गज़ल : उरुवा लिखीं, उजबक लिखीं कि बेहया लिखीं

– डा0 अशोक द्विवेदी

DrAshokDvivedi

एह बेशरम-अनेति पर अउँजा के, का लिखीं
उरुवा लिखीं, उजबक लिखीं कि बेहया लिखीं

लंपट आ नीच लोग बा इहवाँ गिरोहबन्द
सोझबक शरीफ के बा बहुत दुरदसा लिखीं

लँगटे-उघार देहि से, दिल से दिमाग से
अइसनका लोग ढेर बा,अब कतना, का लिखीं

एह देश के कहिया ले जान छोड़ी गुलामी
कवना अधीनताई के दारुन-कथा लिखीं

लोहू से लिखल बा इहाँ जिनगी क दास्तान
स्याही से भला ओके अब, केतना दफा लिखीं

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