‘भोजपुरी संगम’ के 138 वीं ‘बइठकी’ कोरोना प्रोटोकॉल के नाते ‘गूगल मीट’ एप से ऑनलाइन आयोजित भइल. अध्यक्षता सुभाष चंद्र यादव जी अउर संचालन अवधेश नंद आ ज्ञानेश्वर गुंजन जी मिल-जुलि के कइलीं.

बइठकी के शुरुआत अरविंद ‘अकेला’ के वाणी-वंदना के बाद कुशीनगर के राम नरेश शर्मा ‘शिक्षक’ के सुमधुर गीत से भइल-

 प्यार लूटल करऽ आ लुटावल करऽ
 जन-जन के हिया से लगावल करऽ 

बिहार के बेतिया से संचालन करत ज्ञानेश्वर गुंजन जी आपन सुन्दर गीत पढ़लीं-

 दियरी सनेहिया के देखा न बुताए
  टूटे ना पिरितिया के तार

अवधेश ‘नंद’ के बेटी पर लिखल मोहक छंद से ‘बइठकी’ गम्भीर हो गइल-

  बेटी हईं घर के दियरी
   इनके बिनु नाहीं बा संझा-पराती

नई दिल्ली से डा. कुमार नवनीत जी के बिरह गीत से पुरहर माहौल बनि गइल-

  अँखिया लोर तनी ढरकावऽ जनि 
  पिया देखत होइहें ना

सृजन गोरखपुरी भोजपुरी ग़ज़ल सुना के ‘बइठकी’ के एगो नया आयाम दिहलें-

   चरे दऽ साँड़ जिनि छेड़ऽ 
   बेवस्था  के   जमाई  हऽ

कुमार अभिनीत के संजीदा आ लोकप्रिय गीत बइठकी खातिर जरुरी समझल गइल-

   सून परल सगरी सिवान
   जवान घरे आइल नाहीं

लखनऊ के श्रीमती अंजू शर्मा जी से भारत के ओलंपिक जीत पर काव्यमय बधाई मिलल-

‌ खेल-खेल में खेलि के नीरज के विस्वास
अइसन भाला फेंकलें रचि दिहलें इतिहास

लखनऊए से वरिष्ठ कवि सूर्य देव पाठक ‘पराग’ जी आपन महत्वपूर्ण हाजिरी दर्ज करवलीं-

   तोहरा कोठवा से हमरा का काम बा?
   हमरा खातिर बा निम्मन मड़इया

अध्यक्षता करत सुभाष चन्द्र यादव जी शहीदन के अपने गीत से नमन करत ‘बइठकी’ के अंतिम सीढ़ी पर पहुँचवलीं-

   देके कुरबानी रखलें देसवा के पानी ओ जवानी के नमन
   अइसन रहलें स्वाभिमानी ओ जवानी के नमन
    एह लोगन के अलावा अरविंद 'अकेला', प्रेमलता रसबिंदु, संतोष विश्वकर्मा, कुमार शैल (बस्ती), शिवनंदन जायसवाल (लुंबिनी, नेपाल) आदि लोग भोजपुरी काव्य के कई विधन से 'बइठकी' के अलंकरण कइलें। एह अवसर पर डा.सुमन मिश्रा (लखनऊ), डॉ.धनंजय मणि त्रिपाठी (महराजगंज) व राकेश 'अकेला' सहित अनेक लोगन के आनलाइन उपस्थिति बइठकी के गर्हू बनवलस। 
     अंतिम में सगरी लोग के आभार ज्ञापन कुमार अभिनीत जी कइलें।

(स्रोत – कुमार अभिनीत, संयोजक, भोजपुरी संगम)

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