हिन्दी अखबार “नई दुनिया” अबही हाल में अन्ना हजारे आ नाना जी देशमुख के एक साथ के फ़ोटो छापि के जवन “पत्रकारीय कमाल” कइले बा ओह पर चैनलन में जवन बहस चलल बा ओह पर माथा पीट लेबे के मन करऽता आ एहिजे काटजू के यादो आ गइल बा. काटजू पिछला दिने कहले रहले कि आजु के पत्रकारन के इतिहास भा अर्थशास्त्रो ना आवे. हालांकि हज़ार दू हज़ार रुपिया पर काम करे वाला पत्रकारन से अर्थशास्त्र भा इतिहास के जानकार होखला के उम्मीद कइलो टकलन का शहर में ककही बेचल बा.

लेकिन नई दुनिया के संपादक आलोक मेहता भा उनुकर संवाददाता भा ई चैनलन पर बहस के बँड़ेरा उठावे वाला पत्रकारन आ राजनीतिज्ञन से ई उम्मीद त कइले जा सकेला कि ऊ लोग इहे सब कुछ ना कुछ अउरियो जानसु. अफ़सोस कि ऊ लोग ना जानसु. जानत रहितन त कम से कम नाना जी देशमुख जइसन निर्विवाद मनई के, समाजसेवी आदमी के ले के ई आ अइसने छिछला टिप्पणी करे से ज़रुर बचित लोग. आ फेर आलोक मेहता त मनोहर श्याम जोशी, कन्हैयालाल नंदन अउर राजेंद्र माथुर जइसन पत्रकारन का साथ काम कर के अपना के एहिजा ले चहुँपवले बाड़े. लेकिन राज्यसभा में पहुंचे के उनुकर ललक, हड़बड़ी आ महत्वाकांक्षा उनुका के पत्रकारीय परंपरा से दूर कर दिहले बा आ ऊ कमोबेस कांग्रेस के अघोषित प्रवक्ता का तरह काम करे लागल बाड़े. याद करीं जब कुछ समय पहिले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कुछ संपादकन से मुलाकात कइले रहलन त बहरी आ के ई संपादक लोग चैनलन पर जवना बेहयाई से प्रधानमंत्री के पक्ष राखे खातिर एक दोसरा के पानी पिआवत रहले कि पूरा देश लाज से आँख मूंद लिहले रहुवे. आलोको मेहता ओहि संपादकन में से एगो रहले जे प्रधानमंत्री अउर कांग्रेस के प्रवक्ता बन के उभरल रहले.

अबहियों जब कबो रउरा कवनो चैनल पर आलोक मेहता के देखीं त बतौर पत्रकार ऊ कांग्रेस के एकतरफा पैरोकारी करत लउकीहें. चलीं करीं. कवनो हरज नइखे. रउरा ई सूट करऽता. तमाम लोगन के पछाड़त रउरा पद्मश्री मांग के पाइये चुकल बानी. राज्योसभा में देरसबेर चहुँपिये जाएब. लेकिन एह खातिर दूधे में पानी मिलाईं, पानी में दूध मत मिलाईं. आपन ना सही कुछ पत्रकारीय मूल्यन के परवाह कर लीहिं. कुछ त मनोहर श्याम जोशी, कन्हैयालाल नंदन आ राजेंद्र माथुर के लाज राखीं. नाना जी देशमुख रहल होखीहें कबो जनसंघ भा आरएसएसो में. रहल होईहें मोरार जी देसाई के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री. लेकिन जब जेपी मूवमेंट में जेपी पर पुलिस के लाठी गिरल त ऊ ननेजी देशमुख रहलें जे आ आगा बढ़ि के कवनो फ़ौजी का तरह जेपी के कवर कइलन आ सगरी लाठी के चोट खुद खईलन. जेपी के एकहु लाठी लागे ना दिहलन. लोग त पीठ भा गोड़ पर पुलिस के लाठी खाला, नाना जी जेपी के अपना पीठ के नीचे लेत सीना पर पुलिस के लाठी झेलले रहले.ऊ फ़ोटो अखबारों में छपल रहे. इंडियन एक्सप्रेस एकरा के तब पहिला पेज पर छपले रहुवे. हमरा निकहा याद बा. सोचीं कि पुलिस के ऊ लाठी अगर जेपी पर पड़ल रहीत त का भइल रहीत जेपी के आ का भइल रहीत देश के ?

