‌बांसगांव की मुनमुन – 11 वीं कड़ी

by | May 26, 2024 | 0 comments

( दयानन्द पाण्डेय के बहुचर्चित उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद )

धारावाहिक कड़ी के दसवां परोस
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( पिछलका कड़ी अगर ना पढ़ले होखीं त पहिले ओकरा के पढ़ लीं.)

(पिछलका कड़ी का आखिर में मुनमुन के त ई लागल कि ओकर जिनिगी रुटीन पर आ गइल बाकिर का साचहूं ? अब आगे पढ़ीं…)

बाकिर बिआह के जवन बाजार सजल रहल तवना में मुनमुन फिटे ना हो पावत रहुवे.इंजीनियर लड़िका ला इंजीनियरे लड़की चाहत रहे. डाक्टर ला डाक्टरे लड़की के मांग होखे. केहू एम.सी.ए. लड़की मांगे त केहू एम.बी.ए.. आ इंगलिश मीडियम त सभका चाहते रहे. आ एने मुनमुन में एहमें से कुछऊ ना रहल. दहेजो विकराले मंगाव. लागे कि केहू धरती से आसमान के दूरी नापत होखो, दहेज के मपना अइसने रहल. मुनक्का राय कहसु ‘जस-जस सुरसा बदन बढ़ावा तास दुगुन कपि रूप दिखावा/सोरह योजन मुख ते थयऊ तुरत पवनसुत बत्तीस भयऊ.’ ऊ कहसु, ‘हे गोस्वामी जी रउरा त सोरह योजन के सुरसा का आगा पवन सुत के तुरते बत्तीस के बना दिहनी बाकिज हम एह दहेज के सुरसा का आगे कहां से दुगुन रूप देखाईं ? आ कहां से ले आईं इंगलिश मीडियम, इंजीनियर, डाक्टर, एम.सी.ए., एम.बी.ए.?’

एहिजा त मुनमुन शिक्षा मित्र रहुवे. आ शिक्षा मित्र सुनते लोग बिदक जाव. कहे, ‘भाई अफ़सर, जज, बैंक मैनेजर, एन.आर.आई. आ बहिन शिक्षा मित्र !’ कई लोग त शिक्षा मित्रे ना जानत रहे. जब ऊ बतावसु त लोग कहे,’त कवनो प्राइमरी स्कूल के मास्टर भा क्लर्के-फ्लर्क काहें नइखीं खोजत ?’ फेर उपर से अउर जोड़ देव, ‘माथा फोड़ लेला भर से ललाट त चाकर ना हो जाई ?’ अब लोग जोड़ चाहत रहे. जइसे साड़ी पर ब्लाऊज, जइसे सूट पर टाई, जइसे सोना पर सुहागा. मुनमुन ला सुहाग खोजल अब मुनक्का राय खातिर कठिन होत जात रहुवे. उनुका इयाद आवे अमीर ख़ुसरो आ ऊ गुनगुना देसु, बहुत कठिन है डगर पनघट की, कइसे मैं भर लाऊं मधुआ से मटकी, बहुत कठिन है डगर पनघट की!

