Month: जनवरी 2015

रविशंकर जी, याद बा नू ऊ बतिया जवन पिछला साल कहले रहीं ?

भोजपुरी के मान्यता के राह देखत एगो अउर बरीस बीत गइल बाकिर कतहूं कवनो संकेत नइखे लउकत. साफ लउकत बा कि सरकार एहसे उदासीन बिया. बाकिर उमीद के दीया अबहीं…

बनचरी (भोजपुरी के कालजयी उपन्यास के पँचवी कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी स्नान-पूजा का बाद जब कुन्ती अनमनाइल मन से कुछ सोचत रहली बेटा भीम का सँगे बाहर एगो फेंड़ का नीचे हँसी-ठहाका में रहलन स. हिडिमा के…

गणतंत्र दिवस 2015 के पहिले के साँझ दिहल राष्ट्रपति के संबोधन भोजपुरी में

हमार देशवासी, 66वां गणतंत्र दिवस के पहिले के साँझ हम रउरा सभे के एह दिन के बधाई देत बानी, खास क के हमनी के सेना, अर्धसेना, अउर भितरी सुरक्षा में…

गुलजारी लाल के जूता

– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर गइल रहलें. दूनो संघतिया बाजार…

गौरैया

– केशव मोहन पाण्डेय जइसे दूध-दही ढोवे सबके सेहत के चिंता करे वाला गाँव के ग्वालिन हऽ गौरैया एक-एक फूल के चिन्हें वाला मालिन हऽ। अँचरा के खोंइछा ह विदाई…

आखिर में ललकी साड़ी उघार होइए गइल

स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो के लिखल किताब ‘दि रेड साड़ी’ के पिछला सरकार का जमाना में कांग्रस भारत में प्रकाशित ना होखे दिहलसि. सोनिया गाँधी के जीवन के कहानी के…

बनचरी (चउथी कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी एगो विशाल बटवृक्ष का नीचे पत्थर शिला खण्ड का टुकड़न से सजाइ के एगो चबूतरा बनावल रहे. वृक्ष का एकोर ओइसने पत्थर के चापट टुकड़न के…

भोजपुरी आ मैथिली के कवि सम्मेलन

दिल्ली सरकार के मैथिली.भोजपुरी अकादमी 11 जनवरी का दिने दिल्‍ली के मंडी हाउस का फिक्‍की सभागार में गणतंत्र दिवस कवि सम्‍मेलन आयोजित कइलस जवना में दिल्ली आ बाहरो से आइल…

माफी मांगे के लफंगई

– जयंती पांडेय सीताराम बनिया मुंहअन्हारे बाबा लस्टमानंद के दुअरा आ पहुंचले. बाबा ओह समय बैलन के सानी-पानी करे के तइयारी में रहले. हाथ में छईंटी रहे. सीताराम बनिया के…