एह जुग में केकर बा कवनो भरोसा !

– गुरविन्दर सिंह राह घाट लउके ना, छपलस अन्हरिया झिमिर झिमिर बरसेले करिया बदरिया! खेतवा में मकई के गाड़ल मचानी सूतल बा जाके बलमु अभिमानी निनिया उड़ावेले चिन्ता फिकिरिया! डर…

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