– ओ. पी. सिंह

राजनीति में नीचतई के कवनो सीमा ना होखे. आ दिन प दिन ई अउरी नीचे गिरल जात बा. गुजरात के चुनाव कांग्रेस आ भाजपा का बीच में नाक के लड़ाई बनि गइल बा. हज का भरोसे निकलल कांग्रेस मुतमइन रहुवे कि अबकी गुजरात में ओकर सरकार बनि जाई आ बबुआ के ताजपोशी का बाद ई उनुका ला सबले बड़का उपहार हो जाई आ उनुकर तुतुही दुनिया भर में बाजे लागी. बाकी जस-जस दिन आगे बढ़ल तस-तस कांग्रेस का बुझाए लागल कि ई सिरफल फोड़ल ओकरा बेंवत में नइखे.
राम जी के होखले से इन्कार करे वाला कांग्रेसी खानदान तब अपना के जनेऊधारी बरहमन साबित करे में लाग गइल. एने मन्दिरे-मन्दिर मूड़ी पटकत चलत बबुए के गोल के एगो बड़हन नेता आ वकील कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में माँग क दिहलन कि जबले 2019 के भोट नइखे हो जात तब ले राम मन्दिर के मसला पर कोर्ट कवनो सुनवाई मत शुरु करे. ओने अहमद पटेल के मुख्यमंत्री बनावे के लालच देत कांग्रेस मुसलमान गोलबन्दी शुरु क दिहलसि. पाकिस्तानी सेना खुल के कांग्रेस, राहुल आ अहमद पटेल के तरफदारी करे लागल कि अगर मोदी के हरावे के बा त हिन्दुवन के एका तूड़ल बहुते जरुरी बा. योजना त पहिलहीं से बनल रहल बाकिर खुलासा अब जा के भइल बा.
हिन्दुवन के एका तूड़े ला कांग्रेस हज के सहारा ले लीहलसि. अब ई हज ऊ हज ना ह. हार्दिक, अल्पेश आ जिग्नेश के नामन के पहिला अक्षर मिला के बनल मंत्र ह ई हज जवना भरोसे कांग्रेस गुजरात के वैतरणी पार करे के सपना देखले रहुवे. एहिबीच पहिला दौर के भोटिंग का ठीक पहिले मणिसंकर अय्यर एगो धमाका क दिहलन. नरेन्द्र मोदी ला सोनिया आ प्रियंका का बाद इहो नीच शब्द के इस्तेमाल क दिहलन आ मोदी का साथही उनुकर पूरा गोल लपकि लिहलसि एह नीचतई के. कांग्रेस के सन्निपात जस हो गइल आ आनन-फानन में मणिसंकर के कांग्रेस से निलम्बित क दीहल गइल.
राजनीति के जवन नीचतई प मणिसंकर उतरलन तवन कवनो पहिला बेर के बाति ना ह. एहसे पहिलहूं ई शख्स मोदी ला तरह-तरह के अपशब्दन के इस्तेमाल क चुकल बा बाकिर एक्शन पहिला बेर लीहल गइल बा ओकरा खिलाफ. एहसे एकरा पाछा के मरम जानल जरुरी बा. राजनीति में कबहूं कवनो बाति सोझ ना होखे. कहीं प निगाहें कहीं प निशाना राजनीति में आए दिन होखत रहेला. मणिसंकर कांग्रेस के प्रचार समूह के सदस्य हउवन आ ई सोचल गलत होखी कि ऊ बिना सोचले समुझले अइसन काम क जइहें जवना से कांग्रेस के नुकसान हो जाव.
असल में ई सबकुछ कांग्रेसी रणनीति के स्क्रिप्ट का हिसाबे से हो रहल बा. पहिले त हज के सहारा ले के हिन्दुवन के एका तूड़े के कोशिश भइल. फेर ईसाई आर्कबिशप से राष्ट्रवादियन के हरवावे के गोहार लगवावल गइल. राहुल के जनेऊधारी बरहमन होखल जान के मुसलमान बिदकसि जनि एह ला कपिल सिब्बल से राम मन्दिर के विरोध करवावल गइल. बाकिर हर चाल उलटा पड़त देखि के आखिर में राहुल के छवि बचावे ला ब्रह्मास्त्र का रुप में मणिसंकर के बयानबान चलवा दिहलसि कांग्रेस. काहे कि ओकरा मालूम हो गइल बा कि अगिला अतवार का दिने 18 तारीख के जब भोट गिनाई त कांग्रेस के हारल पकिया बा. एह हार से राहुल के प्रेसिडेन्सी प आँच मत आवे एहला मणिसंकर अब सभका निशाना प आ जइहन. मणिसंकर के कांग्रेसी भक्ति प कवनो शंका कइला के जरुरत नइखे. अपना मालिक-मलिकिनी ला ऊ कवनो नीचतई क सकेलें आ आपन बलिदानो दे सकेलें.
हालांकि कुछ लोग एह राय से सहमत नाहियो होखी. काहें कि ओह लोग के राय बा कि राहुल के ताजपोशी से निराश होके कपिल सिब्बल, शशि थरुर, चिदम्बरम, मणिसंकर वगैरह भितरघाती लोग कांग्रेस के बरबाद करे प आ गइल बा. खैर असल खेल जवन होखे हमहन के खुश होखे के चाहीं कि आखिरकार गान्ही बाबा के कहल सही साबित होखे का कगार प आ गइल बा. आजादी का बाद ऊ चहले रहलें कि कांग्रेस के विघटित क दीहल जाय.
(कोलकाता के हिन्दी दैनिक समज्ञा में पिछला अतवार 10 दिसम्बर का दिने अँजोर भइल.)

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