हटे देश बपौती तहरे

AshokTiwari

– अशोक कुमार तिवारी

जीए द जनता के चाहे गरदन जाँत मुआव,
हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ.

स्वास्थ सड़क शिक्षा तीनोें के धइले बा बदहाली,
तोहरा एकर कवन फेर बा काटऽतारऽ छाल्ही.
एहिजा जरे बदन घाम में, ओहिजा चले एसी,
इहाँ तियन से भेंटे ना बा, उहवाँ मुरगा देसी.
आर्सेनिक पानी पीए के बा इहवां मजबूरी,
उहवाँ कोल्ड ड्रिंक दारू में फेंटल भइल जरूरी.
कुल्हि लोग के फाटे द, बस आपन खाली बचावऽ,
हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ.

याद करऽ हमनी से का का कइले रहलऽ वादा,
कुरसी मिलते बदल गइल छने में सब इरादा.
हमनी के लड़ी जा एहिजा रोजी-रोटी खातिर,
काहें ला तू बड़की कुरसी धइले बाड़ऽ नाती.
सब गरीब जब मरिए जइहें, कहवां रही गरीबी,
तोहरा ले शुभचिन्तक के बा के बा अब करीबी.
आपन सपना साँच करऽ हमनी के बस देखलावऽ,
हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ.

कार भइल बेकार अब तूं प्लेन में चढ़ि के चलऽ,
देश के रुपिया तहरे हटे, लूटि पाटि के धऽ ल.
सब हमाम में लंगे बाटे, के बाटे पुछवइया.
जे तू कहबऽ सत्य बचन बा उहे खाली भईया,
बाड़ समरथ तूं ही, जे तूं चहबऽ उहे होई.
केतनो केहु छाती पीटी, केतनो केहू रोई.
परले राम कुकुर के पाला जेने अब घिसियावऽ,
हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ.


गाँव सूर्यभानपुर, जिला बलिया के अशोक कुमार तिवारी (बीए, एलएलबी) पेशा से वकील हईं. इहाँ के रचना भोजपुरी आ हिन्दी के पत्र पत्रिकन में छपत रहेला. आ हालही में इहाँ के पहिला कविता संग्रह ‘पहिलका डेग’ का नाम से छप चुकल बा. दूरदर्शन आ मंच पर कविता पाट करत रहीले.

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