– पाण्डेय हरिराम


संसद में आ कहीं त भारत में मुख्य विपक्षी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी अबहियो राजनीतिक प्रचार के पुरनका तरीकन से सटल बिया. भाजपा के 84 साल उमिर वाला नेता लाल कृष्ण आडवाणी के रथयात्रा का एलान से त इहे लागत बा कि ऊ अबहियो नेपथ्य में रहि के संगठन के संचालन सम्हारल नइखन चाहत आ नाही इहे चाहत बाड़न कि नवका लोग मंच पर आके नेतृत्व करसु. आडवाणी फिलहाल संसदीय विपक्ष के सबले कद्दावर नेता हउवें आ भठियरपन का मुद्दा पर देश में जतना आक्रोश देखल जात बा , ओकरा के ध्यान में राखत उनुका एह कदम के नैतिक औचित्य त समुझ में आवत बा. लेकिन जहां ले मामिला एकरा राजनीतिक औचित्य के बा त ओहिजा सवाले सवाल भरल पड़ल बा. देश के आम आदमी खातिर एह प्रस्तावित यात्रा से जुड़ल सबले बड़ चिंता इहे होखी कि लगभग अपने आप उभरल भठियरपन विरोधी एह चेतना के कतहीं कवनो झटका त ना लागी.

जन लोकपाल विधेयक खातिर चलत जवन आंदोलन एह चेतना के असल आवाज बनल बा, ओकर स्वरूप अबही ले अराजनीतिक रहल बा. कवनो एक पार्टी के एकरा के भँजावे आगा आइल लोग के एकरा बारे में अनसाहट पैदा कर सकेला. उहो तब, जब संबंधित पार्टी – बीजेपी – के कई राज्य सरकारनो पर भठियरपन में सनइला के भा एकरा पर नरम रवैया अपनावे के आरोप मीडिया में छवले होखे. दोसर खतरा एह रथयात्रा के असर में भठियरपन विरोधी पूरा आन्दोलने के सांप्रदायिक रंग दे दिहल गइला के बा. अक्टूबर 1990 आ नवंबर – दिसंबर 1992 के महीना इतिहास में भलही इकईस आ उनईस साल पीछे छूट गइल होखे बाकिर लालकृष्ण आडवाणी के ख्याति आ यादगार आजुओ उनुका एही दुनु यात्रा के लेके बा. एकरा बाद ऊ चार गो अउरियो यात्रा पर निकलले, ई बाति लोगन के अब याद नइखे.

ई सही बा कि आडवाणी के ऊ दुनु राम रथयात्रा उनुका के देश में अउर खुद उनुका पार्टीओ में कमोबेश अटल बिहारी वाजपेयी के कद के नेता बना दिहलसि, लेकिन दोसरा तरफ बीजेपी के दर्जा विपक्ष के सबले सुसंगत पार्टी से घटाके गरम सांप्रदायिक नारन के सियासत करे वाली पार्टी जइसन बना दिहलो में सबले बड़हन भूमिका इनकरे रहल. ई एगो विडंबने बा कि भठियरपन का मुद्दा पर खुद के बहुते घेराइल देखत कांग्रेस आडवाणी के यात्रा-एलान के स्वागत कइले बिया. एह सियासी सरकँवासी के अहसास विपक्ष के सबले कद्दावर नेता के समय रहते हो जाये के चाहीं.

चाहे हम आडवाणी आ भाजपा के विरोधी होंखी भा समर्थक, एह कदम के सही रणनीतिक गर्जना मानही के होई. वइसहू आधुनिक राजनीतिक इतिहास में यात्रा अउर आडवाणी एक दोसरा के पर्याय हो गइल बाड़े. आडवाणी के ई पांचवीं अखिल भारतीय रथयात्रा होई. एकर परिणाम का निकली से त कहल फिलहाल कठिन बा, लेकिन जनता के बीच जाके दलीय राजनीतिक संघर्ष के ई एगो सही कदम बा. अलग बाति बा कि भाजपा में राजनीतिक संघर्ष करे के माद्दा त छोड़ीं, अइसन सोचो राखेवालन के कमी हो गइल बा. अइसनका पार्टी के राजनीतिक भविष्य का होई एकर अंदाजा आसानी से लगावल जा सकेला. आखिर आडवाणी कहिया ले ताल ठोंके खातिर बनल रहीहें ?
(12 सितम्बर 2011)


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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