– ओ.पी. अमृतांशु

रंग – अबिरवा लेके गुललवा
मस्त फगुनवा आईल बा.
केने बाड़ी पुरूवा रानी
पछेया बउराईल बा.

सरसों फुलाइल, लहराइल बा तीसी,
मटर के ढेंढी देखावे बतीसी,
झपड़-झपड़ गेहूमा के बालवा
कचरी पे लोभाइल बा.

मोजरा से रस झर-झर बरसे,
कोइलर – मैनो के मन हरसे,
फुदुकेले फुद-गुदी चिरईयाँ
गुद-गुद-गुदी समाईल बा .

रंग-बिरंगा चुनरिया रंगाईल,
दिल से दिल के गेंठ जोडा़ईल,
नस-नस में उमंग बा आइल
अंग-अंग हूलसाईल बा.

केने बाड़ी पुरवा रानी
पछेया बउराईल बा.

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