– ओ. पी. सिंह


आपन देश गजबे ह. एहिजा तरह तरह के अजूबा देखे के मिलि जाला. सबले बरियार नेता के तानाशाह बतावत तरह तरह के विशेषणन से नवाज दीहल जाला आ नवाजे वाला निश्चिन्त रहेला कि ओकरा खिलाफ कवनो कार्रवाई नइखे होखे वाला. जे खुद जेल भेजे लायक होला उहो उनुका के जेल में डाले के बात करत रहेला.
जेकर बेकत अधिका बा ओकरो धूला-गरदा करा दीहल जाला आ ऊ रोईयो ना पावे. निरदयी सरकार मानहीं के तइयार ना होले कि ओकरो राज में कतहीं धूला-गरदा हो सकेला. भर जगहे धूरा-गरदा होखे तबहूं. आपन देश गजबे ह. गाँव के बेकतगर परिवार होखला का बावजूद ऊ आपन त्योहार ना मना सके, अपना बेकत के दाह संस्कार ना करा सके. आ निरदयी सरकार ई सोच के मस्त रहेले कि सेकुलर बयार के माहौल में केहु ओकर कुछ ना बिगाड़ सके. ऊ अपना राज में पास पड़ोस से बोलवा के अतना अनेरियन के अपना राज में बसवा दिहले बावे कि ओकनी के अत्याचार पर रोवहूं के बेंवत नइखे केहू का लगे. आ गँवे-गँवे एह अनेरियन के बेकत एह रफ्तार से बढ़ल जात बा कि जल्दिए भर गाँव ओहनिए से भर जाई आ मूल बाशिन्दा आपन भाषा, भूषा, पहचान सगरी बदल लेबे ला मजबूर हो जइहें ना त अपना जगहा से बेदखल हो के कवनो दोसरा जगहा सरन खोजे लगीहें, कश्मीर के पंडितन लेखा. आपन देश गजबे ह.
जेकरा अबर रहे के चाहीं से जबर बनि जाई आ ऊ जबरा नवका अबरन के मारबो करी आ केहु के रोवहूं ना दी. रोई त ओकर आवाज सुने वाला केहू ना रही. उलटे ओकरे प अछरंग लगा के ओकरे के दोसी ठहरा दीहल जाई. आपन देश गजबे ह. पचासन बरीस से जे देश के हर संस्था के बरबाद करत आपन वंशवाद चलावत रहल से आजु संस्थानन के खतम होखे के रोना रोवत बा. करोड़ों के घोटाला का जुर्म में सजा पा चुकल चोर जमानत प छूट के जेल से बहरा राजनीति करत बा आ जेपी सेनानी के भत्ता उठावत बा. मास्टरी क के टुटही साइकिल से चले वाला अपनही ना, अपना भर खानदान साथे खरबो के मालिक बन के बइठल बा. आपन देश गजबे ह.
चिटफंड घोटाला में शामिल लोग प कानूनी कार्रवाई होखी त ऊ कहे लगीहें कि ओकरा से राजनीतिक बदला लीहल जात बा. गिरोह के मुखिया कही कि राजनीति करे खातिर केहू से दस-पाँच लाख के घूस ले लीहला में कवनो दोस ना माने के चाहीं. अपने गोल के धन-सम्पति गोल करे का मामिला में जमानत प छूटल महतारी-बेटा कहत बाड़ें कि नीमन दिन तबे आई जब ओकरा हाथे राज आई. ओकर नीमन दिन त ढेर दिन ले रहल अब आम जनता के नीमन दिन आवल चाहत बा त ओकरा बरदाश्त नइखे होत. आपन देश गजबे ह.
ईमानदारी के नाम पर गद्दी प आइल गिरोह के गतर-गतर बेइमानी में डूबल बा. कहत बाड़ें कि चुनाव लड़े जोग धन नइखे ओकरा लगे आ एह राज से कूद के ओह राज ले मुख्यमंत्री बने के सपना देखत चलत बा. जे दोसरा के तानाशाह बतावत बा ऊ अपना खिलाफ आवाज उठावे वाला के जेल में डालत चलत बा. इमाम खातिर सरकारी खजाना लुटावे में कवनो दोस नइखे देखल जात बाकिर पंडित-पुजारी ला फूटलो कौड़ी नइखे निकलत. आपन देश गजबे ह. आ एकरा ला जिम्मेवार हमनिए का बानी जा जे अपने में सिर फोड़उअल करे में बाझल बानी जा. अपना लोगन प होखत अत्याचार का खिलाफ खड़ा नइखीं होखत जा. हालात इहे बनल रहल त जल्दिए ना त बाँस रही ना बँसुरी बजावे के जरूरत रहि जाई.
बजावत रहल जाव तबले आपन आपन पुपुही. आपन देश गजबे ह.

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