Month: मई 2017

चालीस बरीस बाद सिनेमा का परदा प फेरु लउकी हाथी

साल 1971 में बनल राजेश खन्ना के फ़िलिम हाथी मेरे साथी आ 1976 में बचवन ला बनल फिलिम सफेद हाथी का बाद अनेके भासन में बनल सैकड़न फिलिमन में हाथी…

आपन धियवा नीमन रहीत त बीरान पारीत गारी : बतंगड़ 38

– ओ. पी. सिंह एह घरी फैशन हो चलल बा डॉक्टरन के कवनो ना कवनो बहाने ठोकाई कइला के. गरीब के जोरू भर गाँव देवर. जेकरे मन करी आके चुहल…

गोरखपुर भोजपुरी संगम’ क 87वीं बइठकी

काल्हु अतवार का दिने गोरखपुर भोजपुरी संगम’ क 87वीं बइठकी खरैया पोखरा, बसारतपुर, गोरखपुर में स्व.सत्तन जी के आवास पर सम्पन्न भइल. एहकर अध्यक्षता सूर्य देव पाठक ‘पराग’ जी आ…

पाती अक्षर सम्मान से सम्मानित भइलें तीन गो साहित्यकार

बलिया के बापू भवन सभागार में काल्हु अतवार का दिने विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई आ भोजपुरी दिशाबोध के पत्रिका पाती के आयोजन में भोजपुरी के तीन गो मूर्धन्य…

थाती

– नीरज सिंह पुरनका शिवाला के पुजारी पं. गोबिन मिसिर के पराती के राग पहिले उठे कि मियाँ टोली के मुरुगवन के बांग पहिले सुनाय- इ केहू ना कहि सकत…

ना नीमन काम करे, ना दरबारे ध के जाय : बतंगड़ – 36

– ओ. पी. सिंह समाज के अनुभव इहे बा कि नीमन काम करे वाला के आए दिन मुसीबत झेले के पड़ेला. ओकरा से सभकर उमीद अतना बढ़ि जाला कि ओकर…

का लिखीं बुझाते नइखे

– लव कान्त सिंह “लव” कुछो अब सोहाते नइखे, का लिखीं बुझाते नइखे। नेता कोई गद्दार लिखीं, डाकू के सरदार लिखीं, चोर के पहरेदार लिखीं, कि गरीब के अलचार लिखीं,…