(षष्ठी, बियफे, १० अक्टूबर २०१३)
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना |
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी |

माई दुर्गा अपना छठा रूप में ” कात्यायनी ” का नाम से जानल जाली.नवरात्र में छठा दिन माई के एही रूप के पूजा होला.”कत” नामक प्रसिद्ध ॠषि के पुत्र “कात्य” का गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन भइले.ई भगवती पराम्बा के उपासना करत कई बरिस तक कठिन तपस्या कइले.इनकर इच्छा रहे कि माई भगवती इनका घर में बेटी का रूप में जन्म लेसु.माई इनकर प्रार्थना स्वीकार कऽ लिहली.एही से माई के नाँव कात्यायनी परल.माई कात्यायनी अमोघ फल देबेवाली हई.भगवान कृष्ण के पति रूप में पावे खातिर ब्रज के सभ गोपी लोग यमुना जी के किनारे इहाँके पूजा कइले रही.इहाँके स्वरूप भव्य आ दिव्य बा.माई के चार गो भुजा बा आ इहाँके वाहन सिंह हऽ.माई कात्यायनी के भक्ति आ उपासना से बहुते सहजता से अर्थ,धर्म,काम आ मोक्ष चारो फल प्राप्त हो जाला.नवदुर्गा में छठवी माई कात्यायनी दुर्गाजी के जय हो.


(चित्र आ विवरण डा॰रामरक्षा मिश्र का सौजन्य से)

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