– ओ. पी. सिंह


महामहिम राष्ट्रपति जी, राउर बतिया हमरा से बरदाश्त नइखे होखत. अब रउए बता दीं कि हम कहाँ जाईं. कोच्चि मे 2 मार्च के दीहल राउर उद्बोधन हमरा सोझा बा. एहमें राउर कहना बा कि अपना देश में असहिष्णु लोग ला कवनो जगहा ना होखे के चाहीं. मीडिया में राउर भाषण जवना तरह से पेश कइल गइल ओहसे हमरा पहिले लागल कि मीडिया ओकरा के अपना हिसाब से पेश कइले बा. त हम राउर आधिकारिक भाषण पढ़नी आ साँच कहीं त राउर भाषणो हमरा पचल ना. एह हालत में रउरे बताईं कि हम कहाँ जाईं. रउरा कहले बानी कि हिन्दुस्तान पुरातन काल से बरदाश्ती रहल बा आ हर तरह के बाति, विचार, संस्कारन के जगहा देत आइल बा. आ ई परम्परा बरकरार रहे के चाहीं. बोले भा अभिव्यक्ति के आजादी सबले खास मौलिक अधिकार हवे हमहन के संविधान के. आगे कहले बानी कि भारत हमेशा से शिक्षा के क्षेत्र में विश्व नेता रहल बा. नालन्दा आ तक्षशिला विश्व विद्यालयन के नामो लिहले बानी रउआ.
रउरा संबोधन के एक हिस्सा से हमहु सहमत बानी काहे कि ई ऐतिहासिक सच्चाई ह. बाकिर अपना एही बरदाश्ती सुभाव का चलते भारत एह हालात में आ फँसल बा. शायद राउर मनसा इहे बा कि देश के सगरी विश्वविद्यालयनो के नियति नालन्दा आ तक्षशिले का तरह हो जाव. जरा के राख बना दीहल जाव. देश के जनता के गाढ़ कमाई प पलात पोसात जेएनयू के नमकहराम विद्यार्थी आ फैकल्टी देश के टुकड़ा टुकड़ा करे के बातु कहसु, नारा लगावसु आ हमहन ओकरा के हँसी खुशी बरदाश्त कइले जाईं. रउरा त धिरवलो बानी कि अगर अइसनका लोग के रोकल गइल त देश एक ना रहि पाई.
ना महामहिम, ना. बहुत बरदाश्त क चुकल बा हिन्दुस्तान आ अबहियों बहुत कुछ बरदाश्त कइले जात बा. बाकि समय आ गइल बा कि अब एह बरदाश्ती सुभाव के बदलल जाव. कई साल पहिले बनारस में सुनल एगो नारा तब नीक ना लागल रहुवे बाकि आजु सोचत बानी त एकदम सही लागत बा कि भारत में जदि रहे के बा त वन्दे मातरम कहे के होई. जे लोग वन्देमातरम ना कहि सके, भारत अम्मी के जय ना बोल सके ओह लोग के एहीजा रहे के हक ना बने.
आ रहल देश के एक बेर फेरु टुकड़ा होखे के बात त कोढ़िया डेरावे थूक से वाला डर अब काम नइखे करे वाला. अगर पिछलके बेरा के बँटवारा सही सही आ इमानदारी से करा लीहल गइल रहित त आजु ई दिन देखे के ना मिलीत. हालात त उहे हो गइल कि जवना डरे अलगा भइनी तवने मिलल बखरा. अगर ओही घरी राफ साफ करा लीहल रहीत त आजु देश बहुते बवालन से बच गइल रहीत. बाकिर नेहरु के सत्ता लिप्सा आ गाँधी कै बुद्धि का चलते देश के टुकड़ा टकड़ा करे के मनसा राखे वालन के बरदाश्त करे के उपदेश दीहल जात बा.
महामहिम, इहे बात जब हमनी का कहेनी जा कि जेकरा हिन्दुस्तान से प्यार नइखे ओकरा पाकिस्तान चलि जाए के चाहीं त केतना हल्ला मचि जाला. आजु इहे बात रउरा कहत में लाज ना लागल. रउरा काहे ना विचार विमर्श करत हमहन के समुझावत बानी कि देश द्रोहियन के बाति कवना तरह आ काहे बरदाश्त क लीहल जाव. रउरा त धिरावत बानी, धमकावत बानी, देश से निकल जाए के बात करत बानी.
अगर इतिहास पढ़े आ ओकरा से सीखे के धीरज होखो त देखब कि जबले कवनो इलाका में हिन्दुवन के बहुतायत रहेला तबले ओह इलाकन में अल्पसंख्यक अधिकारन के बात खूब होखेला. बाकि जसहीं कवनो इलाका में हिन्दू अल्पसंख्यक हो जालें सगरी अधिकार भुला दीहल जाला. एकर उदाहरण गिनावे लागब त रउरो अनकस होखे लागब महामहिम. माफ करब, आजु ई सब बाति हम ना, हमार कीबोर्ड लीख दिहलसि ह, ठीक ओही तरह जइसे गुलमोहर के बाप के जान पाकिस्तान ना लिहलसि, लड़ाई ले लिहले रहुवे.

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