विश्व भोजपुरी सम्मेलन का तरफ से पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के आयोजित राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन शुक का दिने आगरा शहर के सूर सदन में शुरु हो गइल. उद्घाटन मारीशस से आइल भोजपुरी बुद्धिजीवि डा॰सरिता बुद्धू दिया जरा के कइली. सम्मेलन में देश भर से आइल भोजपुरी साहित्यकारन का अलावा मारीशस, सिंगापुर, कनाडा, फिजी, मलेशिया, आ सूरीनाम से प्रतिनिधि आइल बाड़े.

अपना उद्घाटन भाषण में डा॰बुद्धू कहली कि चिन्ता के बात बा कि देश विदेश में भोजपुरी के विकास होखला का बावजूद नयकी पीढ़ी भोजपुरी बोले में संकोच करत बा आ भोजपुरी खातिर इहे सबले बड़ चुनौती बा. सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी के कहनाम रहे कि भोजपुरी के विकास के गति बहुते मद्धिम बा. अइसन मत होखे कि भोजपुरी सिनेमा आ लोकगीते तक सिमट के रह जाव. भोजपुरी साहित्य रचे आ पढ़े वालन के गिनती घटल जा रहल बा. गाँव जवार में त इ अबहियों अपना उर्जा से बढ़त बिया बाकिर शहरन में ना. जरुरत बा कि हमनी जब एह सम्मेलन से लवटी त अपना अॡना जगह भोजपुरी के दूत बन के जाईं. अपना इलाका में भोजपुरी भाषा आ एकरा साहित्य के समृद्ध करीं.

उद्घाटन सत्र में डा॰अम्बेदकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के एन त्रिपाठी, यूपी के पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र, डा॰अरुणेश नीरन, प्रेम शुक्ल बगैरह वक्ता आपन राय रखलें. सबका एही बात के चिन्ता रहे कि भोजपुरी के विकास का बावजूद बातचीत में भोजपुरी के इस्तेमाल करे वाला लोग दिन पर दिन घटते जात बा. सम्मेलन का मंच प दैनिक जागरण के स्थानीय सम्पादक सरोज अवस्थी, छावनी बोर्ड के संजीव कुमार. अमरजीत मिश्रा, अशोक चौबे, हरिनारायण चतुर्वेदी, गिरींद्रनाथ दूबे मौजूद रहलें. एही सत्र में सम्मेलन के स्मारिका गंगाजलि के विमोचनो कइल गइल.

साँझ के कवि सम्मेलन आ ओकरा बाद मेघदूत के पूर्वांचल यात्रा नाम के गीत नाटिका के मंचन कइल गइल.

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