नई दिल्ली में साहित्य अकादेमी का सभागार रवीन्द्र भवन में भोजपुरी के मशहूर लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी के लिखल आलोचना के किताब के विमोचन पुरनिया लिखनिहार आ साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष रह चुकल आचार्य विश्वनाथ तिवारी जी का हाथे कइल गइल.

एह मौका पर भइल बतकही में मशहूर कथाकारनी डॉ अल्पना मिश्र, समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक आ साहित्य अकादेमी के सदस्य डॉ ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दूबे, अउऱ विचारक लेखक डॉ सुशील कुमार तिवारी समेत कई लोग शामिल भइल.

कवि कथाकार आ भोजपुरी दिशाबोध के पत्रिका पाती के संपादक डॉ अशोक द्विवेदी के एह किताब के मुकम्मल आलोचना आ विमर्श के किताब बतावत आचार्य विश्वनाथ तिवारी भोजपुरी भाषा के शोधकर्मियन ला एह किताब के बहुते काम लायक बतवनी.

डॉ द्विवेदी के बहुआयामी रचनाशीलता आ संवेदनियता के रेघरियावत डॉ अल्पना मिश्र उनुका के सर्जक आलोचक के नाम दिहली.

ब्रजेन्द्र त्रिपाठी तीन खंड वाली एह किताब के काव्यशास्त्रीय नजरिया से पोढ़ आ भोजपुरी साहित्य के विकास यात्रा से रुबरु करावे वाला बतवलन.

भोजपुरी भाषा ला लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी के चालीसन बरीस के कीमती अवदान के रेघरियावत अजीत दूबे कहलन कि भोजपुरी लेखन के समहर रुप देखे ला एह किताब के पुरहर योगदान रहे वाला बा.

बतकही के संचालन डॉ सुशील तिवारी कइलन.

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