पाँच कवर भीतर, तब देवता पितर : बतंगड़ – 97

एगो जमाना उहो रहुवे राजीव गाँधी का बेरा जब जनता में ई बहुते प्रचलित हो गइल रहल कि सौ में निनान्बे बेइमान, तबहियों हमार देश महान. कहे वाला त मजाक में, तंज में कहत रहलें बाकिर इहो एगो सचाइए हऽ कि एतना बेइमानन के मौजूदगी का बादो हमनी के देश महान बनल रहि गइल. तब राजीव गाँधी खुदे कहले रहलें कि जनता खातिर चलल सौ गो रुपिया ओकरा लगे चहुँपत-चहुँपत महज पनरह गो रहि जाला.

उहे बेइमानी वाला दिन खोजत बेइमान एह फेर में बाड़ें कि कवनो तरह एह मोदिआ के हटावल जाव. एकरा ला ऊ कवनो हद ले गिरे के तइयार बाड़ें, कवनो काम करे ला, हर जगहा आगि लगावे ला, हिन्दूवन के अपने में लड़ावे-भिड़ावे ला बेचैन बाड़ें. आपन ई मकसद पुरावे ला चारा-चोर, नेशनल-चोर, टोंटी-चोर, कर-चोर वगैरह आपन-आपन गोल के मोह छोड़त एगो बड़हन गिरोह बनावे में लागल बाड़ें जवना का बल पर मोदी के हरावल जा सके. नेतवन में अधिका त तरह-तरह के चोरे भरल बाड़ें. आजु का जमाना में ईमानदार नेता उहे रहि गइल बा जेकरा चोरी के मौका नइखे मिलल भा जे चोरी करे के हिम्मत भा हिमाकत ना जुटा सकल.

चपरासी का खानदान से आवे वाला आजु अरबों-खरबों में खेलत बाड़ें. साइकिल चलावत माहटरी करे वाला नेता मौका मिलते अतना कमा लिहलसि कि ओकर मय कुल खानदान आजु अरबपति हो गइलें. नेहरू खानदान कबो कवनो नौकरी धंधा ना कइलसि बाकिर ओकरा लगे आजु अतना संपति बा जवन कहल जाला कि ओकरा के दुनिया के बड़का धनपतियन का कतार में शामिल करा दिहले बा. नोटबंदी से जनता कुछ परेशान भइल बाकिर बहुते नेतवन के पेट पर जवन लात पड़ल तवना के मरोड़ अबले रहि-रहि के उठत बा. जनता नोटबंदी भुला जाव त भुला जाव ई नेतवा ओकरा के कबो ना भुला सकसु.

देश के लूटे ला बहुते जतन से बनावल ढाँचा आधार का चलते अइसन भहरा गइल कि दुबारा ओकरा के खड़ा कइला में बहुते जोगाड़ करे के पड़ी. जनता अब नोटबंदी आ आधार के फायदा देखि चुकल बिया आ ओकरा के फेरु से लूट का जाल में फँसावल आसान ना होखी. एह सब का बावजूद ई चोर-बेइमान नेता जानत बाड़ें कि ई आखिरी मौका मिलल बा. अबकी अगर दाल ना गलल त फेरु दुबारा कबो गले वाला नइखे. अब ई हमनी के सोचे के बा कि एहनी के मौका दीहल जाव कि ना.

इहो नइखे कि मोदी का साथ वाला गंगा नहाइल हउवें. बाकिर मजबूरी ई बा कि मोदी एह लोग के कमाए के मौका नइखन देत. पिछलको बेर एगो चौकड़ी रहल जवन चाहत रहल कि भाजपा 160 सीटे पर रहि जाव. ओह हालत में एह लोग के मौका मिल जाइत गठबन्हन के नेता बने के. ओह लोग के दुर्भाग आ देश के सुभाग कि मोदी के अकेले दम पर बहुमत मिल गइल. संहतियन के लागल कि मोदी के जीत में सबले बड़हन हाथ ओही लोग के रहल. से शिवसेना रहि-रहि के अकबकात रहुवे आ जब से शाह इशारा दे दिहलन कि ओह लोग के छोड़ल जा सकेला तब से तनी शान्त लउकत बाड़ें. कुशवाहा आ राजभर छरपहीं वाला बाड़ें तबले पासवानो बाप-बेटा आपन गोटी खेलल शुरू कर दिहले बाड़ें. एह गलतफहमी के पोसला के कवनो जरुरत नइखे कि ई लोग देश के ना त कम से कम अपना जाति-समाज के भल करे ला बेचैन बाड़ें. ई लोग के मंत्र इहे ह कि – पाँच कवर भीतर, तब देवता पितर. अब एकरा ला बहाना जवन बनावे के पड़ें.

मोदी जीतलें त दोसरा केहू के पीएम बने के कवनो चाँस नइखे बाकिर अगर हरा दिहल गइलें त केहू गुजराल भा देवेगोडा बनि सकेला. इहे लालच एह लोग के मजबूर कइले बा. बाकिर का हमनिओ के इहे मजबूरी बा ?

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