नाना जी जेपी का साथही जेल गइले. बाद का दिन में जनता पार्टी बनल. मोरार जी देसाई के सरकार बनल त ऊ मंत्री बन गइले. लेकिन जब दुहरी सदस्यता का फेर में मोरार जी के सरकार गिरल त नानाजी सक्रिय राजनीति तज के समाज सेवा का ओर मुड़ गइले. ऊ महाराष्ट्र के रहे वाला रहले लेकिन समाज सेवा खातिर उत्तर प्रदेश चुनले. उत्तरो प्रदेश में सबले पिछडा ज़िला गोंडा. ओहिजो ऊ महात्मा गांधी का तर्ज़ पर जेपी के पत्नी प्रभावती का नाम पर प्रभावती ग्रामे बनवले. ठीक वइसही जइसे गांधी दक्षिण अफ़्रीका में टालस्टाय आश्रम भा देश में वर्धा भा साबरमती आश्रम बनवले रहले. बलुक नानाजी त दू डेग आगा जा के एह आश्रम के शिक्षा आ रोजगार से जोड़ दिहले. लेकिन जल्सिये ऊ चित्रकूट चल गइले. आजु नानाजी देशमुख नइखन बाकिर धृतराष्ट्र जइसन जनमते आन्हरो अगर चित्रकूट चलि जाव त ओकरा उनुकर काम साफे लउकी, सुनाई दी. ओहिजा के लोग, खास करि के आदिवासियन के बचवन खातिर प्राइमरी से लगायत स्नातकोत्तर तक के शिक्षा, भोजन आ चिकित्सा मुफ़्त बावे. कम से कम तीस साल से. अतने ना ओहिजा के लोग के ऊ रोजगार कइलो सिखावत रहलें कि कइसे काम सीख के खुद के रोजगार शुरू कर सकसु. तरह तरह के रोजगार. तमाम पिछड़ापन का बावजूद चित्रकूट आजु तरक्की का राह पर बा. ना सिरिफ तरक्कीए बलुक शांति का राहो पर. ना त तय मानीं कि अगर नानाजी देशमुख चित्रकूट ना गइल रहते त आजु का तारीख में चित्रकूट दंतेवाडा से अधिका खतरनाक मोड़ पर खड़ा मिलीत.

चित्रकूट का हऽ पथरीला इलाका ह. जहां आजुओ खेती भगवान भरोसे होले. पानी के साधन आजुओ नइखे खेत के पटवन खातिर. ज़मींदारन के आतंक एतना कि घर से बेटी-बहन कब उठा ले जा सँ आ फेर कबो वापिस ना देव. बाप के नाम चाहे कवनो आदिवासी के हो, संतान त ऊ कवनो ज़मींदारे के होखे. आ ई बेचारी आदिवासी औरत दू जून के भोजन खातिर अपना पति के पास लवटे के तइयार ना होखऽ सँ. दू जून के भोजन का बदले वह देह आ मेहनत बेच द सँ. हम खुद गइल बानी चित्रकूट आ पूरा इलाका घूमल बानी. लवटि के एगो रिपोर्ट लिखले रहीं जवना अखबार में एगो पूरा पेज में छपल रहे – “अवैध संबंधों की आग में दहकता पाठा”. अइसने अत्याचारन से ददुआ जइसन लोग पैदा होत रहे. बाद का दिनन में त खैर ददुआ खुदे एगो बड़हन आतंक बन चलल रहुवे कि लोगन के जियल दूभर हो गइल रहे. एक तरह से ददुआ आ ददुए जइसन लोगन के शासन चलत रहे ओहिजा. सरकार आ प्रशासन ओहिजा नामे खातिर रहे. वहां नाम भर के थे. एगो आईएएस अफ़सर हउवे, आजु काल्हु एगो जिला में ज़िलाधिकारी बाड़े. तब ऊ चित्रकूट इलाका में एसडीएम रहले. अगो मंदिर के कार्यक्रम रहे. एसडीएम मुख्य अतिथि रहले. मय फ़ोर्स के ऊ ओहिजा मौजूद रहले कि तबहिये ददुआ आइल. मंदिर में पूजा अर्चना कइलसि आ लवटति में एसडीएमो के गोड़ छू के दक्षिणा स्वरुप उनुका के पइसो दिहलसि. ऊ चुपचाप खड़ा रहले. मिलल दक्षिणा ऊ तुरते मंदिर के दान कर दिहले लेकिन ददुआ के अरेस्ट ना कर पवले. जबकि ओकरा पर तमाम मुकदमे रहुवे, वारंट रहुवे. हम उनुका से पूछली कि अरेस्ट काहे ना कइनी ? त ऊ कहले, ‘हमरा साथे फ़ोर्स बहुते कम रहे आ सगरी जनता ओकर जयकारा लगावत रहुवे, ओकरा साथे रह. का करतीं हम भला ?

