सोचत बानी कि लोग कहत होखी कि ई अनेरे अतना बतकुच्चन कइले रहेला. जरुरे अनेरिया आदमी होखी जेकरा लगे दोसर कवनो काम नइखे. बाकिर का बताई कि अनेरिया होखल नीमन, अनेरिया होखल ना. अब रउरा पूछब कि अनेरिया आ अनेरिया में का फरक होला ? उहे जवन “कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय, ये खाए बउराय नर, वो पाये बउराय” में होला. एक अनेरिया ऊ जवन अनेरे एने से ओने बउरात रहेला, दोसरे ऊ जे अपना अनेर से लोग के बउरवले रहेला. अब देखीं, कइसे एगो नुक्ता के हेर फेर से खुदा जुदा हो गइले. अनेरे आ अनेर में फरक बा. अनेरे मतलब बिना कारण, बिना मतलब. आ अनेर ऊ जे अन्हेर होला, अत्याचार होला, गलत होला. त एक अनेरिया ऊ जे अपना घोटाला से अनेर कर के राखि देला, दोसर अनेरिया ऊ जे एह अनेरिया का चलते अपना अनेरियोपन में काम के बहाना खोज लेला. रउरे बताईं कि कवन अनेरिया नीमन.

अब नीमन से एगो भोजपुरी कहावत याद आ गइल, “नीमना घरे नेवता दिहल”. मतलब कि एगो नीमन उहो होला जे नीमन ना होखे बाकिर ओकरा के बाउर कहे के हिम्मत केहू में ना होला. अब वइसनका आगि के केहू खोर देव त इहे नू कहल जाई कि नीमना घरे नेवता दिहले बाड़ऽ, अब झँउसा ओकरा लहोक में. अब फेर सोचत बानी कि नेवतो त दू तरह के होला. एगो ऊ जे केहू के बोलावे खातिर नेवतल जाला, दोसर ऊ जे केहू के नेवतला पर ओकरा किहाँ चहुँप के नेवता का रुप में दिहल जाला. त अब जब नीमन घरे नेवता देइये दिहलऽ त ऊ अब नेवता पुरावे अइबे करी तोहरो घरे. अब ओकर नेवता पुरावल तोहरा खातिर पूरा पड़ जाव त अलगा बाति बा. देखतानी कि एह बतकुच्चन का फेर में हमार एगो नेवता छूटल जात बा, चलत बानी. फेर भेंट होई.

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