राजनीति के खटिया पर चड्ढी उतारि के (बाति के बतंगड़ – 9)

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– ओ. पी. सिंह

पिछला बेर खटिया आ ओरचन के बतिया आधे प छोड़ देबे पड़ल रहुवे. आजु फेर ओकरे के लेके बढ़त बानी. खटिया लेके बहुते गाना फिलिमन में आइल बा. ‘रामदुलारी मयके गई, खटिया हमरी खड़ी कर गई’ वाला गाना में हालात के मजबूरी के जिक्र बा त ‘सरकाय लेव खटिया जाड़ा लगे है’ भा ‘खटिया ना बोले ओरचनवा काहे बोलेला’ में शृंगार आ काम रस पर जोर बा.

राजनीति में खटिया के बात करत फिलिमन के खटिया पर सूते के मन हो गइला में कवनो विरोधाभास देखला क जरुरत नइखे. ई एगो दोसरा तरह के राजनीति के चरचा ला उठवले बानी. भोजपुरी के अनेके प्रेमी जँहे-तँहे लाठी भोँजत मिल जाले कि भोजपुरी मनोरंजन के दुनिया में आ गइल अश्लीलता के खतम कइल जरुरी बा. ऊ ई सोचे के ना चाहसु कि अखिर ई होखत काहें बा. अइसनका लठधर लोग हिन्दी के सभ्यता आ संस्कार भोजपुरिओ में स्थापित करे के कामना करेलें. आ ई कामना करत घरी उनुका ‘जु्म्मा का जुम्मा चुम्मा’ मंगला में कवनो खराबी ना लउके. ऊ इहो जानल ना चाहसु कि ‘चोली के पीछे क्या है, चुनरी के नीचे क्या है’. काहेंकि उनुका सभ मालूम बा. बाकिर भोजपुरी में ‘रिमोट से लहँगा उठावल’ एह लोगन के खराब लागेला. काहें कि भोजपुरी में कहल बाति अतना साफ तरह से कहाला कि ‘धँस गइल. फँस गइल, अड़ँसि गइल रे’ वाला हाल हो जाला, कुछऊ सोचे बूझे के जरुरते ना रहि जाव. यौवन के संस्कार जोबना के बाति बरदास्त ना करि पावे.

अरे भाई, भोजपुरी सिनेमा आ गाना आम भोजपुरियन खातिर बनावल जाले. भोजपुरी मे प्रयोगधर्मा फिलिम ना बनावल जाव आ अगर एकाध गो बने आ बनावे के दावा सुने के मिलबो करेला त ओह फिलिम के देखे के सुजोग ना बनि पावे. ‘तीसरी कसम’ बना के शैलेन्दर कतना कसम खइले होखीहे एह बारे में केहु ना बतियावे. अब जेकरा भोजपुरी के सिंगार पटार नइखे भावत से एकरा के साध्वी रुप देव आ आपन टेंट खाली करे के बेंवतो राखे तब जा के कुछ होखे के सपना देखो. धंधा करे वाला धनदाह करे ना आवे, ना ओकरा आपन कवनो संदेशे देबे के होला. ऊ त रुपिया कमाए आवेला आ ओकरा उहे बनावे के होला जवन बाजार में बिका सको.

राजनीतिओ में इहे होला. उहे कहाला जवन बिका सको. बाद में खरीददार वोटर अपना के ठगाइल महसूस करे त करत रहो. भइल बिआह मोर करबऽ का, बेटी छोड़ के लेबऽ का ? अब बाति के एह खटिया के ओरचन कसल जरुरी हो गइल बा काहे कि खटिया बहुते लटक गइल बा. राजनीति के खटिया तबेले आरामदेह आ जिताऊ होले जबले ओकर ओरचन बरियार रहे. एक बेर ओरचन ढील पड़ गइल त पूरा खटिया के छीनबीन होखत देर ना लागी. बबुआ जी के खटिया में हालांकि हालात उलुटा बा. ओहिजा देखि के लागत बा कि कुछ दिन बाद एह खटिया में ओरचने भर बाचल रही आ बाकी सगरी सूतरी दोसरा खटियन में लगा लीहल जाई. इहे देखत पीके का सलाह पर कांग्रेस ब्राह्मण पर पूरा जोर लगा दीहले बीया. अनकर बेटी दोसरा जाति धरम में बिअहला का बाद ओकरा के जाति बहरा करे में तेज लोग अपना बेरा सगरी नियम कायदा भुला देला. अब त बबुओ का नाम का साथे पण्डित जोड़ाए लागल बा. अलग बाति बा कि बबुआ के पण्डितई आजु ले कतहीं देखे के नइखे मिलल. ना त पढाई में, ना खेलकूद में, ना राजनीति में. पूरा भाषण मोदी के नाम से शुरू क के मोदीए का नाम पर खतम क देबे के कौशल अगर पण्डितई मान लीहल जाव त दोसर बाति. हालांकि एहु में ऊ कजरी के धार पलटीमार से बहुते पीछे छूट जइहें. शायद एही चलते हिन्द विरोधी इतिहासकारी क के मशहूर भइल एगो गुहाइन बुद्धिजीवी सलाह दीहले बाड़न कि बबुआ के अब बिआह क के आपन परिवार बसावे के सोचे के चाहीं. चड्ढीवालन के चड्ढी उतार पावल इनिका बस में नइखे. अब केहु ओह बुद्धिजीवी से पूछो त पता लागे कि उनुका कइसे उमेद बा कि एह उमिर में ई आपन चड्ढी उतार के परिवार बसाइहे लीहें. बाजपेयी के त लोग नाना ले बना देला बाकिर इनिका त ममे बनि के तोस धरे के पड़ी.

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