आ डगर कठिने रहल उनुके ससुरारिओ के. उनुका बड़े साला के निधन हो गइल. ऊ पत्नी आ मुनमुन के साथे ले जात रहलन आ भुनभुनात रहलन कि, ‘इनिको अबहियें जाए के रहल !’ ऊ पहिले दू बेर डोली में ससुरारी गइल रहलन – बिआह आ गवना में. तब सवारी का नाम पर बैलगाड़ी, डोली, घोड़ा अउर साइकिल के ज़माना रहल. कहीं-कहीं जीप आ बसो लउक जाव.दोआबा में बसल उनुका ससुरारी में गइल ओहू घरी कठिन रहल आ कठिन रहल अबहियों. कुआनो अउर सरयू का बीच उनुकर ससुरारि वाला गांव दू पाटन का बीचे फंसल लउके. अइसे कि कबीर याद आ जासु, ‘चलती चक्की देख कर दिया कबीरा रोय, दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय.’ अइसने हाल उनुका बड़का सालो के भइल रहुवे. दू गो छोटका भाइयन का बीच ऊ पिसा के रह गइल रहलन. मुनक्का राय के ससुर तब कलकत्ता में मारवाड़ियन का नौकरी में रहलन. मारवाड़ियने का तरह उहो पइसा खूब कमइलन. ख़ूब खेत ख़रीदलन. घर बनववलन. बग़इचे लगववलन, ईनार खोनववलन. घर के समृद्धि ला सगरी जतन जवन ऊ कर सकत रहलन कइलन.बाकिर एगो काम जवन सबले जरूरी रहल – लइकन के पढ़ावल लिखावल – तवने ऊ ठीक से ना कइलन. बड़का बेटा राम निहोर राय त थोड़ बहुत मिडिल ले पढ़ लिख गइल आ बाद में कलकत्ता जा के उहो बाप के काम में लाग गइल. हालां कि बाप जतना पइसा त ना पीट पवलसि बाकिर घर सम्हार लिहलसि. बाक़ी दुनू भाईयन में से मझिला राम किशोर राय प्राइमरी का बाद स्कूले ना गइल त सबले छोटका राम अजोर राय दर्जा एके का बाद स्कूल ना गइल.

मुनमुन राय के नाना के ओह घरी का समय में केहू समुझा दिहले रहल कि लइकन के ढेर पढ़ावे लिखावे के ना चाहीं. ढेर पढ़ लिख के ऊ सभ अपने त आगा बढ़ जालें बाकिर बाप महतारी के सेवा ना करसु. माई बाप के सुनबो ना करसु. एही सिखवला में पड़ि के ऊ बेटन के पढ़ाई लेके बहुत उत्सुक ना रहलन. अलगा बात बा कि बड़का बेटा जवन थोड़ बहुत पढ़ लिख गइल रहल उहे सिर्फ़ उनुकर विरासते ना सम्हरलसि बलुक उनुकर सेवो-टहल अंतिमे समय का, भर जिनिगी कइलसि. बाक़ी दुनू बेटा त जब-तब लड़ते-झगड़त उनुका जी के जंजाल बन गइलन स. बात-बात पर लाठी भाला निकाल ल सँ. ओहनी के उलट बड़का बेटा राम निहोर राय विवेकवान अउर धैर्यवान दुनू रहल. भाइयनो के हरदम समुझा-बुझा के राखे. बस एकेगो दिक्क़त रहल राम निहोर राय के कि उनुकर कवनो संतान ना रहल. ई दुख बड़हन रहल बाकिर कबो राम निहोर राय केहू से एह दुख के ज़ाहिर ना कइलन.

हॉ, मझिला भाई राम किशोर राय ज़रूरे उनुका एह कमज़ोर नस के फ़ायदा उठवलसि. अपना बड़का बेटा के बचपने में कलकत्ता ले जा के उनुका के सँउप के भावुक बना दिहलसि आ कहलसि कि, ‘आजु से ई हमार ना, राउर बेटा भइल. प्रकृति आ भगवान से त हम कुछ कह-कर नइखीं सकत बाकिर अपना तईं अतना त करिए सकिलें.’ आ बेटा उनुका गोदी में डाल के उनुका कदम में पटा गइल. राम निहोर भाव-विभोर हो गइलन आ राम किशोर राय के बेटा के छाती से लगा के फफक-फफक के रोवे लगलें. ओकरा बाद से ऊ त जइसे राम किशोर राय का हाथे बिका गइलन. सरयू-कुआनो में पानी बहत गइल आ राम किशोर, राम निहोर के लगातार भावनात्मक रुप से दूहे लागल. ओने राम किशोर के बेटा बड़ भइल त अपना के सन आफ़ राम निहोर राय लिखे लागल. राम अजोर के जब ई बाति एगो रिश्तेदार से पता चलल त चउँकल लाजमी रहल. काहें कि राम किशोर राय के दू गो बेटा रहलन स आ राम अजोर राय के एगो. राम निहोर राय चूंकि निसंतान रहलन से उनुकर जायदाद दुनू भाईयन का बीच आधा-आधा बंटाइत. तब एह हिसाब से राम अजोर राय के बेटा राम किशोर के बेटन से दुगुना जायदाद के मालिक होखीत. बाकिर राम किशोर राय के एह शकुनि चाल में राम अजोर के बेटो के हिस्सा दुनू के बराबर हो जाइत. राम अजोर राय एहकर कवनो काट निकाले के भरपूर सोचलसि बाकिर कवनो काट मिलल ना.

