Prabhakar Pandey

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”

का? का कहतारऽ तूँ? ओसामा मार देहल गइल? अमेरिका ओकरी घर में घुसी के मरलसि ह? हे भगवान? बतावऽ न…..ई त अच्छा ना भइल. आपन देस महान बा. अमेरीका से त बहुते महान बा. छमा बीरन के गहना ह. हमनीजान बीरन की गनना में आवेनीजाँ. देखऽ न, इतिहास गवाह बा…..हमनीजान सदा से अपनी दुस्मन के छमा करत आवतानी जाँ. हाँ भाई, ई आपन मजबूरी नइखे, ई त आपन महानता बा. 26/11 भुला गइल का? का कइलस आपन सरकार? अरे एतने ना, भारत पर केतने आतंकी हमला भइल. भारत की संस्कृति पर हमला भइल. संसद पर हमला भइल. पर का कइलसि आपन सरकार? खाली बड़ी-बड़ी बात. अउर हम भारतीयन के ए ही बातन में उलझा के राखि देहलसि.

कब भारत सरकार चेती? कब ओकरा खातिर भारत, भारतीय अउर भारतीयता सर्वोपरि होई? कब भारतीय नेता ओट की राजनीति से ऊपर उठि के भारत की बारे में सोंचिहें? कब? आखिर कब? अरे कसाब क बारे में जवन देस अबहिन निर्णय नइखे ले पावत, ओके आपन.(दामाद)…बना के रखले बा…काहे खातिर..? .खालि ओट अउर अपनी कुर्सी खातिर. हम भारतीयन के बड़-बड़ बाति क के बहका रहल बा. अंतराष्ट्रीय दबाव के बात क रहल बा. बता रहल बा कि ई सब एतना आसान ना होला.

अब भारत के अमेरीका से बहुत कुछ सीखले के ताक बा. बाति कम काम जेयादे कइले के ताक बा. पर एकरा खातिर सबसे जरूरी बा पहिले भ्रष्टाचार के अंत. अगर भारतीय-तंत्र से भ्रष्टाचार मिटि जाई ओइ दिने सरकारो में बहुत शक्ति आ जाई अउर हम इ बात सीना ठोंकि के कहतानि की ओई दिन…हाँ ओई दिन.. पाकिस्तान का, अगर अमरीको में कवनो आतंकवादी, माँ भारती के दुश्मन छुपल रही त खाली एगो भारतीय सैनिक ओके दउरा के मारी, घिसिरा के मारी, लताड़ि के मारी, पानी पिया-पिया के मारी….एतना मारी…एतना मारी….की सपनो में केहू भारत माई की ओर आँखि उठा के देखले के जुर्रत ना करी. पर एकरा खातिर ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ बनावे के जरूरत बा. पहिले अपना के सुधरले के ताक बा…..अगर हमनीजान, भारतीय तंत्र (सासन-तंत्र) सुधरि गइल त ओई दिन भारते ना पूरा संसार से आतंकवाद जइसन कैंसर के सफाया अपनी आपे हो जाई. फेन से माई भारती समृद्ध हो जाई. हर घर में खुशी आ जाई. केहू भूखा ना मरी. गरीबी दुम दबा के भागि जाई.

खैर हम त अमरीकी सरकार के कायल हो गइल बानी. हम त अमरीकी सरकार के सलाम ठोंक रहल बानी जवन आखिरकार अपनी देस की जनता के दुख देवेवाला से बदला लेइए लेहलसि. दउड़ा के मरलसि, ओकरी घर में पदा के मरलसि, खुलेआम मरलसि.

सलाम, सलाम, सलाम….अमेरीकी सरकार..तूझे सलाम.

बस अब एतने कहबि….पूरा भारतीयन के कमर कसि लेहले के ताक बा अउर देस की गद्दारन अउर दुश्मनन के छठि के दुध इयादि करा देहले के ताक बा. हमनीजान की रगन में शिवा, प्रताप, लछ्मीबाई, भगत सिंह, आजाद, तिलक, हमीद जइसन भारत माई की लालन के खून दउड़ता. पर एकरा खातिर हमनीजान के जातिवाद, प्रांतवाद, भाई-भतीजावाद जइसन रोगन से उपर उठि के भारत क कल्यान में एकजुट होखे के परी. भ्रष्टाचार क खात्मा खातिर खालि कसमे ना लेबे के परी बलुक कमरो कसे के परी. अगर माई भारती समृद्ध हो जाई त ओकर लइका त ओहीगाँ समृद्ध हो जइहेंसन.

जय हिंद.

ना हमनीजाँ हिंदू हईं, ना मुलसमान, ना सिख ना इसाई, हमनीजाँ हईंजाँ भारतवासी अउर माँ भारती आपन माई.

जय हिंद ! जय भारत ! भारत माता की जय!

-प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”


हिंदी अधिकारी
सीडैक, पुणे
ई-पत्र- prabhakargopalpuriya@gmail.com
मोबाइल- 09022127182/09892448922

9 thought on “बहुत भइल…अब त जागऽ भारत माई के ललनवा”
  1. Bhai Pandit ji
    Sadar namskar

    JAvan bharta pahile rahal uh bhart desh aab kaha ba o bhart o ah bhart me bahut antar ba va bhart me log aapani desh khatir ladhat rahe or ah bhart me log kursi khatir ladhat ba

    t ah bharat me kursi khatir karano galati karab ta chhma mila jai

    kahe se kursiye ta sab ba

    ihe karan ba ki atana aatanki hamala bhaile ke bado bharat pakistan par kavano tos kadam na uatha pavalas lekin aamerika ke ah ak kadm ke dekh ke bharat ke char kadam chale ke chahi taki pakistano ke bhita pata chale ki bharat ka chij ha

    sumit

  2. प्रभाकर जी!
    अपने देश के माटी के यी सबसे बड़ी बिशेषता ह क्षमा कईल लेकिन ईहे कबो कबो यी माटी खातिर श्राप हो जाला | येही से यी माटी के प्रत्येक लाल के यी सोचेके पड़ी की कहाँ क्षमा करेकेबा और कहाँ दंड देवेकेबा | जबले यी ज्ञान नाई आई तबले देश के कल्याण संभव नहीं दीखता|
    और सबसे बड़ी बात जेकर चर्चा नाई होला उ ह परिवार के संस्कार | जबले अपन परिवार संस्कारित नाई होई तबले भ्रष्टाचार या कौनो प्रकार के कुरीति यी देश के नष्ट नाई हो सकेला ! अत: सबसे जरुरी चीज बा परिवार और उकार संस्कार जौन यी समाज और देश के इकाई है |
    आपके यी पोस्ट के लिए आपके बधाई |
    डॉ रत्नेश त्रिपाठी

  3. bahut badhia prabhakar ji jawan desh ke aguaa aapana mantriaan ke kartut par khali tali bajawe me mudra me dikhai dew o desh me kasab , afjal guru , ke puchh hokhabe kari ego sabd ba jawana ke gawn me kahal jala bakir iha ham na kahem kahe ke ki desh ke ijjat chal jai .

कुछ त कहीं...

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