– डॉ॰ उमेशजी ओझा

police-parade
आज पुरा देश शहीद दिवस मना रहल बा. सभ राज्य अपना-अपना राज्य के शहीद के श्रद्वांजलि देत शहीदन के ईयाद करत बा. आज हमरा मन में एगो सवाल उठत बा कि आखिर वर्दी पहिनते एगो पुलिस कर्मी के खुद के आदमी होखे के अधिकार खतम हो जाला? हमनी के एह वर्दी वाला इंसान के मानवाधिकार के पक्ष में काहे ना आपन आवाज बुलन्द करत बानी जा. हमनी के वर्दी वाला इंसान के हित खातिर लड़ाई काहे नइखी जा खुलेआम बनावत. अगर राष्ट्र के हर आदमी अपने आपके एक सिपाही मानलेव त हमरा देश से आतंकवाद आ आतंकवादियन के जड से सफाया हो सकत बा.

का वर्दी पहिनते आदमी होखे के नियम खाली पुलिसे बल प होला. गरीबन के घर, अपराधियन के जेल में मूलभूत सुविधा ई नारा बा नेता आ मानवाधिकार के रखवारी करे वाले संगठन के. बाकिर पुलिस वाला थाना आ चौकियन प कवना अवस्था में रहेलन एकरा के जाने के केहु आज तकले कोशिश ना कइल. हमनी के रक्षा करे वाला इंसान कवन अवस्था में अपने के रखले बाड़न, उनकर मानसिक हालत का होई ना त नेता जाने के कोशिश करेलन आ ना ही हमार मनावता के लड़ाई लड़े वाला संगठन. बस लोगन के दिमाग में अइसन सोच बइठ गइल बा कि पहिला हाली पुलिसे गलत होले आ ओकरा प्रति केकरो कवनो प्रकार के सहानुभूति ना होला.

पुलिस के सिपाही जवन रात-दिन जनता के सुरक्षा मे आपन डियूटी प तैनात रहेला. जब कवनो लाश में कीड़ा पड़ जाला त बदबू से बेहाल होकर ओकर सगे संबंधी पीछे हट जालन तब ओह लाश के इहे पुलिस के सिपाही टमटम भा रिक्शा में राखि के लाशघर तक ले जालन. आपन तेवहार आ खुशियन का तेयाग के समाज के सेवा में तत्पर रहेवाला सिपाही जनता के नजर में अच्छा ना हो पावेला.

बाकिर ई हमनी के दुर्भाग्य बा कि आजु हमनीके नवजवानन के, देश के बजाय देश के क्रिकेट टीम के जादा चिन्ता बा. बाकी देश मे का चलत बा कवना भाग में आतंकवाद फयलल बा वोहिजा कतना सिपाही देश के नाम प कुर्बान हो गइले ओह से कवनो सरोकार नइखे. जेकर नतीजा बा कि देश में आतंकवादी कवनो जगह प कवनों समय में आपन योजना के अंजाम दे देत बाड़न.

आजु जरूरत बा हमनी के स्वयं अपने आपके देश के सिपाही समझ के कर्मठता से काम करेके. आईं हमनियों का ओह सब अमर शहीद के सलामी दिहीं जा.

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