चूंकि राम निहोर राय खातिर ई भावनात्मक मामला रहुवे से सीधे उनुके से बतियावे के हिम्मत ना भइल राम अजोर राय के. तबहियों ऊ देखत रहलन कि राम निहोर भइया सगरी विवेक, सगरी धीरज ताखा पर राखत तरज़ूई के एक पलड़ा पूरा के पूरा राम किशोर का ओर झुकवले पड़ल रहलन. हालां कि ऊ सगरी उपक्रम एह तरह से करसु मानो दुनू भाई उनुका ला बराबर होखसु. दुनू के परिवारन के ऊ पूरा-पूरा ख़याल राखसु. कलकत्ता से जब आवसु त कपड़े लत्ता दुनू परिवारन ला ले आवसु. आ जवन कहल जाला संयुक्त परिवार ओकरो भावना के ऊ पूरा मान देसु. तबहियों देखे वालन के उनुकर पक्षपात लउक जाइल करे. कुछ रिश्तेदार त उनुका के एही चलते धर्मराज युधिष्ठिर ले कहे लागल रहलें. बतर्ज़ अश्वत्थामा मरो नरो वा कुंजरो! बाकिर उनुका तराज़ू के पलड़ा राम किशोर का ओर निहुरल त निहुरले रह गइल. बाप मुनीश्वर राय कई बेर इशारा से समुझावल चहलें बाकिर राम निहोर मानो सब कुछ समझियो के कुछऊ समुझल ना चाहत रहसु.

बाप के मरला का बाद उनुकर जायदाद तीनों भाईयन में बंटा गइल बाकिर राम निहोर के बखरा वाला खेती-बारी, घर-दुआर सभ पर व्यावहारिक कब्जा राम किशोरे के बनल रहल. काहें कि राम निहोर अपने त कलकत्ता में रहसु. गरमिये का छुट्टी में कुछ दिन ला आवसु भा जब जब शादी बिआह के समय होखे. ऊ आवसु त राम किशोर राय उनुका ला पलक पांवड़ा बिछवले मिलसु. राम निहोरो भावुक हो के अतना मेहरबान हो जासु कि बुझाव ना कि राम किशोर के का का दे दीं. राम अजोर आ उनुकर परिवार ई सभ देख के छटपटा के रहि जासु. एके गो घर रहल तीनो भाइयन का बीच. चुहानी भलहीं अलगा हो गइल रहल बाकिर अंगना-दालान-ओसारा-दुआर एके रहल. केहू से कुछ अनदेख ना रहि जाव. बाद का दिनन में खपरैल के ई घर धसके लागल. आ देखीं कि राम किशोर के नया घर बने लागल. ज़ाहिर रहे कि पइसा त राम निहोरे के खरचा होखत रहल. कुछ दिन में राम किशोर के पक्का घर बन के तइयार हो गइल. घर भोज का बाद राम किशोर के परिवार अपना नयका पक्कान में रहे चलि गइल.

बाकिर राम अजोर?

