– ‍हरिराम पाण्डेय

बिहार के चुनावी घमासान तेज होखल जात बा. एह चुनाव में जीते खातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगे एक से एक व्यूह बा. अबे हालही में ऊ जंगलराज के एगो शिगूफा छोड़ले रहलन आ अब बिहार के विकास के जाल पसारत बाड़ें. बिहार के बढ़न्ती ला पीएम सवा लाख करोड़ के फंड देबे के एलान कइले बाड़न. ई धन पहिलही से चलत बिहार के परियोजनन ला दीहल 44 हजार करोड़ से फरका बा.

NaMO-NiKuअब देखे जोग बा कि प्रधानमंत्री जी के ई दानशीलता ओतने नाटकीय बा जतना सुने में लागत बा कि कुछ अलगा बा. सबले खास बात बा कि एकरा ला कवनो समय सीमा तय नइखे. इहो नइखन कहले कि रुपिया एही साल से आइल शुरु हो जाई कि चुनाव का बाद आई. काहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरा में कहलन कि दिल्ली समुझे में टाइम लाग गइल. एक-एक चीज़ के बारीकी से पता कइला का बाद ई ऐलान भइल बा. अपना भाषण में प्रधानमंत्री बिहार पर दिल खोल के खजाना लुटावत रहले. उनुका बोले के अंदाज से लागत रहुवे कि कवनो राज्य के धन दीहल केन्द्र के बँवारा हाथ के खेल ह.

पीएम कहलन कि पिछलका सरकार बिहार खातिर 12,000 करोड़ के पैकेज दिहले रहुवे जवना में से 8282 करोड़ रुपिया अबहीं ले खरचा नइखे हो पावल. राष्ट्रीय राजमार्ग बनावे में 12,000 करोड़ के काम चलत बा. बांका में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के बिजली के कारखाना लागे वाला बा 20 हज़ार करोड़ में. इहो जोड़ के एक लाख पैंसठ हजार करोड़ हो जात बा.

ओने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार कहत जात बाड़ें कि बिहार के स्पेशल पैकेज ना स्पेशल दर्जा चाहीं. स्पेशल दर्जा आ स्पेशल पैकेज में का फरक होला एकरा के राजनीतिक विद्वान बांचत रहीहें बाकिर जिनका मंच लूटे के रहल से त लूट ले गइलें. जनता के एगो फाइनल फिगर मिल गइल बा. चौक चौराहा पर लोग सेक्टर के आधार पर हिसाब ना लगाई. ओह लोग के त बस एक लाख पैंसठ हज़ार करोड़ लउकी आ सुनाई.

हमहन में से बहुते लोग जे बिहार के हालात से दिलचस्पी राखेलें उनुका याद होई कि एही साल जनवरी में केंद्र आ बिहार सरकार एगो समझौता पत्र पर दस्तखत कइले रहलें कि पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय में बदल दीहल जाई. एकरा ला मार्च 2017 तकले 400 करोड़ के आर्थिक मदद दीहल जाई. जून 2015 में कैबिनेट बोधगया में आईआईएम बनावे के प्रस्‍ताव मंज़ूर कइलस. अतने ना मजा के बात कि अगर एह साल के बजट देखल जाव आ प्रधानमंत्री के ऐलान से मिलावल जाय त एगो अजबे बात नजर आई. प्रधानमंत्री कहलन कि बिहार के ग्रामीण सड़कन ला 13,820 करोड़ रुपिया दीहल जाई जबकि बजट में सगरी देश के ग्रामीण सड़कन ला कुल प्रावधान बा 14291 करोड़ के. एहमें से 1155 करोड़ नॉर्थ ईस्ट अउर सिक्किम ला बा. बाकी बचल 13,136 करोड़ रुपिया सगरी देश ला बा त रउरे बताईं कि बिहार के कइसे मिल गइल 13,820 करोड़!

मोदी सरकार जवना 14वां वित्त आयोग के सुझाव सकरले बावे ओकरा हिसाब से केंद्रीय कर के 42 फीसदी हिस्सा राज्यन के दीहल जाई.. बाकिर एकर भरपाई केंद्रीय वित्त मंत्री केंद्रीय योजनन के बजट काट के कर लिहलन. 14वां वित्त आयोग 11 गो कमज़ोर राज्यन ला ग्रांट के बात कइले बा. एकरा हिसाब से जम्मू कश्मीर के 2019 से 20 ले 1,94,821 करोड़ मिले वाला बा. त बिहार के एक लाख पैंसठ हज़ार करोड़ कतना बरीस में मिली.

नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के भाषा शैली पर एतराज़ जतावत कहलन कि बिहार सरकार अलगा-अलगा सेक्टरन के बढ़न्ती ला 2 लाख करोड़ के पैकेज मंगले रहुवे बाकिर 12वां पंचवर्षीय योजना में महज 12000 करोड़े मिलल. जवना से कुछ काम भइल आ जवन रुपिया बाचल बा ओकरे के प्रधानमंत्री अपना एलान में शामिल कर लिहले बाड़न. नीतीश कुमार के दावा बा कि प्रधानमंत्री के ऐलान में के अनेके योजना पहिले से मंजूर बाड़ी सँ आ कुछ पहिलहीं से केंद्रीय योजनन में चलत आइल बाड़ी सँ. खेती खातिर बिहार 41,587 करोड़ मंगलस, मिलल बा 3094 करोड़. कौशल विकास ला 12580 करोड़ मांगल गइल आ मिलल 1550 करोड़. शिक्षा ला 1000 करोड़ मिलल बा आ एहसे का हो पाई.

नीतीश के कहना बा कि ई त ओइसने भइल जइसन लोकसभा चुनाव का दौरान कहाइल रहे कि सभका 15 से 20 लाख रुपिया मिली. जइसन हालात बा ओकरा से लागत नइखे कि रुपिया भेंटाए वाला बा बाकिर चुनावी जंग बहुते तिक्खर होखी एकर गारंटी बा.
(20 अगस्त 2015)
लेखक हरीराम पाण्डेय के ब्लाग खोजखबर से साभार.

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