– जयंती पांडेय अचके रामचेला आ के कहले बाबा लस्टमानंद से कि हो बाबा जानऽ तारऽ ई मोदी सरकार जे बा नऽ से झूठहुं हाला मचवले बा कि महंगी कम हो गइल, लेकिन सांचो महंगी कम कहां भइल बा. जवन एक दूगो चीज के दाम घटल बा ऊ तऽ चांसपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय रामचेला एगो कागज हाथ में ले ले रहले. ओहमें कुछ लिखल रहे. ऊ कागज के रामचेला बाबा लस्टमानंद के देखवले. बाबा कहले ई सर्वे हऽ एह में लिखल बा कि मेहरारू सब दिन में माने कि 12 घंटा में 5 घंटा खाली बतियावेली सन. रामचेला कहले, बाबापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद मोदी के झाड़ू देवे वाला खबर पढ़ि के रामचेला से कहले, जवना झाड़ू से झड़ुआवे के रजमतिया के माई गारी दे ले तवने झाड़ू के अइसन फैशन आ जाई ई त केहु सोचलहीं ना रहे. ई झाड़ू के जबले घर के मेहरारू चलवली सन तबलेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय अबहीं हाले में जवन चुनाव खतम भइल ओकरा खातिर नेताजी गांवे आइल रहले. गांव में लस्टमानंद समझवले – ‘नेता जी, हालत के चूल्हा पर राजनीति के रोटी मत सेंकऽ’. ऊ जिद करे लगले, ना हो हम त रोटी सेंकबे करब. उनका समझावल गइल कि भले समय केपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद के लगे अईले आ आवते नर्भसा गइले. टेंनसनिआइल तऽ पहिलहीं से रहले. तनी अस्थिर भइले तऽ बाबा पूछले, का हो का बात बा. रामचेला थूकि घोंटि के कहले- सुनलऽ हऽ रेलवे के सब इस्टेशन हवाई अड्डा के बराबर होखे जा रहल बाड़े सन. सुनिपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय मोदी जी जापान गइले. उहां जा के जान जा रामचेला तासा बजवले. कतहत बड़हन काम कइले. लेकिन आहु पर विवाद हो गइल. कई गो प्रगतिशील भाई लोग पेट बिगड़ गइल. अतने ना मोदी जी खदे जापान में कहले कि राजा और प्रधानमंत्री के गीता दीहला पर देशपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बजार से अइले आ टमाटर के भाव बाबा लस्टमानंद के बता के ओहिजे थहरा के बइठ गइले. बाबा उनकर हाल देखि के लगले चिलाये. लोग आ गइल. सब लोग हरान कि का भइल बेचारा रामचेला के. बाबा अतने बतावस कि टमाटर के भाव बता के नर्भसापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अचके में कहले कि जान जा रामचेला कि एक दिन रात में अचके मोदी जी के अंघी खुल गइल. नेता लोग खास कर मंत्री लोग के अंघी टूट गईल बड़ा बडहन आ शुभ बात हऽ. अब जब अंघी टूटि गइल तऽ पलंग पर उठि केपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से अचके में रामचेला पूछले, बाबा हो! ई आपन मोदी जी आजुकाल कुछ बोलत काहे नइखन ? बाबा कहले, अब तूं ही बतावऽ कि मोदी जी सरकार चलावस कि बकबकास. अरे सरकार चलावल कवनो बैलगाड़ी चलावल ना नु ह कि जबले बैलन के गरियावल नापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय मंगलवार के रेल बजट देखि सुनि के बाबा लस्टमानंद कहले कि ‘विश्व स्तरीय रेल गाड़ी तऽ हमरा पसंद नइखे.’ आज के रेलगाड़ी के सफर के आपन मजा बा. सफर के समय , रामचेला जान जा कि एगो अभूतपूर्व आनंद होला. आजु के हमनी के जवन रेल बियापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के महिला संगठन के तरफ से कहल गईल कि कवनो हंसी के मसाला दऽ. बड़ा गड़बड़, महिला सशक्तिकरण के जमाना में जे कवनो उल्टा सीधा मजाक हो गईल चाहे कवनो उल्टा सीधा मतलब निकल गइल तऽ अलग झमेला. का करस, बड़ा सोच बूझ के ऊपूरा पढ़ीं…