नाम भलहीं राम अजोर रहल, उनुका आंगन में अंजोर ना भइल. ओही टुटही धसकत घर में रह गइलन. बाद में एक-एक कोठरी बनवा के आ आगे-पीछे मँड़ई डाल के लाज बचवलन आ धसकत घर से जान छुड़वलन. बाद में गँवे-गँवे क के कई बरीस में पूरा मकान बना पवलन. अबले राम निहोरो राय रिटायर हो के गांवे आ गइल रहलन. मेहरारू के निधन हो चुकल रहुवे. से ऊ नितांत अकेला रह गइल रहलें आ पूजा पाठ में रम गइल रहलन. उनुकर समय गांव के मंदिर का पुजारियेजी का साथे अधिका गुज़रे लागल. ऊ देखे लागल रहलें कि राम किशोर आ उनुका परिवार के भाव उनुका ला पुरनके भावुकता आ समर्पण के ना रहि गइल रहुवे. उनुकर सगरी जायदाद, सगरी कमाई, ग्रेच्युटी, फंड सभकुछ राम किशोर के हवाले हो चुकल रहुवे. परिवार के उपेक्षा से पीड़ित हो के ऊ मंदिर, पुजारी आ पूजे-पाठ में समय बितावल करसु. एही बीच एगो अउर ठनका गिर गइल उनुका पर.

उमिर के एह पड़ाव पर चर्म रोग उनुका देह पर दस्तक दे दिहलसि. राम किशोर का परिवार में ऊ अब वी.आई.पी. से अचके में अछूत हो गइलें. उनुकर थरिया, लोटा, गिलास, कटोरी, बिस्तर, चारपाई सब कुछ अलग कर दीहल गइल. एगो कोठरी में ऊ अछूत बना के राख दीहल गइलन. अपने पइसा से बनवावल घर में ऊ बेगाना अउर शरणार्थी हो गइलें. सभका के शरण देबे वाला राम निहोर खुदे अनाथ हो के, शरणागत हो गइल रहलन. राम किशोर के ई अभद्रता, अमानवीयता देखि के ऊ अवाक रहलन. ऊ चाहसु अपना एह चर्म रोग के दवा करवावे के बाकिर पइसा अब उनुका हाथ में ना रहल. कुछ लोग बतावल कि अगर तुरते इलाज शुरु हो जाव त ई ठीको हो सकेला. आ जे नाहियो ठीक हो पावो त कम से कम बाकी देह में अउरी पसरल त रुकिये जाई. ना त ई सगरी देह में पसर जाई. बाकिर राम किशोर सभ कुछ अनसुन कइले रहलन. आ राम किशोर के जवन बड़का बेटा राकेश अपना के सन आफ़ राम निहोर राय लिखत रहुवे, उहो खुल के राम निहोर राय के मुख़ालफत करे लागल रहुवे. गाली-गलौज करे लागल रहुवे. निरवंसिया, निःसंतान, नपुंसक ना जाने का – का बोलल करे. आ बात गरियावहीं ले सीमित ना राखि के ऊ अब अपना छोटका भाई मुकेश के साथे मिल के जब-तब उनुका के मारहूं-पीटे लागल. राम निहोर जब कबो राम किशोर से रोवत गोहार करसु कि,’बतावऽ एही लात मार खाए खातिर बूढ़इनी? सगरी जायदाद, सगरी कमाई का एही दिन ला तोहरा के सँउपले रहीं?’

‘का करीं. अब ई लइका त हमरो नइखन सुनत सँ.’ राम किशोर कहते, ‘बेसी तू तड़ाक करब त ससुरा हमरो पिटाई करे लगिहें सँ.’