अइसना में नानाजी देशमुख चित्रकूट चहुँपले आ चित्रकूट के नक्शा बदल दिहले. रहल होई कबो चित्रकूट राम के वनगमन के पहिला पड़ाव, रहल होइहें कबो तुलसीओदास. लिखले होइहें कि चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसैं तिलक देत रघुवीर. लेकिन अब नानाजी देशमुख चित्रकूट पर विकास, रोजगार आ शांति के जवन चंदन लगा गइले, ना ऊ कवनो कांग्रेसी, कवनो जनसंघी, कवनो भाजपाई, कवनो आरएसएस भा कम्युनिस्ट भा कवनो फ़ासिस्ट के वश के बा, नाही जे केहु ओहके मेटा देव. काहे कि चित्रकूट के सगरी धमनी में नानाजी जवन शिक्षा, रोजगार, विकास आ शांति के पाठ लिखा दिहले बाड़न, ऊ मिटे वाला नइखे. नानाजी जब जियत रहले तब उनुका से मिले चित्रकूट के ना चहुंपल रहे ? उनुका काम से, उनुका सेवा से प्रभावित सबहीं चहुँपत रहे. पार्टियन के दूरी ओहिजा बिला जात रहे. प्रधानमंत्री रहल चंद्रशेखर, नारायणदत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव जइसन राजनीतिज्ञ जब तब चहुँपते रहले उनुका से भेंट करे. आ सिरिफ भेंटे ना करे लोग गोहार लगावे कि नानाजी ओहिलोग का इलाका में चलिके कुछ अइसने काम कर देसु. त का ई चंद्रशेखर, ई नारायणदत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव आरएसएस के एजेंट रहले ? आ कि बाड़े ? फ़ोटो त दिग्विजयो सिंह के नानाजी देशमुख का साथे देखल गइल बा लेकिन कबो खुर्राट राजनेता रहल दिग्विजय अब घाघ आ बेहाया नेता बन गइल बाड़न. आ दिक्कत ई कि जब नाना के बात चलल अन्ना के नाम का साथे, त चंद्रशेखर त अब नइखन रहते त हम जानत बाजी कि ऊ बेबाकी से नानाजी देशमुख का पक्ष में खड़ा लउकते कि कम से कम उनुका के त अइसन मत कहीं. दुर्भाग्य से मुलायम वगैरह राजनीतिज्ञन में अबहीं उ उदारता नइखे आ पवले आ एह राजनीतिज्ञन में जवन कबो कभार उदारता लउकेले ओह उदारतो का नीचे जवन क्रूरता लुकाइल होले ओकरा के के देख पावेला भला ? आ जे देखियो पावेला त ओकर बयानो के कर पावेला भला ? पर अबही एह ब्यौरा में जाए के समय शायद नइखे आइल.

