में सबले खास रहल नर्सरी कक्षा से खेल, नर्सरी राइम, लोकगीतन, आ बुझउवल से भोजपुरी के पेश कइल.

अबही मारीशस विश्वविद्यालय में भोजपुरी के पढ़ाई महात्मा गाँधी संस्थान का सहयोग से एगो वैकल्पिक माड्यूल का रुप में बीए में पढ़ावल जा रहल बा. कार्यशाला में बहुते जोर एह बात पर दिहल गइल कि अब भोजपुरी के मूल विषय के रुप में पढ़ावल जाय आ एकरा बदे पाठ्यपुस्तकन आ शब्दकोषन के रचना कइल जाव जवना से कि पढ़ावे वालन के सहयोग मिल सको.

पिछला दस साल से प्रोफेसर बासुदेव विसूनदयाल कॉलेज में पहिला से चउथा तक पढ़ावल जा रहल बा आ संस्था के मैनेजर रामनाथ जीता एह कोशिश में बाड़न कि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से एकरा के सेकण्डरी आ हायर सेकण्डरी स्तर पर पढ़ावे के अनुमति मिल जाव. सेकण्डरी स्कूल में अबही करीब एक हजार छात्र छात्रा भोजपुरी पढ़ रहल बाड़े. दोसरा तरफ इण्डियन डायस्पोरा सेण्टर का पहल पर करीब एक सौ अनौपचारिक संध्या विद्यालयन में भोजपुरी पढ़ावल जा रहल बा.

भोजपुरी के संरक्षण आ पसराव खातिर दसियो साल से लागल मारीशस भोजपुरी संस्थान के अमूल्य योगदान के भरपूर प्रशंसो एह कार्यशाला में कइल गइल. कहल गइल कि एह योगदान के सही तरीका से दर्ज करवला के जरुरत बा.

पत्रकार शोभानन्द सीपरसाद के सुझाव रहल कि एगो चारपेजी न्यूज लेटर भोजपुरी में निकालल जाव. डा॰सरिता बुद्धु कहली कि भोजपुरी से जुड़ल अकादमिक शोध पत्रिका निकालल जाव. इहो सुजाव सामने आइल कि बचवन लायक भोजपुरी गीत लिखल जाव आ एकरा खातिर प्रतियोगितो आयोजित कइल जा सकेला.

आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड के अध्यक्ष डा॰ विजया तिलक के सुझाव रहल कि जे भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के संरक्षण का दिसाईं आत्मा से समर्पित बाड़े ओह लोगन के वैज्ञानिक समर्थन दिहल जाव. बोलचाल में भोजपुरी के प्रयोग से हिचकिचाहट खतम करे खातिर एगो बड़हन आन्दोलन चलावहू के जरुरत महसूस कइल गइल.

अभिभावकन खातिर वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रम चलावे के चाहीं जवना से कि ऊ लोग अपना बचवन के भोजपुरी बोले खातिर प्रोत्साहित कर सके. घर में भोजपुरी के अधिकाधिक प्रयोग के बात कहल गइल जवना से कि भोजपुरी अपना स्वाभाविक माहौल में बचावल आ चलावल जा सके. एह बाति के गलत बतावल गइल कि मारीशस के पन्द्रहे फीसदी लोग भोजपुरी बोल भा समुझ सकेला. ई आंकड़ा गलत आधार पर बनावल बा. जरुरत बा कि आँकड़ा बिटोरे वाला लोग अपना सवाल के सही तरीका से पेश करो. आ सामने वाला बेझिझक सही जवाब दे सको.

साल २००६ में आप्रवासी घाट के विश्व धरोहर का रुप में यूनेस्को के मान्यता मिलल रहे. २ नवम्बर १८३४ का बाद से एही घाट के सोलह सीढ़ी चढ़ के भोजपुरिया मजदूर ईख का खेतन में काम करे जात रहलन. भोजपुरियन के बहुते कष्ट आ जलालत झेले पड़ल रहे. अब बरिसन से दोसरा प्रभावी भाषन से कमतरी महसूस करत आ रहल भोजपुरी पर गम्भीर ध्यान दिहल जा रहल बा.
आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड के कोरिन फारेस्ट कहलन कि मारीशस के संस्कृति समुझे खातिर जरुरत बा कि हमनी समुझी जाँ कि भोजपुरी क्रिओल के का दिहलसि आ क्रिओल से ओकरा का मिलल. एकर वैज्ञानिक तथ्यपरक शोध कइला के जरुरत बा. हमनी के अपना के पहिचनला के आ अपना धरोहर के बचा के रखला के जरुरत बा,

हमनी पर भइल अत्याचार कई रुप में भइल रहे, बोली पर, संस्कृति पर, कला रुपन पर, खाएपिए का तौर तरीका पर, ज्ञान पर, हस्तकला पर. एह सब के अध्ययन करे के जरुरत बा जवना से हमनी का धरोहर के सही रुप से जानल जा सके. फारेस्ट कहलन कि आप्रवासी घाट एह सच के जानत मानत बा आ यूनेस्को के दिशानिर्देश के पालन कर रहल बा.

