– पाण्डेय हरिराम


जिनगी माई के अँचरा के गाँठ जइसन होले. गाँठ खुलत जाले. कवनो में से दुख त कवनो में से सुख निकल आवेला.

हमनी का अपना दुख में भा सुख में भुलाइल रहीले. ना त माई के अँचरा याद रहेला ना ओह गाँठ के खोल के माई के चवन्नी भा अठन्नी दिहल.

याद ना रह जाव माई के थपकी. चोट लगला पर महतारी का आँखिन से झरझर बहत लोर. कॉलेज से भा काम पर से लवटला पर बिना पूछले उहे बनावल जवन हमरा पसंद होखे. जाये घरी पराठा, चूड़ा, नमकीन आ ना जाने कतना पैकेटन में आपन याद निचोड़ के डाल दिहल.

याद रहेला त बस बूढ़ बाप महतारी के चिड़चिड़ाइल. उनुका दवाईयन के बिल, उनुकर बिमारी, उनुकर झिड़कल आ हर बात बेबात पर बेजाँय लागे वाली उनुकर सलाह !

याद नइखे पिछला बेर कब माई के फोन कइले रहीं. ओकर फोन आइल रहे त काम में रहला का चलता काट दिहले रहीं कि अबहीं बिजी बानी बाद में फोन करतानी. ऊ इंतजारे करत रह गइल आ थाक हार के सूत गइल मोबाइल स्क्रीन के देखतदेखत. ओकरा पइसा के जरुरत रहुवे. पइसा रहलो रहे बाकिर बैंक से निकाले के फुरसत ना रहल.

भुला गइल रहे कि दसेक साल पहिले हर चउथी तारीख के पापा नियम से पइसा दे देत रहलन. शायदे कबो कहे के पड़ल होखी कि माई पइसा ना मिलल.

शादी हो गइल. बच्चो हो गइले सँ. नयकि गाड़ी आ नयका फ्लैट खरीदे के चिंता लागल बा. बॉस के खुश करे के बा. दोस्तन के पार्टी देबे के बा. मेहरारू के ले के छुट्टी में गोवा जाये के बा.

बाबूजी माई कई बेर कह चुकल लोग कि वैष्णौ देवी जाये के चाहत बानी जा बाकिर फुरसत कहाँ बा. काम त बहाना बा. समय बा बाकिर के माई के साथे मूड़ी खपावे. अँउजिया देबेले नसीहत दे दे के.

बाबूजी अतना सवाल करेले कि पूछऽ मत. के अतना जबाब देव. सुबह देर ले सूतल मुश्किल हो जाले. अपनही घर में लुकात फिरऽ.
ना जाने हम कतना सवाल पूछले होखब माई बाबूजी से. अब बेटी पूछत रहेले दादा दादी से. लेकिन शायदे कबहू डाँट के जबाब मिलल होखो ओकरा.

लेकिन हमरा लगे ओह लोग के देबे खातिर कुछ नइखे. हमरा बटुआ में बस झूठ भरल बा. खीस बा… उखड़ल मन बा… आपन बनावटी अँउजाहट बा. उनुका गाँठ में आजुवो सुख बा दुख बा आ हम खोले जाईं त हमरा खातिर आशीर्वादे मिली हमेशा दोसर कुछ ना.

आजु मदर्स डे हऽ… बरीस बरीस पर एको बार मदर्से डे का नाम पर सही, माई के अँचरा के गाँठ खोले के जरुरत सभका होखे के चाहीं.



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी.

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