खैर, तब नानाजी देशमुख का लगे जाए वालन में सिर्फ़ राजनीतिजज्ञे ना तमाम उद्योगपति आ पत्रकारो वगैरह रहलेल उहाँ के कामे अइसन कइले बानी. ढेरहन संस्थान त खोललही बानी चित्रकूट में बाकिर एहु में एगो अउरी गजब के काम कइले बानी नानाजी. टाटा का मदद से एगो आयुर्वेद शोध संस्थान खोल गइल बानी जवन अपना आप में अजगुत बा. दुनिया मे अपना तरह के अकेला. तमाम तरह के जडी बूटियन समेत आयुर्वेद के तमाम ज़रुरी चीजो आहिजा सम्हारल गइल बा. बहुते बड़हन इलाका में पसरल एह आयुर्वेदिक संस्थान में सौ से अधिका नस्ल के त सिर्फ़ देशी गाय बाड़ी सँ. पूरा एगो गऊशाला बा. देखिके आंख चुंधिया जाले. आ मजा ई कि ई आ अइसन तमाम काम खातिर जे लोग अकसरहाँ पइसा के रोना रोवत रहेला, नानाजी के कबो ई सब ना करे के पड़ल. हम उनुका से साल १९९६ में चित्रकूट में मिलल रहली. तब एगो लमहर इंटरव्यूओ कइले रही. बहुते सारा बाति भइल रहे. हम उनुका से पूछनी कि एह कामन खातिर कबो पइसा के कमी ना पड़े ? नानाजी छूटते कहनी कि कबो ना. बतवली कि ऊ कबो केहु से पइसा माँगहु ना जानी. जेकरा देबे के होला से खुदे चलिके चित्रकूट आवेला. कई बेर त लोग के पइसा वापिस करे के पड़ जाला. हम अपना काम से अधिका पइसा राखीं ना. वापिस कर दिहिले. तमाम उद्योगपति हमरा लगे आवेले पइसा ले के. लेकिन योजना हम खुद बनाइल. केहु के बनावल योजना पर काम ना करी. योजना में जतना पइसा लागे के होला बता दिहिले. लोग दे देला. काम शुरू हो जाला. समय से हो जाला. हम एहिजा कवनो बिजनेस त करत नइखीं कि बहुते सारा पइसा चाहत होखे.

हम उहाँ से पूछनी कि का रउरा ई ना लाते कि अगर रउरा सत्तो में होखतीं भा सक्रिय राजनीतिए में त अउरी बेहतर काम करतीं ? नानाजी कहनी, बिलकुल ना. सत्ता भा राजनीति में रहिके कुछऊ ना कइल जा सके. आ जो करबो करब त दाग जरूरे लाग जाई. फेर बतावे लगनी कि हमनी के समाज वनवासी राम के पूजेला, राजा राम के ना. राजा राम त कईगो फ़ैसला एने-ओने के कइलन. खराब लागे वाला फैसला कइलन बाकिर वनवासी राम ना कइले. वनवासी राम समाज के कल्याण कइले. राक्षस मरले. एहीसे हम सत्ता से, राजनीति से अलगा हो गइनी. हम चित्रकूट के चुननी समाज सेवा खातिर. एहसे ना कि राम के वनवास यहीजे शुरु भइल रहे. एहसे कि एहिजा हमार ज़रुरत रहुवे. हमहु वनवासी हो गइनी. ऊहाँ का तमाम योजना बतवनी आ कहनी कि समय नइखे अब हमरा लगे, ना त अउरियो बहुत काम करतीं. ऊ तमाम राजनीतिज्ञन के ज़िक्र करत बतवनी कि ऊ लोग चाहेला कि हम उनुको इलाका में जा के काम करीं. त हम पूछनी कि जाइलें काहे ना ? त कहनी कि अब बुढ़ा गइल बानी. काम करे के जतना बेंबत बा ओतने करब. आ हम काम शुरू करि के चलि आईं आ केहु गड़बड़ करि देव हमरा बर्दाश्त ना होखे. ई समाज सेवा ह, कवनो उद्योग व्यवसाय ना कि गोड़ पसारत जाईं, पइसा कमात जाई. ओह घरी उहाँ का कुछ कम सुनत रहनी, ठीक से चललो फिरल मुश्किल रहे. बाकिर हम देखनी कि जब भोजन के समय भइल त ऊ सभका साथही फर्श पर बइठनी खाना खाए. आ खइला का बाद आपन थरिया खुदे उठवनी आ जा के धो के रख दिहनी. सबही ओइसने कइल.

