– पाण्डेय हरिराम

भारत सरकार देश में भइल ताजा जनगणना के अंतरिम रपट जारी कर दिहले बिया आ ओह आंकड़न में कई गो निमन संकेत बावे जवन हमनी के देश के विकास आ निमन भविष्य का ओरि इशारा करत बा. हमनी के देश के आबादी बढ़ल बा, माने कि मानव संसाधन में इजाफा भइल बा आ पढ़ल लिखल लोग के गिनतीओ बढ़ल बा. एहसे लागत बा कि खुशहाली के नया नया राह खुले वाला बा. अलग बात बा कि बढ़त आबादी से कई मोर्चा पर थोड़ बहुत दिक्कत बढ़ सकेला बाकिर अगर ओकरा साथे शिक्षा आ हुनरो के विकास होत ना त अइसन आबादी बढ़ियो फल देबेले.

एही आंकड़न में एगो खतरनाक संकेतो सामने आइल बा आ अगर एकरा के रोकल ना गइल त ओकर परिणाम बहुते अनिष्टकर हो सकेला, दुखदायी हो सकेला. ई तथ्य बा आबादी में छह साल से कम उमिर के लड़िकियन के घटत संख्या अनुपात. ई देखावत बा कि हमनी के समाज संस्थागत तौर पर विफल हो रहल बा आ ई एगो समाज का रूप में हमनी के सोच के दिवालियापन के सबूतो बा. लड़िकियन के अनुपात घट के हर हजार लड़िकन पर 914 लड़िकियन के रहि गइल बा. आजादी का बाद से ई सबले कम अनुपात वाला आंकड़ा बा. वइसे त आबादी में लडिकियन के अनुपात त साल इकसठे से घट रहल बा बाकिर अबकी हालात खतरनाक स्तर तक चहुँप गइल बा. पिछला जनगणना 1991 में ई अनुपात हर हजार लड़िकन पर 985 लड़िकियन के रहे जवन जनगणना 2001 में घटके 927 हो गइल आ घटते घटत अबकी बारी जनगणना 2011 में ई 914 हो गइल बा. एकरा के खतरनाक एहसे कहल जा रहल बा कि पिछला दस साल से कन्या भ्रूण हत्या के रोके खातिर बहुत कोशिश कइल जा रहल बा. भ्रूण लिंग निर्णय भा लिंग चयन का खिलाफ कड़ेर कानून बनल बा आ लोग में एह बारे में चेतना जगावे खातिर बहुते प्रयास कइल गइल बा. बाकिर आंकड़ा बतावत बा कि ई सगरी प्रयास निष्फल रहल बा. सगरी कोशिश बेकार हो गइल बा. हिमाचल प्रदेश , गुजरात , तमिलनाडु, अंडमान अउर निकोबार द्वीप समूह, हरियाणा आ पंजाब के छोड़ देश के सगरी राज्यन आ केन्द्र शासित राज्यन में ई अनुपात गिरल बा. हालांकि पंजाब आ हरियाणा में ई अनुपात अबहियो बहुत असंतुलित बा. एकर मतलब साफ बा कि हमनी के सरकार आ समाज के चैतन्य कहाये वाला जमात में ई संदेश फलदायक नइखे बन पावल कि कन्या भ्रूण हत्या चाहे जवना विधि भा तरीका से होखे शिशु कन्या के मौत हत्या जइसन जघन्य अपराध ह. शहर, कस्बा अउर गांवन में गर्भस्थ शिशु के लिंग जाने के, जांच करे वाला क्लीनिक सभ धड़ल्ले से चलत बाड़ी सँ आ कानूनी प्रावधानन का बावजूद ओकनी के कुछ नइखे हो पावत. एह रवैया के रोके भा ओकरा के घटावे खातिर बहुते कड़ेत सियासी इच्छाशक्ति के जरूरत बा. कानून कुछ नइखे कर सकल. हालांकि कानून एक खास तरह के सामाजिक वर्जना के प्रतीक त बड़ले बा. आबादी में बच्चियन के घटत अनुपात लड़िकियन आ आगा चल के औरतन का साथे हो रहल खराब भेदभाव के सूचक बा. एह हालात के बदले खातिर जरुरी बा कि समाज के सोच आ रवैया में बदलाव ले आइल जाव. एकरा खातिर कानून आ सामाजिक आंदोलन के जरुरत बा. अगर अबहियो ना चेतल गइल त देवी पूजा करे वालन के ई देश मातृहंता बदनाम देश में बदल जाई.



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी.

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