ई देश तरह-तरह के मुख्यमंत्री देख चुकल बा. बाकिर दिल्ली के मुख्यमंत्री के जोड़ खोजल मुश्किल बा. बिहार के लबार मुख्यमंत्री रहल चाराचोर रुपिया जतना कमइले होखसु बाकिर ओकरो इज्जत दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री जइसन नीचे कबो ना गिरल. कई दिन से ई नाकारा नौटंकीबाज मुख्यमंत्री अपना चुनिन्दा मंत्रियन समेतपूरा पढ़ीं…

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समय अइसन खराब हो गइल बा कि बाबा दादा का जमाना से चचल आवत कहाउतो कहे लिखे में डर लागत बा. चैनल का पैनल पर एकाध बेर कुछ गलतो कहि के बाच सकीलें बाकिर अखबार आ छपल सामग्री में ऊ आजादी ना मिले. काहे कि एक बेर लिखा-छपा गइल तपूरा पढ़ीं…

ममता बनर्जी देश के पीएम बने ला पूरा जोर शोर से लागल बाड़ी. अगर सीधे हाथ ना हो पाई त हाथ टेढ़ो करे उनुका आवेला. आ हाथ वालन के एकर पूरा अनुभव बा. हमार उनुका से एके गो निहोरा बा कि हे ममतामयी दीदी, हे जम्हूरियत के देवी, तोहरा राजपूरा पढ़ीं…

लोकतंत्र में लोक के चलेला बाकिर लोक के घोड़ा चलावेला तरह तरह के घुड़सवार मौजूद बाड़ें अपना देश में. केहू का लगे खानदान के नाम बा त केहू जाति आ फिरका का भरोसे अपना लोक के हाँकत आपन लोक-परलोक बनावे-सुधारे में लागल रहेलें. हालही में कर्नाटक का चुनाव में एहपूरा पढ़ीं…

जमूरा, जो पूछेगा बताएगा ? हाँ मालिक. जो बताएगा सो करेगा ? हाँ मालिक. अब पिछला हफ्ता देश में अइसन जमूरन के जगहे-जगह देखल गइल. हर जगहा जमूरा अपना मालिक के हुकुम पर काम करत लउकल. आ लउकीत कइसे ना, ना लउकीत त जमूरा कइसे कहाईत ? बहुत पहिले सेपूरा पढ़ीं…

नामी ज्ञानी आ विचारक लोग बड़हन-बड़हन ग्रन्थ लिख के ओतना ना समुझा पावे जतना एकाध लाइन में ट्रक-बस का पाछे लिखे वाला बरनन कर जाले. आ एही में जोड़ल जा सकेला सोशल मीडिया के ज्ञानियन के. इहो लोग कुछेक लाइन में अतना ज्ञान परोस देला कि लागेला कि अइसनके लोगपूरा पढ़ीं…

हमहीं ना बहुते लोग बस-ट्रक का पीछे लिखल तरह तरह के संदेशन के धेयान से देखेला आ ओहसे जनता के नब्ज धरे के कोशिश करेला. कई बेर बसन पर लिखल ई संदेश पढ़ले बानी कि – लटकले त गइले बेटा ! आजु जब एह पर देश के मौजूदा हालात देखतपूरा पढ़ीं…

गाँव के एगो रंगदार आपन भईंसिया सड़के पर बान्हत रहुवे. आवे जाए वाला लोग ओकरा से परेशान रहलन. आखिर पंचइती बइठल आ कहल गइल कि बाबू तू आपन भईंस कहीं अउर बान्हल करऽ आ रहिया पर से खूंटवा हटा ल. रंगदार कहलसि कि पंचन के फैसला सिर माथे बाकिर खूंटवापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछला हप्ता आपन बतंगड़ अधवे पर छोड़ले रहीं कि अगिला बेर एकरा के पूरा करब. बाकिर आजु के दुनिया में एक हप्ता बहुते लमहर हो जाला. चुनाव बीतते गुजरात के दलित समस्या, हरियाणा के जाट आरक्षण समस्या, पंजाब के नशाखोरी समस्या वइसहीं गायब हो जाला जइसेपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह हर बेर जब बतंगड़ लिखे बइठिलें त मन में कवनो ना कवनो खाका बन चुकल रहेला आ बाति पर बाति निकलत जाले आ बतंगड़ई पूरा हो जाले. बाकिर पता ना काहे आजु मन बेचैन बा. कई बेर श्रीमती जी टोकबो करेली कि का रात दिन कंपूटरवापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह लोकतन्त्र, डेमोक्रेसी, में लोक-लाज ना रहि जाव त ओकरा दैत्यतन्त्र, डेमॉनक्रेसी, बने में देर ना लागे. एहघरी देश के विरोधी गोलन के हरकत देखि के त इहे लागत बा कि अगर एहनी के वश चले त दैत्यतन्त्र हावी होखे में देर ना लागी. संजोग से अबहींपूरा पढ़ीं…