हम बाते बात में पूछनी कि रउरा इ ना लागे कि अगर बिआह कइले रहतीं त जिनिगी अउरी बेहतर भइल रहीत. नानाजी बेझिझक बतवनी कि हँ, हमरो अब ई लागऽता कि ई गलती भइल. अगर बिआह कइले रहतीं त ज़रुरे बढ़िया भइल रहीत. शायद काम करे के ऊर्जा अउरी होखीत. बाकिर का करीं, बिआह करे के जब उमिर रहे तब ई सब सोचे के समय ना मिलल. लेकिन अब ई बाति अखरेला. इहे बाति एकबेर हम अटल बिहारी वाजपेयीओ से पूछले रहीं त ऊ पहिले टालमटोल पर अइले आ आखिर में कहले कि अब जब ना कइनी त का कहीं. फेर कहे लगनी कि जब समय रहे विआह के तब देश सामने रहल, अबहियो बा. अब का कहीं ? फेर कहे लगनी कि ई त ऊ लड्डू ह जो खाय वो भी पछताय, जो न खाए वह भी पछताए. आ हँसे लगले. इहे सवाल एक बेर लता मंगेशकर पूछनी तब ऊ पहिले त टार दिहनी आ फेर बाद में कहनी कि समय कहां मिलल जे अपना बिआह का बारे में सोचतीं. फेर उमिर निकल गइल. बाकिर हँ एहला मन में कवनो पछतावा नइखे. बाकिर नानाजी के रहल.

नानाजी देशमुख से हमार आखिरी भेंट दिल्ली में भइल साल दू हज़ार में. जेपी के जन्म शताब्दी के तईयारी रहे. लोग अलगा-अलगा मनावत रहे. नाना एह सबसे नाखुश रहले. गांधी शांति प्रतिष्ठान के लोगो तइयारी कइले रहे आ रोष जतवले रहे कि नानाजीओ के एकर चिंता नइखे. नानाजी के हम ई बाति बतवनी त ऊ क्षुब्ध हो गइले. कहलन कि जेपी खातिर हमरा केहु के सर्टिफिकेट ना चाहीं. उनुका पर चलल लाठी हम अड़ले बानी. उनुका काम के हम आगा बढ़वले बानी. हम एही से संतुष्ट बानी. हमरा जेपी खातिर जवन करे के होई कर लेब. उहाँ के कइबो कइनी. बाकिर आजु ओहि जेपी के लोग नाना का साथे अन्ना का फ़ोटो पर कांग्रेसियन के सुर में सुर मिलावत बा. कवनो एको राजनीतिज्ञ भा पत्रकार नाना के निष्कलंक जीवन आ उनुका सामाजिक काम के चरचा नइखे करत. कुछ लोग या त बोलत बा या कुछ लोग चुप्पी साध गइल बा. गोया कि नाना कवनो पेशेवर चोर रहल होखसु आ अन्ना उनुका साथे फ़ोटो खिंचवा के कवनो बहुते बड़ गुनाह कर दिहले होखसु.

