भोजपुरी पंचायत पत्रिका के बहाने भोजपुरी के रोअन धोअन

by | Mar 30, 2013 | 2 comments

BPanchaCoverApril13भोजपुरी पंचायत पत्रिका के अप्रेल अंक प्रकाशित हो गइल बा. एह अंक में चौतरफा फाँस में फसल शीला दीक्षित पर हिंदी में संपादकीय, आस्ट्रेलिया से भइल टेस्ट सिरीज में मिलल जीत पर धोनी के बड़ाई करत डा॰ संजय सिन्हा के हिदी में लेख, भारत के अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल के मारीशस यात्रा पर एगो हिंदी लेख, २० २१ अप्रेल के दिल्ली में होखे जात सातवाँ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अगता जानकारी हिंदी में, लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार आ राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली का बंगला पर भइल होली मिलन समारोह आ द्वारका में भइल महामूर्ख सम्मेलन के खबर हिंदी में, सिद्धेश राय के लिखल आत्मविकास वाला हिंदी लेख “क्रोध एक बड़ा अवगुण है, बचें”, भाई जी भोजपुरिया के दू गो हिंदी कविता आ आदर्श तिवारी के हिंदी कविता, रामाशंकर श्रीवास्तव के लिखल हिंदी व्यंग्य “माला की खुशबू”, भोजपुरी गौरव उमाशंकर सिंह के श्रद्धांजलि समारोह के खबर हिंदी में, भाजपा नेता शाहवाज हुसैन पर प्रभाकर पान्डेय के लिखल कवर स्टोरी आ नीतीश कुमार के दिल्ली रैली पर दिवाकर मणि के लेख हिंदी में, नेहरू युवा केन्द्र के युवा सर्वनाश बतावत दुर्गा चरण पाण्डेय के हिंदी लेख, “भोजपुरी साहित्य के बेताज बदशाह महादेव प्रसाद सिंह घनश्याम” पर लिखल विश्वंभर मिश्रा के हिंदी लेख, रामनवमी का अवसर पर “वर्तमान समय में राम की प्रासंगिकता” शीर्षक केशव मोहन पाण्डेय के हिंदी लेख, सिवान जिला से आइल आकाशदीप के एनएसयूआई के दिल्ली प्रदेश सचिव बनला के खबर हिंदी में, “भोजपुरी के प्रचार प्रसार में समर्पित” भाई जी भोजपुरिया का बारे में राजन सिन्हा के लिखल लेख हिंदी में, संतोष कुमार के लिखल “अपने दम पर बढ़ रही है भोजपुरी” हिंदी में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चिंता के बात बतावत अश्चनि कुमार सिहं के हिंदी लेख, प्रभाकरे पान्डेय के लिखल भूत प्रेत वाली कहानियन में “वह क्यों करना चाहता था एक चुड़ैल से शादी???” नाम के हिंदी कहानी, सत्येन्द्र उपाध्याय के लिखल हिंदी कहानी “अपने, अपने और पराए सपने”, मेनका कुमारी के हिंदी लेख “आखिर प्रेम विवाह सबसे बड़ा अपराध क्यों?”, “नाबालिग को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता” बतावत डा॰ विनोद बब्बर के हिंदी लेख, आचार्य राकेश पान्डेय आ राखी राय के लिखल ग्रह नक्षत्र पर दू गो हिंदी लेख, अमिता सिन्हा के लिखल हिंदी लेख “आठवीं अनुसूची में भौजपुरी आखिर कब?”, फिलिम सिलिम स्तंभ में फिलिमन के खबर, आ मनोज श्रीवास्तव के लिखल हिंदी व्यंग्य रचना “सब्र है कि टूटता नहीं.” सब कुछ शामिल बा.

बावन पेज के एह पत्रिका में सवा चार पेज पर भोजपुरीओ रचना दिहल गइल बा जवना में प्रभाकर पाण्डेय के लिखल कन्या भ्रूण हत्या पर लेख “हमरो के बा जिए के अधिकार ?”, कमल जी मिश्रा के कविता, बतकुच्चन के एगो कड़ी, नीरज कुमार सिहं के कविता, रवि गिरी के लिखल कहानी “अइसन कब होई”, आ भोजपुरी के प्रकाशित साहित्य पर प्रो॰ रविकांत दुबे के लेख शामिल बा.