हालां कि राम निहोरे का सगरी गाँव जानत रहल कि राम किशोर के बेटा ओकरे शह पर ई सभ करत बाड़ें सँ. बाद का दिनन में त राम निहोर भरपेट भोजनो ला तरसे लगलन. गांव में अगर केहू उनुका पर तरस खा के कुछ खाए के दे देसु त राम किशोर के बेटा जा के ओकरा के गरिया आवँ स. अपमान अउर उपेक्षा से आखिरकार राम निहोर टूट गइलन. एक रात नींद से उठि के राम किशोर का लगे गइलन, जगवलन आ छोटे भाई के गोड़ पकड़ के फफक पड़लन. बाकिर राम किशोर पसीजल ना. आखिर राम निहोर कहलनि, ‘हमरा के मुआइै काहे नइखऽ देत? एह नरकाह जिनिगी से नीमन त इहे होखी कि तू हमरा के मुआ दऽ.’

‘रउरा अपना नखरा के खेत-बारी हमरा बड़का बेटा का नांवे लिख दीं!’

‘अरे ऊ त ओकर हइये हवे. हमरा मुआला का बाद ऊ अपने-आप ओकर हो पाई.’

‘कइसे हो जाई?’

‘अपना सगरी सर्टिफ़िकेट्स में त ऊ हमरा के आपन बापे लिखल करेला. से ऊ हमार बेटा साबित हो जाई. अपने आप हमार वारिस हो जाई.’

‘अतना बुड़बक समुझत बानीं?’ राम किशोर बोलल, ‘ब्लाक के कुटुंब रजिस्टर में ऊ हमार बेटा दर्ज बा. सर्टिफ़िकेट में लिखल कवनो कामे ना आई.’

‘ठीक बा. लिखवा ल बाकिर हमार सांसत बंद कर दऽ.’

‘ठीक बा.’ राम किशोर बोलल, ‘जाईं. सूत जाईं.’

(मुनमुन के कहानी कहत-कहत उपन्यासकार अब परिवार के कहानी बतावे लगलन. देखल जाव कि काल्हु भोरे का होखत बा राम निहोरा का साथे. राम किशोर का करत बा. – संपादक)

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अँजोरिया के भामाशाह

अगर चाहत बानी कि अँजोरिया जीयत रहे आ मजबूती से खड़ा रह सके त कम से कम 11 रुपिया के सहयोग कर के एकरा के वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराईं. यूपीआई पहचान हवे - भा सहयोग भेजला का बाद आपन एगो फोटो आ परिचय
anjoria@outlook.com
पर भेज दीं. सभकर नाम शामिल रही सूची में बाकिर सबले बड़का पाँच गो भामाशाहन के एहिजा पहिला पन्ना पर जगहा दीहल जाई.
अबहीं ले 13 गो भामाशाहन से कुल मिला के सात हजार तीन सौ अठासी रुपिया (7388/-) के सहयोग मिलल बा. सहजोग राशि आ तारीख का क्रम से पाँच गो सर्वश्रेष्ठ भामाशाह -
(1)
अनुपलब्ध
18 जून 2023
गुमनाम भाई जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

(3)

24 जून 2023 दयाशंकर तिवारी जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ एक रुपिया
(4)
18 जुलाई 2023
फ्रेंड्स कम्प्यूटर, बलिया
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया
(7)
19 नवम्बर 2023
पाती प्रकाशन का ओर से, आकांक्षा द्विवेदी, मुम्बई
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

(11)
24 अप्रैल 2024
सौरभ पाण्डेय जी
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

पूरा सूची
एगो निहोरा बा कि जब सहयोग करीं त ओकर सूचना जरुर दे दीं. एही चलते तीन दिन बाद एकरा के जोड़नी ह जब खाता देखला पर पता चलल ह.

संस्तुति

हेल्थ इन्श्योरेंस करे वाला संस्था बहुते बाड़ी सँ बाकिर स्टार हेल्थ एह मामिला में लाजवाब बा, ई हम अपना निजी अनुभव से बतावतानी. अधिका जानकारी ला स्टार हेल्थ से संपर्क करीं.
शेयर ट्रेडिंग करे वालन खातिर सबले जरुरी साधन चार्ट खातिर ट्रेडिंगव्यू
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