Month: जनवरी 2018

पद्मश्री डा0 कृष्ण बिहारी मिश्र

जन्म: 01 जुलाई 1936, बलिया जिला के बलिहार गाँव में। श्रीमती बबुना देवी आ श्री घनश्याम मिश्र क एकलौता पुत्र । शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक गोरखपुर में आ…

भोजपुरियत के प्रतिनिधि: डॉ0 कृष्ण बिहारी मिश्र

– प्रमोद कुमार तिवारी भोजपुरिया माटी में कुछ त अइसन बा, जवना से एह इलाका के साहित्यकारन में ललित भाव के रस छलके लागेला, कुछ तऽ अइसन बा कि जे…

नीक-जबून – 11 ( विमल के डायरी )

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बड़की बलिहार आ नदिया के पार आजुए रामेंद्र के फोन आइल रहल हा कि बड़की बलिहार गइल रहलीं हा. नाँव सुनते ‘नदिया के पार’ फिल्म…

नीक-जबून – 10 ( विमल के डायरी )

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बोले खातिर बोलल जब से नोकरी के शुरुआत भइल तबे से देखत आ रहल बानी. आजु तक एहमें कवनो कमी नइखे आइल, बढ़ंतिए भइल बा.…

चम्पारण सत्याग्रह आ पं0 राजकुमार शुक्ल – (स्मरण)

– कृष्ण कुमार चंपारन सत्याग्रह से जुड़ल कई गो कहानी अइसनो बाड़ी सन, जवन साइत इतिहास के पन्ना में जल्दी ना मिलें स बाकिर ओह कहानियन के, ओह इलाका क…

बोले-बतियावे से आगा / पढ़े-पढ़ावे के जरूरत !

– अशोक द्विवेदी लोकभाषा भोजपुरी में अभिव्यक्ति के पुरनका रूप, अउर भाषा सब नियर भले वाचिक (कहे-सुने वाला) रहे बाकिर जब ए भाषा में लिखे-पढ़े का साथ साहित्यो रचाये लागल…

भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के मिलल बाल साहित्य भारती सम्मान

लमहर समय से नीमन नीमन बाल साहित्य रचत आवत भोजपुरी हिन्दी के अनन्य  साधक भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के आजु उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का तरफ से दू लाख रुपिया नगद…

पाण्डेय कपिल : जिनिगी के हिसाब

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी आन्दोलन के संगठनात्मक अगुवाई आ सिरिजना के अभूतपूर्व ऊँचाई देबेवाला शख्सियत के नाँव ह – आचार्य पाण्डेय कपिल। एक ओर ‘फुलसुंघी’ जइसन जियतार – यादगार…

भोजपुरी फिलिमन प लागल फूहड़पन के दाग धो दी ‘डमरू’

भोजपुरी सिनेमा पर फूहड़पन ले के हमेशा अंगुरी उठत रहेली सँ. एही अछरंग के मेटावे धोवे के कोशिश करत आवत बा बाबा मोशन पिक्‍चर्स जे भगवान आ भक्त के कहानी…

मानिक मोर हेरइलें

– आचार्य विद्यानिवास मिश्र भोजपुरी में लिखे के मन बहुते बनवलीं त एकाध कविता लिखलीं, एसे अधिक ना लिखि पवलीं। कान सोचीलें त लागेला जे का लिखीं, लिखले में कुछ…

भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्ला, इंशा अल्ला ! – बतंगड़ 69

– ओ. पी. सिंह भारत के देशद्रोहियन के गढ़ बन चुकल जेएनयू से शुरु भइल नारा – भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्ला, इंशा अल्ला – के आवाज बँवारा गिरोहन…