परुआ बैल के हेहव के आसा (बतकुच्चन 166)

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परुआ बैल के हेहव के आसा

एह पर तनी रुक के चरचा होखी कि परुआ कि पड़ुआ. अबहीं मान के चलल जाव कि परुआ बैल ओह बैल के कहल जाला जवन काम का बेरा थउस के बइठ जाव. ओकरा बस बहाना खोजे के रहेला बइठे के. आ परुआ खाली बैले ना होले सँ आदमियो में परुआ खूब होले. सोचीं कि कवनो कठिन विषय के इम्तिहान एन मौका पर टार दिहल जाव त विद्यार्थियन के कतना खुशी होला. जानत रहेलें कि आजु ना काल्हु इम्तिहनवा द देबही के बा बाकिर पल भर के चैन मिलल त खुश हो जाले. बहुत कमे मिलिहें जे एह समय के इस्तेमाल विषय के तइयारी में लगइहें. हमरो जब तब बतकुच्चन लिखे से राहत मिलेला त ओइसने खुशी होला. ई कबो ना होखे कि एक कड़ी लिख के राख दीं बाद में कबो काम आवे ला. पिछलो बेर इहे भइल जब विज्ञापन विभाग का कृपा से बतकुच्चन वाला पनवे ना रहल. बाकिर एक हफ्ता के आराम का बाद आजु लिखे के बइठहीं के पड़ल.

परुआ आ पड़ुआ आम बोल चाल में एके मानल जाला. बाकिर चूंकि भईंस के बच्चा पड़रू, पड़वा, भा पाड़ा कहाला से परुआ आ पड़वा के अलग राखल बुद्धिमानी होखी. बात पड़ुआ के चलल त सोचे लगनी के पड़ जाए वाला के पड़ुआ कहाला त लड़ जाए वाला के लड़ुआ भा अड़ जाए वाला के अड़ुआ काहे ना कहाव? बात बात पर लड़े ला तइयार आदमी के लड़ाकू कहल जाला. एह लड़ाकू आ लड़ाका में अन्तर माने के चाहीं. लड़ाका वीर लड़वइया के कहल जाला. उ बात बेबात ना लड़े बाकिर लड़े के पड़ जाव त पीछे ना हटे. ओही तरह अड़े वाला के अड़ियल कहल जाला अड़ाकू भा अड़ुआ ना. सही बात का बा से त पता ना बाकिर शायद एह चलते कि अड़ुआ सुन के अरुआ भरम मत हो जाव. अरुआ बासी के कहल जाला जवन अरुआइल होखे भा अरुआ गइल होखे. अरुआ के बात चलल त अरवा धेयान में आ गइल. अरवा आ उसीना चाउर के दू गो खास प्रकार होला. उसीनल धान से बनल चाउर के उसीना कहल जाला आ धान के वइसहीं कूट के निकालल चाउर के अरवा. उसीना भा उसिनाइल त बहुत कुछ हो सकेला बाकिर अरवा के कवनो दोसर मतलब हमरा खोजले नइखे भेंटात. एकदम से नया के अर्वाचीन जरूर कहल जाला संस्कृत में आ एकर चीन से कवनो संबंध ना होखे ठीक ओही तरह जइसे चीनी के चीन से कवनो लेना देना ना होखे. अलग बाति बा कि चीन के आदमी चीनी कहालें. वइसहीं तेल त कई एक हो सकेले जवना के सवाद करुआ भा कड़ुआ होखे. बाकिर करुआ भा कड़ुआ तेल त बस सरसो के तेल के कहल जाला. भा हो सकेला कि करुआ तेल के नाम ओकरा गंध का चलते पड़ल होखे. सरसो तेल के खास पंजेंट स्मेल होला. अब जइसहु नाम पड़ल होखे एह पर कड़ुआहट पैदा करे के जरूरत नइखे. कड़ुआहट ओह स्थिति के कहल जाला जब विचार भिन्नता का चलते आपस के संबंध में कड़ुआपन आ जाव.

अब जब अतना परुआ करुआ अरुआ के जिक्र हो गइल त भरुआ के काहे छोड़ दिहल जाव. जब रोटी में कुछ अउर भर के पकावल जाला त उ भरुआ कहाला. एह पर याद पड़ल कि भभरी, लिट्टी आ बाटी तीनो में मसालेदार कुछ ना कुछ भरल जाले बाकिर तीनो अलग अलग होला. तवा पर पकावल गइल त भभरी, तेल में पकावल गइल त लिट्टी आ गोईंठा जरा के पकावल गइल त बाटी. अब बाटी के बात चलल त बतवला में कवनो हरज ना होखे के चाहीं कि बलिया के बाटी मशहूर होखला का बावजूद हमरा सवादे ना चढ़ल जइसे कुनरी, करैला भा कुन्दा के सब्जी. आ चलत चलत भरुआ का बहाने भँड़ुओ के बात करत चलीं. भँड़ुआ भँड़ैती करेला बाकिर भाँड़ ना होखे. भाँड़ राजा के गुण गावे वालन के कहात रहे जबकि भँड़ुआ बेसवा के गुण गाए वाला के कहल जाला.

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