का अरुंधति राजद्रोह के दोषी बाड़ी ?

– पाण्डेय हरिराम

का अरुंधति राजद्रोह के दोषी बाड़ी ? का मशहूर लेखिका आ समाजसेविका अरुंधति राय अपना भाषण आ काम काज से जम्मू कश्मीर के आंदोलनकारियन से सहानुभूति देखाके आ ओकनी के आंदोलन के समर्थन देके कुछ अइसन काम कइले बाड़ी जवना से उनका पर राष्ट्रद्रोह के मामिला बन सकेला ?

अगर सरल परिभाषा के बात करीं भा सहज जानकारी के बात करीं त कह सकीलें कि राष्ट्रद्रोह (सीडेशन) के अर्थ होला सत्ता के खिलाफ विद्रोह आ राष्ट्र से विश्वासघात करे के मतलब होला राष्ट्र के सम्प्रभुता से आपन नाता तूड़ल. एकरा के अइसहूं कह सकीलें कि “सीडेशन” अपना देशवासियन के सत्ता के खिलाफ भड़कावल हऽ आ “ट्रीजन” देश के खिलाफ लागल लोगन के चुपा चोरी सहायता चहुँपावल. जहां तक अरुंधति राय के बाति बा त ऊ घाटी में विद्रोह भा अपघात भा आतंकवाद के शुरूआत नइखी कइले.

अरुंधति बस अतने कइले बाड़ी कि घाटी में फैलत असंतोष पर ध्यान दिहली, ओकर विश्लेषण कइली आ फेर जे लोग ओहिजा हथियार उठवले बा ओह लोग से सहानुभूति देखवले बाड़ी. एहसे उनका खिलाफ देशद्रोह के मामला साबित कइल शायद मुश्किल होखी. अरुंधति के एह ताजा अभियान के मुकाबिला कश्मीर आ देश का दोसरा हिस्सन में जनता के विचार में बदलाव ले आ के करे के होखी, ना कि ओह लोग के गिरफ्तार कर के आ मामिला चला के. उनका खिलाफ कठोर कार्यवाही से बचे के होखी.

बाकिर कश्मीरियन के दुख दूर करे वाला नुस्खा बतावे वाली बेहद चालाक औरत अरुंधति से एगो सवाल बा कि का कश्मीर मतांतरित ना भइल रहीत, हिंदू भा बौद्धे बनल रहीत त का आजु कश्मीर के समस्या होखित ?

हँ, कश्मीर में समस्या त होखित. रोजगार आ गरीबी के, अशिक्षा आ ना‍विकास के, जइसनका बाकी के हिन्दुस्तानो में बा, बाकिर कवनो कश्मीर-समस्या न होखित. राजनीति जब ईश्वर-अल्लाह के नाम पर चले लागेले त जाहिर बा कि ऊ हमनी के आजु के समस्या के समाधान ना करे देव.

का मजहब पाकिस्तान के सगरी समस्यन के समाधान कर दिहले बा ?
ना, काहे कि मजहब त जिंदगी के बाद के रास्ता बनावेला.

हमनी के मालूम बा कि कश्मीर के अलगाववादी आंदोलन के असलियत का बा ? अगर कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे में चल जाइत त उहे सब कुछ पाकिस्तानी भू-स्वामी वर्ग आ पाकिस्तानी सेना ओहिजो करीत जइसन कबाइली सन 1947 में शुरु कइले रहलें. अरुंधति के शायद मालूम होखी कि हुर्रियत के बिलाल गनी लोन सकार लिहले बाड़न कि ई सब पइसा पर बिकाइल कायरन के जमात हऽ. पाकिस्तान के अन्त कवना तरह होखी एकर अन्दाजा लागे लागल बा. कश्मीर के आपन आखिरी उम्मीद मानके ऊ कवनो तरह बतकहियन के दौर शुरु करावल चाहत बा. पाकिस्तान से बतियवला के मतलब ओकरा आतंकी आ साजिशी स्वरूप के मान्यता दिहल होखी. अरुंधति अगर इतिहास पढ़ले होखिहन त शायद उनका याद होखी कि आजादी के आंदोलन के अंतिम दौर में कश्मीर के लेके ब्रिटिश सोच बदल चुकल रहे. आ इहे समस्या के कारण बनल. माउंटबेटन उत्तरी कश्मीर के रणनीतिक महत्व समुझत रहलें. ऊ सब कुछ जानत बूझत सेना के उड़ी से डोमेल, मुजफ्फराबाद का ओर बढ़े ना दिहलें. ऊ चाजत रहलें कि गिलगिट बालतिस्तान के इलाका पाकिस्ताने का कब्जा में रहे, जवना से कि आगे चलके सीटो, सेंटो संगठन ओकर उपयोग सैनिक अड्डन खातिर कर सकस. कश्मीर के मामिला संयुक्त राष्ट्र में ले जाए का प्रस्ताव में उनकर खास भूमिका रहे.
शेख अब्दुल्ला जनमत संग्रह का पक्ष में ना रहले, बाकिर जनमत संग्रह के प्रस्ताव कश्मीर के एगो अइसन “ओपेन एंडेड स्कीम” बना दिहलसि जवना में केहू कहियो निवेश कर सकेला. कश्मीर के एह नकली समस्यन का चलते ओहिजा के जवन असल समस्या शिक्षा, रोजगार, आ विकास के रहुवे, पाछा छूट गइल. एह जहालत के माहौल उनका के राष्ट्रीय नागरिक ना बने दिहलसि. हमनी का मजगर देश हईं जा बाकिर कमजोरन का तरह बरताव करीलें. गठबन्हन से आ रहल सत्ता हमनी के कमजोरी के मूल स्रोत बन गइल बा.

एहिजा हम अरुंधति से पूछल चाहब कि कश्मीर समस्या आखिर ह का ? का जवन समस्या कश्मीर के बा उहे जम्मूओ के बा ?का लद्दाखो उहे सोचला जवन घाटी के हुर्रियत नेता चाहेलें ? जवन बात जम्मू खातिर कवनो समस्या नइखे ऊ कश्मीर घाटी के चालीस लाख लोगन खातिर समस्या काहे बा ? अरुंधति के मालूम होखल चाहीं कि ई आजादी के लड़ाई हइये ना हऽ. ई त असल में एगो मनोवैज्ञानिक समस्या हऽ.. हिंदू भारत का साथ रहे के.

अरुंधति जइसन लोगन के साजिश का चलते ऊ हमनी के 15 करोड़ मुसलमानन से अपना के अलग समुझेलें. कश्मीर घाटी के बाशिन्दन के अलगाववादी मानसिकता का हवाले कर दिहल बा. ई मनोविज्ञान जनमत संग्रह के अनायासे सकरला से पैदा भइल बा. जबकि इतिहास में कतहीं आ कबहियों वोट डाल के राष्ट्रीयता पर फैसला नइखे भइल.

मनोवैज्ञानिक समस्यन के इलाज आपरेशन ना होला ना ही गिरफ्तारी होले. बरियार राष्ट्र का तरह बरताव कइल हमनी के सीखे के बा. युद्ध होखहीं के बा त होई बाकिर ओकरा अनेसा से कमजोरन का तरह बरताव कइल हमनी के समाधान का ओर ना ले जाले. अरुंधति जइसन दू कौड़ी के लोगन के एह देश पर भारी पडला से रोके के होखी आ सियासत एकर इलाज ना ह.


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.