– डा0 अशोक द्विवेदी

DrAshokDvivedi
कहल गइल बा कि मूरख उलटेला तबो मुरुखे रहेला बाकि साक्षर उलटि के राक्षस हो जाला, “साक्षरा विपरीताश्चेत राक्षसा एव केवलम्..” !

एही तरे कानून क जानकार जदि कानून का उल्टा सोचे आ निगेटिव करे शुरू कऽ देव त अपना फितरती कारनामा से नाकन चना चबवा देला. तमाशा तब खड़ा होला जब ऊ दिठारे सेन्हि पर पकड़इलो पर छाती उतान करत हेकड़ी देखावे लागेला. ‘आआपा’ के एगो अइसने आपिया बिधायक जब अपना दुर्दम कारनामा प उतारू भइल त राजधानी दिल्ली का पुलिस के नाकन चना चबवा दिहलस.

चार्ल्स सोभरजवा बड़ा मुश्किल से धराइल रहे. ओकरा बहुरुपिया लुकाछिपी के अंदाज से फिलिम वाला एतना प्रभावित भइलन स कि ओकरा प फिलिम बना दिहलन सऽ. ओइसे त ऊ सुलताना डाकू आ फूलन देबियो प फिलिम बनावे में अगुवाइल रहलन स, इहाँ अइसन बतियो नइखे. साधारन बात, साधारन ममिला बा.

प्रेक्टिस में फ्लाप वकील तिकड़म चकमा में ढेर माहिर हो जाला. अतना माहिर कि पूरा के पूरा सरकारी महकमा के गड़थइया के नाच नचा देला. अब अइसनका मनई विधायक बन जाय त सोचीं कतना खतरनाक हो जाई. मेहरारू से घरेलू हिंसा क ममिला ना रहित त ऊ पीठी धूर ना लगावे दिहित. नारी सशक्तीकरण का समय में, नारी सुरक्षा का नाँव प सत्ता पावे वाली पार्टी खुदे अपना विधायकन (खास कर कानून मंत्रालय) का परसनल खुराफात से परेशान बिया ऊपर से पुलिस के दिन दहाड़े ठेंगा देखा के निकल जाए आ लाख कोशिश प ना धराये वाला ई आपिया स्टाइल एघरी राजधानी मे चरचा क मसालेदार विषय हो गइल बा.

आगा चाहे जवन होखे बाकि अपना फितरत आ लुकाछिपी वाला स्टाइल से ई जन प्रतिनिधि ई त साबित कइये दिहलस कि दिल्ली सरकार आ ओकर ‘कानून क राज ‘ केतना लचर आ बेबस बा. देखल जाव कि ई बेशरम आपिया सुप्रीमो कोर्ट के आदेश मानत बा कि ना.

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