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ए सूरदास, घीव पड़ल? कड़कड़ाव तब नू जानी. कारण आ परिणाम के एह उदाहरण में परिणाम से पता चलत बा कारण का बारे में. सूरदास खातिर परिणामे प्रमाण बा कि कारण मौजूद हो गइल. हालांकि केहू के हवा से अगर कवनो गोल के लगातार जीत मिलल जात होखे त कहल मुश्किल हो जाला कि हवा का चलते जीत होखत बा कि जीत का चलते हवा बन गइल बा. काकतालीय न्याय में मान लिहल जाला कि कउवा का बइठला का चलते ताड़फल गिरल जबकि ताड़फल गिरला में कउवा के बइठल महज संजोगे रहे. ऊ कउवा का बइठलो से गिर सकत रहे आ तेज हवा का झोंको से काहे कि फल तइयार हो गइल रहुवे. हाल का चुनावो में इहे काकतालीय न्याय का चलते कहल जात बा कि मोदी के हवा का चलते भाजपा के जीत होखत बा. जबकि कहे के चाहीं कि पिछला सरकार भा इलाकाईयन गोल वाला सरकारन के किचकाहिन का चलते लोग अतना उबिया चुकल रहे कि ऊ लोग बस बहाना खोजत रहे कवनो दोसर नया गोल चुन लेबे के. भाजपा अपना कारण का चलते परिणाम आवत माने त अलग बात बा बाकिर दोसरो गोल अगर माने लागसु त एकर मकसद बस इहे बा कि ऊ लोग आपन गलती, आपन दोस माने ला तइयार नइखे. आ जब ले परिणाम का पीछे के असल कारण ना पहिचानल जाव तब ले दोसर परिणाम खोजलो बेमानी होखी.

अब बेमानी शब्द अचके में उचर गइल त याद आ गइल बेमानी आ बेईमानी के बात. बेमानी के मतलब ओह बात से होला जवना के कवनो माने ना होखे, मकसद ना होखे, जवना से कवनो परिणाम निकले के उमेद ना होखे. जबकि बेईमानी में ईमान के कमी होखेला. ईमान सच सकरला से बनेला. जब ले साँच के आधार ना मिले तब ले ईमान ना बन सके. गलत काम, गलत सोच बेईमानी पैदा करेले. एहसे इहो कहल जा सकेला कि अगर कवनो परिणाम के कारण समुझले बिना दोसरे कारण के कारण मान लिहल जाव त उ बेमानी त होखबे करी बेईमानीओ होखी काहे कि ई साँच पर आधारित ना होखी.

कारण आ परिणाम के बात बतियावत पर धेयान आइल कि परिणामे जइसन शब्द होला परिमाण आ प्रमाण. नाप, माप, तौल से बनेला परिमाण. आ जवना से बात सिद्ध होखत होखे ऊ होला प्रमाण. प्रमाणित आदमी प्रणाम जोग होला. जेकरा सोझा नवल जाव ओकरे के प्रणाम कइल जाला. झुक के कइल अभिवादन प्रणाम होला आ बिना झुकले नमस्कार. प्रणाम आँख झुका के कइल जाला जबकि नमस्कार बिना आँख झुकवलो हो सकेला. ना आँख दिखा के बात होखे ना आँख झुका के. बाकिर आँख मिला के बात करे खातिर अपना में बेंवत पैदा करे के पड़ेला. बिना बेंवत के आदमी आँख मिला के बाते ना कर सके ओकरा आँख चोेरावहीं के होला. आँख चोरावल ओकर नियति बन जाला. आ साँच से मुँह चोरावे वाला लोग भा गोलो के नियति बन जाला आँख चोरा के बात करे के.

लोग आ गोल के तुकबन्दी बनल त धेयान में आइल कि लोगो लोग से बनेला आ गोलो लोगे से. लोग कवनो खास आदमी ना होके अनेके आदमी का बारे में कहल जाला. गोल तबले ना बने जबले ओकरा से लोग ना जुड़ल ना होखे. जब कुछ लोग कवनो खास मकसद से, खास विचार से एक साथे हो जाव त गोल बन जाला. राजनीतिक दल गोल होला बाकिर कुछ दल का बारे में कहल मुश्किल हो जाला कि ओकरा के गोल कहल जाव कि गिरोह. गलत नीयत से बनल गोल के गिरोह कहल जाला. एहसे कवनो एक परिवार का इर्दगिर्द बनल गोल गोल ना होके गिरोहे कहाइल चाहीं. राउर का राय बा? कुछ त रउरो बोलीं.

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