कार्यशाला में इहो कहल गइल कि भोजपुरी के धरोहर के बचावे खातिर एगो सांस्कृतिक नीति होखे के चाहीं, शिक्षा का क्षेत्र में भोजपुरी के ओकर जायज जगहा दिआवे खातिर सही शैक्षणिक नीति बनावल जाय, आ भोजपुरी के औपचारिक मान्यता दिहल जाव. कार्यशाला के मकसद रहे कि

१. भोजपुरी पर आधुनिकता के प्रभाव, एकर परिवर्तन आ विकासप्रक्रिया के पहचान
२. विद्वानन आ पेशेवर समुदाय का बीचे समन्वय स्थापित कइल जवना से कि गिरमिटिहा मजदूर मार्गयोजना प्रकल्प में भोजपुरी के शामिल करावे बदे शोध नेटवर्क बने.
३. एह विषय पर अबले भइल शोध के मूल्यांकन आ आगे के दिशा तय कइल.
४. भोजपुरी भाषा संस्कृति के फइलावे का दिशाईं सुझाव दिहल, कार्ययोजना बनावल, आ दोसरा भाषा समूहन से बेहतर तालमेल बइठावल.

जे लोग एह कार्यशाला में आपन शोधपत्र राखल
रविराज बिछूक, प्रवक्ता, मारीशस विश्वविद्यालय
डा॰अर्चना कुमार, सहप्राध्यापक, अंगरेजी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय
कोरिने फारेस्ट, तकनीकि प्रमुख, आप्रवासी घाट ट्रस्ट
सत्येन्द्र प्रीथम, ट्रूथ एन्ड जस्टिस कमीशन
देवदत बालकिसून
हदोरी चेट्टन
अरविन्द बिसेसर
जय दावसिंग
शोभानन्द सीपरसाद, मुख्य संपादक, न्यूज आन संडे
डा॰सरिता बुद्धू, निदेशक, मारीशस भोजपुरी इन्स्टीच्यूट
डा॰उदय नारायन गंगू, सचिव, आर्यसभा
डा॰गौतमी रमइयाद. एमजीआई दूरस्थ शिक्षा प्रमुख
डा॰सुचिता रामदीन
किशोर ठकोरी, भोजपुरी गायक
डा॰दर्शन पुरोहित, बड़ौदा विश्वविद्यालय के नाट्य प्राध्यापक

कार्यशाला के आयोजन मारीशस विश्वविद्यालय, रविन्द्ननाथ टैगोर इन्स्टीच्यूट, आ महात्मा गाँधी इन्स्टीच्यूट का साथे मिल के आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड कइले रहे. कार्यशाला १३ जुलाई से १५ जुलाई ले चलल.

कार्यशाला के औपचारिक उद्घाटन टर्शियरी शिक्षा मंत्री राजेश जीता आ मारीशस विश्वविद्यालय के कला संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो॰एस शोभी का मौजूदगी में मारीशस के कला संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चूनी कइलें.



डिफाई मीडिया पर प्रकाशित मूल रिपो्र्ट़
के भोजपुरी अनुवाद

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4 Comments

  1. एतना काम के प्रस्ताव ? धन्य बाड़े मारिशस के भोजपुरिहा. असली भोजपुरिहा के इहे पहिचान ह. उहाँ सभ के जतना बड़ाई कइल जाउ कम बा. उम्मीद करतानी कि हमनियो किहाँ लोग दलीय मानसिकता से ऊपर उठी आ जरूर कुछ खास करी.–रामरक्षा मिश्र विमल

  2. bahut sathark kadam……. bhojpuri ke disai.

    bharat me bhi eehe aalakh jagawal jarooru ba.

    mauritius a go exemplary case ba ki kaise uhan sabhi bhojpuri ke vikas me lagal sanstha aak manch par aake sarakar ke sathe mil ke ee disai kam kar rahal bade san.

    sampadak ji ke sadhuvad.
    dhyanbad atna nik suchna presit kare la.
    santosh patel

  3. मारीशस में एतना बड़ पैमाना प भोजपुरी खातिर काम चल रहल बा, जानके बहुत खुशी भइल. अब भारत के भोजपुरिया लोगन के बारी बा,ऊ लोग भोजपुरी खातिर कुछ ठोस क के देखावे.

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