अन्ना हजारे, कांग्रेस अउर लोकपाल के एह बहस में बा केहु नाना जी देशमुख के सामाजिक सरोकार के चमक के बखान करे वाला ? साँच त ई बा कि अगर नानाजी देशमुख जइसन दसो लोग देश में समाजसेवी हो जासु त तय मानीं कि देश के दशा सुधर जाई. समाज बदल जाई. अबहीं त लोग फ़िल्म, क्रिकेट अऊर राजनीति आ धरमे के लोग के सेलीब्रेटी मान बइठल बा. ई अइसे नइखे कि आजु के पीढ़ी नइखे जानत नानाजी देशमुख के. नइखे जानत बाबा आम्टे के, सुंदरलाल बहुगुणा भा बाबा राघव दास जइसन लोगन के. सोचीं कि एक समय रहे जब लोग कहीं जा के काम कर लेत रहुवे. अब तो महाराष्ट्र में जा के बिहार आ उत्तर प्रदेश के लोग पीटल जात बा. लेकिन एगो समय उहो रहे जब महाराष्ट्र के लोग उत्तर प्रदेश में आ के एक से एक अनूठा काम कइल. बाबा राघव दास एक समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांधी कहल जात रहले. लेकिन कतना लोग जानत बा कि ऊ पूर्वी उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र से आइल रहले. नानाजी देशमुखो महाराष्ट्रे से उत्तर प्रदेश में अइलन. मधुकर दीघे महाराष्ट्रे से गोरखपुर आइल रहले. समाज सेवा खातिर. मज़दूरन खातिर काम करत करत ऊ राजनीति में आ गइले. लोहिया का साथ काम करे लगले. जेपी मूवमेंट में जेल गइलन. १९७७ में उत्तर प्रदेश के जनता सरकार में वित्त मंत्री बनले. मेघालय के राज्यपालो भइलन. बाद में समाजवादी पार्टी में आ गइलन. छोड़ीं, हनुमान प्रसाद पोद्दार त बंगाल से गोरखपुर आइल रहले. गांधी आंदोलन में कूद गइले. गीता प्रेस जइसन संस्था दे दिहले. लेकिन कतना लोग इ सब जानत बा ?

हँ सनी लियोन, वीना मलिक, शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर वगैरह के ज़रुर जानत बा. आ सोचीं कि हमनी के संसदीय राजनीतिओ कहां चल गइल ? उत्तर प्रदेश में लमहर समय ले संसदीय कार्य मंत्री रहल बेनी प्रसद वर्मा के अंदाज़ त देखीं. ऊ अन्ना के कहत बाड़े कि बुढ़वा यूपी में आ के देख लेव. फेर कहत बाड़े कि ऊ सेना के भगोड़ा ह. दिग्विजय सिंह त दस बरीस ले मुख्यमंत्री रहलन मध्य प्रदेश के लेकिन उनुकर भाषा आ अंदाजो देख लीं. लालू त अपमा अहंकार का ईनार में कूद के लोकपाल के फ़ांसी घर बताइये दिहले बाड़न. मनीष तिवारी अन्ना के कवना संबोधित कर चुकल बाड़े हमनी सब जानत बानी. त का इहे सेलीब्रेटी हउवन हमनी के ? नानाजी देशमुख जइसन लोग चोर ह ? ई कवन समाज आ राजनीति हमनी का देखत बानी ? लोकपाल आ अन्ना के बहस में नानाजी देशमुख जइसन फकीर के असली चेहरो देखल का जरूरी नइखे ? साँच मानी, बहुते जरूरी बा.


लेखक परिचय

अपना कहानी आ उपन्यासन का मार्फत लगातार चरचा में रहे वाला दयानंद पांडेय के जन्म ३० जनवरी १९५८ के गोरखपुर जिला के बेदौली गाँव में भइल रहे. हिन्दी में एम॰ए॰ कइला से पहिलही ऊ पत्रकारिता में आ गइले. ३३ साल हो गइल बा उनका पत्रकारिता करत, उनकर उपन्यास आ कहानियन के करीब पंद्रह गो किताब प्रकाशित हो चुकल बा. एह उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं” खातिर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान उनका के प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित कइले बा आ “एक जीनियस की विवादास्पद मौत” खातिर यशपाल सम्मान से.

दयानंद पांडेय जी के संपर्क सूत्र
5/7, डाली बाग, आफिसर्स कॉलोनी, लखनऊ.
मोबाइल नं॰ 09335233424, 09415130127
e-mail : dayanand.pandey@yahoo.com

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