– पाण्डेय हरिराम

कई बेर बेसी बक-बक करे वाला लोफर किस्म के नेतवो अनजानही में सही बात बोल जाले. जइसे कि पिछला दिने अण्णा हजारे के मखौल उड़ावत कांग्रेस के ‘बयान पुरूष’ दिग्विजय सिंह कह दिहले कि अनशन करत-करत अण्णा हजारे के हालत कहीं ‘नत्था’ वाली मत हो जाव. ‘नत्था’ एगो हिंदी फिलिम के अनशनकारी किरदार हवे.

अण्णा भ्रष्टाचार मेटावे के बात करेले आ उनुका साथे कुछ नामी-गिरामी पांच गो अक्लमंद लोग (बाइबिल के फाइव वाइज मैन का तरह) बाड़े. अन्ना के बढ़िया से मालूम बा कि अनशन पर बईठ के भा आंदोलन करके भ्रष्टाचार खतम नइखे होखे जा रहल. भ्रष्टाचार विरोधी दोसरो संगठन वाला ई सब गैरसियासी तरीका से भ्रष्टाचार दूर कइल चाहत बाड़े. ई लोग बेर बेर कहत बा कि इनकर आंदोलन कवनो नेता भा पार्टी का खिलाफ नइखे. माने कि ई लोग सियासत से दूर रहि के भ्रष्टाचार मेटावे आ व्यवस्था में बदलाव करे के सोचत बाड़े.

लेकिन, एह सबसे कुछ होखे वाला नइखे. काहे कि भ्रष्टाचार होखे भा व्यवस्था के खामी, सगरी कुछ राजनीतिए का चलते बावे. गइल गुजरल राजनीति का चलते आम आदमी परेशान रहऽता, गंदली राजनीतिए भ्रष्टाचार के जड़ ह, त फेर राजनीति से फरका रहि के ई सब कइसे ठीक कइल जा सकेला ?कवनो दिक्कत के जबले जड़ से ना खतम कइल जाई तबले ओकरा फेर से पनप जाये के अनेसा बनले रही आ ऊ अउरी विकराल रूप धरत चलि जाई. जवन दिक्कत भ्रष्ट आ गंदली राजनीति के देन बा ओकरा के राजनीति में सुधार करिये के ठीक कइल जा सकेला. राजनीतिए सगरी दिक्कतन के हल बा.

अब अण्णा के आंदोलने के देख लीं. पूरा देश आंदोलन का समर्थन में बा, सभे चाहत बा कि मजगर लोकपाल बिल बनो. आंदोलने के देखके सरकारो जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी बनावे खातिर मान गइल. बाकिर भइल का ? गैरसियासी जमात पर सियासत फेरू भारी पड़ल. अब दू गो ड्राफ्ट कैबिनेट का लगे भेजे के बाति कहल जा रहल बा. अण्णा के कहना बा कि सरकार उनुका साथे धोखा कइलसि. अब जब दू गो ड्राफ्ट कैबिनेट में जाई, माने कि पॉलिटिकल लोगन का लगे, त ऊ त फेर अपना फायदे वाला ड्राफ्ट के चुनीहे. त का फायदा भइल आंदोलन से ? अण्णा 16 अगस्त से फेर अनशन पर बइठियो जासु आ फेर पूरा देश उनुकर साथ देइयो देव त का हो जाई ? इहे कहानी फेरु दोहरावल जाई. जब ले सियासत आ सत्ता भठियारन का लगे बा तबले इहे होखे के बा.

अण्णा भा अण्णा जइसन लोग आंदोलन करके आपन कुछ बात मनवा त सकेले लेकिन भठीयारा नेतवन के ना सुधार सकसु. ऊ ना सुधरीहे सँ त सियासत ना सुधरी आ सियासत ना सुधरल त व्यवस्था नइखे सुधरे वाला. अगर साचहू अण्णा आ हमनी सभ व्यवस्था बदलल चाहत बानी त या त या त जनता आंदोलन कर के तख्ता पलट देव ना त सियासत से भठियारन के नामोनिशान मेटा देव. अगर सियासत में नीमन लोग आवे लागल त ओह लोग के सुधारे के जरूरते ना पड़ी आ ना ही आंदोलन करे के. एहसे अगर साँचहू में बढ़िया व्यवस्था चाहीं त राजनीति से घबरइला के जरूरत नइखे बलुक राजनीति में घुसके ओकरा के साफ करे के जरूरत बा. जरूरत एकर बा कि भठियारन के राजनीति से बेदखल कइल जाव आ नीमन लोग ओह जगहा काबिज हो जाव. खाली वोट दिहला से कुछ ना होई. काहे कि वोट लेबे जवन लोग अइहें उहो भ्रष्टे होइहें. जब जनता साथ दे दी त व्यवस्था में बदलाव होके रही आ भठियरपन का खिलाफ अलगा से लड़ाई लड़े के जरूरत ना पड़ी.



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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