– पाण्डेय हरिराम

शनिचर का दिने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहलें कि घोटाला करे वालन के बख्शल ना जाई. बाकिर अबले ऊ ई नइखन बतवले कि ओह दोषियन का खिलाफ कवन कार्रवाई हो रहल बा.

मंगलवार का दिने नियंत्रक आ महालेखा परीक्षक (सीएजी) के रिपोर्ट संसद का पटल पर रखइला का बाद से साफ हो गइल कि मामिला ओहसे कहीं बेसी गंभीर आ चिन्ता करे लायक बा जतना बुझात रहे. एह घोटाला के कथित नायक पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा अपना पद से इस्तीफा दे दिहले बाड़न बाकिर एहसे जुर्म भा सरकार के कर्तव्य के इतिश्री नइखे हो जात. अबही हाल में प्रधानमंत्री इहो कहले कि उनुका रोजे इम्तिहान देबे पड़ेला. प्रधानमंत्री के ई दुनु जुमला एक दूसरा के विरोधी बा.

का ई साँच बा कि डा॰ सिंह के कड़ा इम्तिहान देबे पड़ रहल बा ? का देश के सबसे बड़ एह पद पर उनुकर 6-7 साल अतना पीड़ादायक रहल बा कि उनुका लागत बा कि अपना मन का खिलाफ एक के बाद एक परीक्षा के दौर से गुजरे के पड़त बा ? यदि साँचहू अइसने बा त मामिला बहुते गंभीर बा.

ई साँच ह कि प्रधानमंत्री के पद कँटवहा ताज हऽ. एकरा के हमेशा पहिनले रहे के पड़ेला जवन कि कष्ट वाला काम ह. देश चलावल वइसहूं आसान ना होला. आ ई त गठबन्हन के सरकार ह. आजुकाल्हु इहो चरचा में बा कि मनमोहन सिंह के हमेशा आ हर फैसला खातिर सोनिया गाँधी पर निर्भर रहे के पड़त बा. राहुलो गाँधी ताकत के एगो केन्द्र बाड़े. बाकिर ई सब बलकुले साँ् ना ह.

बात राजा घोटाले में विवादास्पद प्रधानमंत्री कार्यालये से शुरू कइल जाव. प्रधान सचिव टी के नायर के नियुक्ति से ले के उनुका सेवा काल में बढ़ोतरी पूरा तरह से प्रधानमंत्री के इच्छा का चलते भइल आ ऊ प्रधानमंत्री के आंख-कान का तरह के सहयोगी हउवें. कारपोरेट घरानन के प्रमुखन से लेके मंत्रियन आ विरोधियन से नायर के निरंतर संपर्क आ सिफारिशन में 10 जनपथ के कवनो दखलन्दाजी ना होला. निश्चित रूप से पृथ्वीराज चव्हाण (मुख्यमंत्री बने से पहिले ले), अहमद पटेल, प्रणव मुखर्जी आ ए के एंटनी जइसन नेता अध्यक्ष सोनिया से प्रधानमंत्री के राय के तार जोड़वावे में समय-समय पर सहयोग करत रहेलें.

सरकार आ संगठन के वरिष्ठ सहयोगियन के कहना बा कि ए. राजा के संचार मंत्रालय भा एम एस गिल के खेल मंत्रालय देबे के अंतिम निर्णय प्रधानेमंत्री कइले रहलें.

बाकिर एह बाति के तवज्जो दिहला के जरुरत नइखे. महत्वपूर्ण ई देखल बा कि ऊ आपन पहिलका पारी आ दुसरका पारी के लगभग दू बरीस देश के सरकार कवना तरह चलवलें, एह पर लोगन के राय का बा. ई तय बा कि ऊ देश का इतिहास में सबले कमजोर, निर्णय लेबे में अक्षम, आ परावलंबी प्रधानमंत्री का रूप में जानल जालें. अइसना में उनुकर निजी पीड़ा कबो ना कबो त बाहर आवहीं के रहे. जवना राजा प्रकरण में डॉ सिंह अइसन बयान दे डललें जवना के कबो उमेद ना रहे, ओकरा से उनुका पर हावी दबावन के पता चलत बा. उनका कार्यकाल में भ्रष्टाचार बेहिसाब बढ़ल आ ऊ ईमानदार रहला का बावजूद कवनो कड़ेर कार्रवाई केहू का खिलाफ ना कर पवलें. एह चलते जनता रिसियाइल त बिया बाकिर ओकरा में लाचारगी के भाव बेसी रहल.

अब त ई समये बताई कि प्रधानमंत्री जी अगिला कदम का उठइहें ? इहो तय बा कि ऊ दोषियन के कवनो सजा ना दिआ पइहें. अब उनका सोझा दोसर राह ई बा कि अपना पद से इस्तीफा दे के खुद अपने के दंडित करस भा मध्यावढ़ि चुनाव के सिफारिश करस. बाकिर इहो दुनु काम उनका से होखे से रहल !


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.

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