भोजपुरी के हालात के एहले बढ़िया नमूना कहीं नइखे मिले वाला. आशा करत बानी कि जल्दिए भोजपुरी कहानी आ कवितो हिदी में लिखाए लागी आ तहिया शायद भोजपुरी के पंचन के संतोष हो जाई कि भोजपुरी खातिर अतना मेहनत आखिरकार सफल होइए गइल. हर बेर सोचीलें कि एह पत्रिका के चरचा अनेरे करत बानी बाकिर फेर एह बात के संतोष रहेला कि चलऽ हिंदीए में सही कम से कम भोजपुरी के चरचा त होखत बा. दुख एहीसे होखेला कि प्रकाशक मजबूत बाड़ें आ संपादकीय मंडल सक्षम. अगर ई लोग ठान लेव त भोजपुरी खातिर बहुत कुछ कर सकेला बाकिर दुर्भाग्य से भोजपुरी के आर्थिक पक्ष अतना कमजोर हो गइल बा कि भोजपुरी प्रकाशन के जिअवले राखल एगो तप से कम नइखे रहि गइल. भोजपुरी में प्रकाशन योग्य रचनन के अतना अभाव हो गइल बा कि पत्रिका चलावे वाला लोग मजबूर हो जाला. बाकिर अतना जरूर कहब कि भोजपुरी सिनेमा का तरह हिंदी सिनेमा के नकल ना कर के कुछ असल करे के कोशिश होखीत त सचहूँ भोजपुरी के ओहसे फायदा होखीत. अगर ई सगरी सामग्री, हिंदी के कविता छोड़, भोजपुरी में अनुवाद कर के प्रकाशित होखल करे त एह पत्रिका के वजन कुछ अउर होखी अबहीं त अनगिनत हिंदी पत्रिकन में से एगो इहो बा.

भोजपुरी ले के हीन भावना खाली पत्रिके का क्षेत्र में ना लउके, भोजपुरी के नाम पर काम करे वाला सगरी संस्थो आपन रपट हिंदीए में जारी करेली सँ. काश अगर सगरी रपट भोजपुरी में दिहल जाइत आ साथे ओकर हिंदी अनुवाद कह के हिंदी रपटो दे दिहल जाइत त ओहसे एगो अउर सनेशा जाइत मीडिया वालन के, राजनीतिज्ञन के. अबहीं त नेतवने से पूछे के योजना बनत बा कि आखिरकार कहिया दर्ज होखी भोजपुरी संविधान का अठवीं अनुसूची में बाकिर हम पूछल चाहत बानी भोजपुरी के कर्णधारन से कि कहिया बोलल, बतियावल़, भाषण दिहल, प्रेस विज्ञप्ति वगैरह भोजपुरी में दिहल कइल जाई?

– संपादक, अँजोरिया

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2 Comments

  1. Rohit Yadav

    भोजपुरी के नाव पे कमाए खाए लायक पत्रिका त ठीके बा जी लेकिन लगभग सभे अंकवा में कुछ ना कुछ दोसरा के नाव वाला दोसरा के नाव पे मिलिए जाला लागत बा कई लोगन के अपना आप से जोड़ के राखे ल आकोमोडेत कइल जा रहल बा ओह लोग के नावे कुछ ना कुछ छाप छाप के। बाकि जइसन जेकर नियत

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अँजोरिया के भामाशाह

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सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

(3)

24 जून 2023 दयाशंकर तिवारी जी,
सहयोग राशि - एगारह सौ एक रुपिया
(4)
18 जुलाई 2023
फ्रेंड्स कम्प्यूटर, बलिया
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया
(7)
19 नवम्बर 2023
पाती प्रकाशन का ओर से, आकांक्षा द्विवेदी, मुम्बई
सहयोग राशि - एगारह सौ रुपिया

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